सपा प्रवक्ता मनोज यादव गिरफ्तार: दो दिन तक लापता रहे, पत्नी ने दर्ज कराई थी गुमशुदगी की रिपोर्ट, जाति सूचक शब्द और धमकी देने के आरोप में बाराबंकी पुलिस ने किया गिरफ्तार, समाजवादी पार्टी ने जताई थी चिंता
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता और टीवी पैनलिस्ट मनोज यादव को बाराबंकी पुलिस ने शुक्रवार को गिरफ्तार कर लिया। वे पिछले दो दिनों से लापता थे, जिसके बाद उनकी पत्नी ने लखनऊ के गोमतीनगर थाने में गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई। सपा ने भी सोशल मीडिया पर चिंता जताई थी। पुलिस ने स्पष्ट किया कि सफदरगंज थाने में 11 फरवरी को जाति सूचक अपमानजनक शब्दों और धमकी देने के आरोप में मुकदमा दर्ज था। अनुसूचित जाति/जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज। मनोज यादव बाराबंकी के भगोलापुरवा गांव के निवासी हैं। पुलिस ने गुप्त सूचना पर उन्हें पकड़ा। जांच जारी।
UP News: समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता और टीवी पैनलिस्ट मनोज यादव को बाराबंकी पुलिस ने शुक्रवार को गिरफ्तार कर लिया। सपा नेता पिछले दो दिनों से लापता चल रहे थे, जिसके बाद उनकी पत्नी ने लखनऊ के गोमतीनगर थाने में गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई थी।
समाजवादी पार्टी ने भी शुक्रवार सुबह अपने आधिकारिक एक्स हैंडल से मनोज यादव के लापता होने की जानकारी देते हुए पुलिस से तत्काल कार्रवाई की मांग की थी। हालांकि, बाद में बाराबंकी पुलिस ने स्पष्ट किया कि मनोज यादव को जाति सूचक शब्दों का प्रयोग करने और धमकी देने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। इस मामले में सफदरगंज थाने में 11 फरवरी को ही मुकदमा दर्ज किया जा चुका था।
UP News: गुमशुदगी की शिकायत से शुरू हुआ मामला
मनोज यादव बाराबंकी जिले के सफदरगंज थाना क्षेत्र के भगोलापुरवा गांव के निवासी हैं।
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लापता होने की खबर: पिछले दो दिनों से मनोज यादव अपने घर नहीं पहुंचे थे और उनका मोबाइल फोन भी बंद था। उनकी पत्नी ने गुरुवार शाम लखनऊ के गोमतीनगर थाने में गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई।
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तलाश: शिकायत के बाद गोमतीनगर पुलिस ने मामला दर्ज कर खोजबीन शुरू कर दी थी। हालांकि, जल्द ही यह स्पष्ट हो गया कि मनोज यादव लापता नहीं थे बल्कि वे बाराबंकी पुलिस की गिरफ्त में आने से बचने के लिए छिपे हुए थे।
UP News: समाजवादी पार्टी की गंभीर चिंता
शुक्रवार की सुबह समाजवादी पार्टी के आधिकारिक एक्स हैंडल से एक ट्वीट किया गया, जिसमें मनोज यादव के लापता होने को अत्यंत चिंताजनक और गंभीर विषय बताया गया:
“समाजवादी पार्टी के टीवी पैनलिस्ट मनोज यादव कल रात से लापता हैं जोकि बहुत गंभीर विषय है। पुलिस मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल खोजबीन तेज करे। उनके साथ किसी भी प्रकार की अनहोनी न हो।”
पार्टी के नेताओं ने भी सोशल मीडिया पर इस मामले को उठाना शुरू कर दिया था। हालांकि, कुछ घंटों बाद ही जब बाराबंकी पुलिस ने मनोज यादव की गिरफ्तारी की सूचना दी, तो पूरा मामला स्पष्ट हो गया।
UP News : जाति सूचक शब्द और धमकी के गंभीर आरोप
बाराबंकी पुलिस के अनुसार, मनोज यादव के खिलाफ 11 फरवरी को सफदरगंज थाने में एक मुकदमा दर्ज किया गया था।
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आरोप: एक स्थानीय व्यक्ति ने शिकायत दर्ज कराई थी कि मनोज यादव ने उसके साथ विवाद के दौरान जाति सूचक अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया और गंभीर परिणामों की धमकी दी।
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धाराएं: इस शिकायत के आधार पर पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया।
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गिरफ्तारी: शुक्रवार को पुलिस ने उन्हें किसी गुप्त सूचना के आधार पर पकड़ लिया।
UP News : राजनीतिक पृष्ठभूमि और टीवी पैनलिस्ट के रूप में पहचान
मनोज यादव समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता हैं और विभिन्न टीवी चैनलों पर होने वाली बहसों में नियमित रूप से भाग लेते रहे हैं। वे अपने मुखर और आक्रामक तेवर के लिए जाने जाते हैं। टीवी डिबेट्स में उनकी उपस्थिति अक्सर चर्चा का विषय बनती रही है। बाराबंकी के भगोलापुरवा गांव से ताल्लुक रखने वाले मनोज यादव स्थानीय राजनीति में भी सक्रिय रहे हैं।
UP News: कानूनी पहलू और आगे की कार्रवाई
जाति सूचक शब्दों का प्रयोग करना और धमकी देना दोनों ही गंभीर अपराध हैं।
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सजा के प्रावधान: अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत अपराध साबित होने पर कम से कम छह महीने से लेकर पांच साल तक की सजा हो सकती है।
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न्यायिक प्रक्रिया: पुलिस जांच पूरी होने के बाद चार्जशीट दायर की जाएगी। साक्ष्य और गवाहों के बयान महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। फिलहाल उन्हें गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।
निष्कर्ष
समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता मनोज यादव की गिरफ्तारी एक गंभीर मामला है जो राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बन गया है। जो व्यक्ति पहले लापता बताया जा रहा था, वह दरअसल एक आपराधिक मामले में वांछित था। कानूनी प्रक्रिया अब अपना रास्ता तय करेगी।
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