सोम प्रदोष व्रत 2026 पारण का शुभ समय जान लें! 17 मार्च को सुबह 9:23 बजे से पहले खोलें व्रत, भगवान शिव की पूजा के साथ करें पारण तभी मिलेगा पूर्ण फल
17 मार्च सुबह 9:23 बजे तक पारण का शुभ मुहूर्त, जानें सही विधि और नियम
Som Pradosh Vrat 2026: व्रत रखना जितना जरूरी है, उसे सही विधि से खोलना उससे भी अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है। शास्त्रों में कहा गया है कि यदि पारण गलत समय पर किया जाए तो पूरे दिन की साधना का पुण्य क्षीण हो सकता है। यही कारण है कि ज्योतिष और धर्म विशेषज्ञ सोम प्रदोष व्रत के पारण के लिए सटीक मुहूर्त जानने पर विशेष जोर देते हैं।
Som Pradosh Vrat 2026: सोम प्रदोष व्रत 2026 कब है और इसका महत्व क्या है?
16 मार्च 2026 को सोम प्रदोष व्रत रखा जा रहा है। यह व्रत फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को सोमवार के दिन पड़ने के कारण “सोम प्रदोष” कहलाता है। सोमवार को भगवान शिव का प्रिय दिन माना जाता है और जब प्रदोष व्रत सोमवार को आए तो उसका महत्व कई गुना बढ़ जाता है।
धर्म शास्त्रों के अनुसार प्रदोष व्रत में भगवान शिव और माता पार्वती की संयुक्त आराधना की जाती है। इस दिन प्रदोष काल में यानी सूर्यास्त से पहले के डेढ़ से दो घंटों में शिवलिंग पर जलाभिषेक, बेलपत्र अर्पण और महामृत्युंजय मंत्र का जाप विशेष फलदायी माना जाता है।
Som Pradosh Vrat 2026: सोम प्रदोष व्रत पारण का सही समय क्या है?
17 मार्च 2026 को व्रत का पारण किया जाएगा। पारण का शुभ समय प्रातःकाल से लेकर सुबह 9 बजकर 23 मिनट तक है। इस समय सीमा के भीतर व्रत खोलना शास्त्र सम्मत और शुभ माना जाता है।
ज्योतिष विद्वानों के अनुसार, “किसी भी व्रत में पारण का समय उतना ही पवित्र होता है जितना व्रत आरंभ का। सही मुहूर्त में व्रत खोलने से भगवान की कृपा संपूर्ण रूप से प्राप्त होती है और व्रत का फल अक्षुण्ण रहता है।” इसलिए भक्तजन 17 मार्च की सुबह 9 बजकर 23 मिनट से पहले ही पारण कर लें।
Som Pradosh Vrat 2026: पारण से पहले क्या करें और क्या न करें?
पारण करने से पहले स्नान करना आवश्यक है। इसके बाद भगवान शिव का स्मरण करते हुए तुलसी या बेलपत्र के साथ जल ग्रहण करने से पारण की शुरुआत शुभ मानी जाती है। व्रत खोलने से पहले एकबार मन ही मन महादेव का ध्यान अवश्य करें।
पारण में जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए और न ही बिना स्नान किए व्रत खोलना उचित है। सात्विक भोजन से पारण करना शुभ होता है और तामसिक भोजन यानी मांस, मदिरा या अधिक मसालेदार भोजन से परहेज करना चाहिए।
Som Pradosh Vrat 2026: प्रदोष व्रत का पारण अगले दिन क्यों किया जाता है?
प्रदोष व्रत की विशेषता यह है कि इसमें पूरे दिन उपवास रखकर शाम को प्रदोष काल में भगवान शिव की विधिवत पूजा की जाती है। चूँकि पूजा का मुख्य समय संध्याकाल में होता है, इसलिए उस दिन पूजा के बाद व्रत खोलने की परंपरा कम प्रचलित है।
अधिकांश भक्त अगले दिन सूर्योदय के बाद पारण करते हैं। यह परंपरा शास्त्र सम्मत है और इसीलिए 17 मार्च को पारण का विधान बताया गया है। अगले दिन सुबह उठकर, स्नान कर, शिव का स्मरण करते हुए व्रत खोलना सबसे उत्तम माना जाता है।
Som Pradosh Vrat 2026: प्रदोष व्रत में क्या खाएं और किन चीजों से बचें?
व्रत के दौरान फलाहार, दूध, दही, मखाना, साबूदाना और सेंधा नमक से बनी चीजें खाई जा सकती हैं। अनाज, नमक और तामसिक भोजन से परहेज करना जरूरी है।
पारण के दिन सात्विक भोजन जैसे दूध, फल, पंचामृत या हल्का सात्विक भोजन लिया जा सकता है। यदि कोई बीमार हो या बुजुर्ग हो तो वे अपनी सुविधानुसार व्रत का पालन कर सकते हैं। शास्त्रों में श्रद्धा और भाव को नियमों से भी ऊपर माना गया है।
Som Pradosh Vrat 2026: सोम प्रदोष व्रत रखने से क्या लाभ मिलते हैं?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार प्रदोष व्रत रखने से जीवन में सुख, समृद्धि और स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है। विशेष रूप से सोम प्रदोष के दिन भगवान शिव की आराधना करने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जीवन में आने वाले कष्टों से मुक्ति मिलती है।
पुराणों में वर्णित है कि प्रदोष व्रत करने वाले भक्त को सांसारिक सुखों के साथ-साथ मोक्ष का भी मार्ग प्रशस्त होता है। विवाह में विलंब, संतान प्राप्ति की इच्छा और करियर में आ रही बाधाओं को दूर करने के लिए भी यह व्रत रखने की परंपरा है।
निष्कर्ष
सोम प्रदोष व्रत केवल एक उपवास नहीं, बल्कि यह आत्मा को परमात्मा से जोड़ने का एक पवित्र माध्यम है। भगवान शिव की आराधना में जितनी श्रद्धा हो उतना ही व्रत का फल भी समृद्ध होता है। 17 मार्च को सुबह 9 बजकर 23 मिनट तक पारण कर लें और इस पावन व्रत को विधिपूर्वक संपन्न करें। महादेव की कृपा से जीवन के हर कष्ट का निवारण होगा और घर में सुख, शांति और समृद्धि का वास होगा।
read more here