पश्चिम बंगाल SIR विवाद मामले में सुप्रीम कोर्ट ने ममता बनर्जी को दिया झटका, मतदाता सूची की समय सीमा बढ़ी

चुनाव आयोग अधिकारियों पर हमले के मामले में बंगाल DGP को देना होगा जवाब

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SIR in Bengal: स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर पश्चिम बंगाल में जारी विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को इस मामले में दोहरा झटका लगा है। एक तरफ खुद वकील बनकर अदालत में पैरवी करने की उनकी कोशिश विफल रही, वहीं दूसरी तरफ चुनाव आयोग के अधिकारियों के खिलाफ हो रही हिंसा और धमकियों के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बंगाल सरकार को कड़ी फटकार लगाई है।

SIR in Bengal: सुप्रीम कोर्ट का स्पष्ट संदेश

चीफ जस्टिस डी. वाई. चंद्रचूड़ और जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने SIR प्रक्रिया को लेकर अत्यंत स्पष्ट रुख अपनाया। अदालत ने कहा कि इस प्रक्रिया पर किसी भी प्रकार की रोक नहीं लगाई जा सकती है।

शीर्ष अदालत ने राज्य सरकारों को चेतावनी देते हुए कहा कि SIR की जांच प्रक्रिया में किसी भी तरह की बाधा डालने की अनुमति नहीं दी जाएगी। सुप्रीम कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा, “प्रक्रिया में कोई भी बाधा डालने की अनुमति नहीं दी जाएगी।”

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि इस मामले में राज्य सरकारों को अपनी ओर से किसी भी प्रकार की दखलअंदाजी करने की आवश्यकता नहीं है। यह निर्णय मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया को निर्बाध रूप से जारी रखने के चुनाव आयोग के अधिकार को मजबूती प्रदान करता है।

ममता बनर्जी की वकील बनने की कोशिश विफल

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट में इस मामले में खुद वकील बनकर पैरवी करने की कोशिश की थी। हालांकि, उनकी यह कोशिश नाकाम रही और अदालत ने उन्हें इसकी अनुमति नहीं दी।

यह ममता बनर्जी के लिए एक बड़ा झटका है, क्योंकि वे इस मामले में व्यक्तिगत रूप से हस्तक्षेप करना चाहती थीं। सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय से स्पष्ट है कि न्यायपालिका इस संवेदनशील मामले में राजनीतिक दखल को स्वीकार नहीं करेगी।

SIR in Bengal: चुनाव अधिकारियों पर हमले का गंभीर मुद्दा

सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल और अन्य वकीलों ने अदालत को बताया कि पश्चिम बंगाल में चुनाव आयोग के अधिकारियों को डराया-धमकाया जा रहा है। उनके साथ हिंसा की घटनाएं हो रही हैं और उन्हें अपना काम करने से रोका जा रहा है।

याचिकाकर्ताओं नायडू और गिरी ने अदालत के समक्ष गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने बताया कि सड़कों पर हिंसा हो रही है, लेकिन राज्य पुलिस FIR तक दर्ज नहीं कर रही है। यहां तक कि मुख्य चुनाव अधिकारी (CEO) को भी निशाना बनाया गया है।

इन गंभीर आरोपों पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए पश्चिम बंगाल के पुलिस महानिदेशक (DGP) को अपना व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया है।

DGP को देना होगा स्पष्टीकरण

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार, पश्चिम बंगाल के DGP को चुनाव आयोग द्वारा लगाए गए आरोपों का जवाब देना होगा। उन्हें यह स्पष्ट करना होगा कि चुनाव अधिकारियों की सुरक्षा में क्यों चूक हुई और इसके लिए जिम्मेदार कौन है।

यह आदेश राज्य प्रशासन के लिए एक गंभीर चेतावनी है। DGP को व्यक्तिगत हलफनामा देने का निर्देश दर्शाता है कि सुप्रीम कोर्ट इस मामले को बेहद गंभीरता से ले रहा है।

अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि चुनाव प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की बाधा या हिंसा बर्दाश्त नहीं की जाएगी। राज्य सरकार की यह जिम्मेदारी है कि वह चुनाव अधिकारियों को सुरक्षित माहौल में काम करने दे।

SIR in Bengal: मतदाता सूची की समय सीमा में विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में दस्तावेजों की जांच और अंतिम मतदाता सूची के प्रकाशन के लिए समय सीमा में एक सप्ताह का विस्तार दिया है। पहले यह समय सीमा 14 फरवरी थी, जिसे अब बढ़ा दिया गया है।

यह निर्णय इसलिए लिया गया ताकि SIR प्रक्रिया को उचित तरीके से पूरा किया जा सके। अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि सूची में शामिल सभी 8505 ग्रुप-बी अधिकारी सोमवार शाम 5 बजे तक अपनी ड्यूटी के लिए रिपोर्ट करें।

चुनाव आयोग को मिला अधिकार

सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को यह अधिकार दिया है कि वह वर्तमान निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (ERO) और सहायक निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (AERO) को बदल सकता है।

साथ ही, यदि कोई अधिकारी योग्य पाया जाता है तो आयोग उनकी सेवाएं जारी भी रख सकता है। यह निर्णय चुनाव आयोग को SIR प्रक्रिया को प्रभावी ढंग से पूरा करने के लिए आवश्यक लचीलापन प्रदान करता है।

SIR in Bengal: SIR विवाद की पृष्ठभूमि

स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) एक विशेष प्रक्रिया है जिसके तहत मतदाता सूची से फर्जी और डुप्लिकेट मतदाताओं को हटाया जाता है। यह प्रक्रिया चुनावों की पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण है।

पश्चिम बंगाल में इस प्रक्रिया को लेकर विवाद इसलिए खड़ा हुआ क्योंकि TMC सरकार का आरोप है कि इसके जरिए उनके वोटरों को सूची से हटाया जा रहा है। वहीं BJP का कहना है कि राज्य में लाखों अवैध बांग्लादेशी घुसपैठिये मतदाता सूची में शामिल हैं।

राजनीतिक निहितार्थ

सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय आगामी चुनावों के लिए महत्वपूर्ण है। पश्चिम बंगाल में 2026 में विधानसभा चुनाव होने हैं और मतदाता सूची का मुद्दा बेहद संवेदनशील है।

ममता बनर्जी को मिला यह झटका TMC के लिए चिंताजनक है। वहीं BJP और अन्य विपक्षी दल इसे अपनी जीत मान रहे हैं। अदालत के इस निर्णय से यह स्पष्ट है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया बिना किसी राजनीतिक दबाव के पूरी होगी।

SIR in Bengal: निष्कर्ष

सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय लोकतांत्रिक प्रक्रिया की रक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। चुनाव आयोग को मजबूती मिलने और राज्य सरकारों को चेतावनी मिलने से SIR प्रक्रिया निर्बाध रूप से चल सकेगी। यह फैसला सुनिश्चित करता है कि चुनाव प्रक्रिया स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से संपन्न हो सके।

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