चांदी की कीमतों में आ सकती है तगड़ी तेजी! सोने से बेहतर प्रदर्शन की संभावना, 4-6 हफ्तों में 94.50 डॉलर तक पहुंच सकती है कीमत, गोल्ड-सिल्वर रेश्यो 60 के पास आया, सोलर पैनल-EV में बढ़ी डिमांड, केडिया एडवाइजरी के डायरेक्टर अजय केडिया का विश्लेषण

गोल्ड-सिल्वर रेश्यो 60 के पास, सोलर-EV डिमांड बढ़ी, 4-6 हफ्तों में सोने से बेहतर प्रदर्शन संभव

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Silver Price Hike: सोने और चांदी की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव जारी है, लेकिन अब टेक्निकल विशेषज्ञों का मानना है कि चांदी की कीमतों में जोरदार तेजी आने वाली है। केडिया एडवाइजरी के डायरेक्टर अजय केडिया ने टेक्निकल संकेतों के आधार पर बताया कि अगले 4 से 6 हफ्तों में चांदी सोने की तुलना में बेहतर प्रदर्शन कर सकती है। गोल्ड-सिल्वर रेश्यो (GSR) अब गिरकर 59.40-60 के पास आ गया है, जो दर्शाता है कि चांदी मजबूत हो रही है। अजय केडिया के अनुसार, यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी की कीमत 75 डॉलर के ऊपर बनी रहती है, तो यह 94.50 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकती है। चांदी की बढ़ती इंडस्ट्रियल डिमांड, खासकर सोलर पैनल, इलेक्ट्रिक व्हीकल और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में, इस तेजी के प्रमुख कारण हैं। साथ ही, बाजार में चांदी की सप्लाई डिमांड के मुकाबले कम है, जो कीमतों को और ऊपर धकेल सकती है।

गोल्ड-सिल्वर रेश्यो: चांदी की मजबूती का संकेत

गोल्ड-सिल्वर रेश्यो (GSR) एक महत्वपूर्ण इंडिकेटर है जो बताता है कि एक औंस सोना खरीदने के लिए कितने औंस चांदी की जरूरत होगी।

GSR कैसे काम करता है:

  • जब GSR ऊंचा होता है (जैसे 100 या उससे ज्यादा), तो इसका मतलब है कि सोना चांदी के मुकाबले बहुत महंगा हो गया है या चांदी बहुत सस्ती हो गई है।

  • जब GSR नीचे आता है (जैसे 60 के आसपास), तो इसका मतलब है कि चांदी सोने के मुकाबले तेजी से महंगी हो रही है।

अजय केडिया ने बताया कि GSR अब गिरकर 59.40-60 के स्तर पर आ गया है। यह एक महत्वपूर्ण तकनीकी संकेत है।

ऐतिहासिक संदर्भ: कुछ समय पहले GSR 107 तक पहुंच गया था, जो दर्शाता था कि चांदी अत्यधिक अंडरवैल्यूड थी। उस समय से अब तक GSR में लगभग 45% की गिरावट आई है, जिसका मतलब है कि चांदी ने सोने के मुकाबले काफी बेहतर प्रदर्शन किया है।

आगे का अनुमान: यदि GSR और गिरता है (जैसे 55 या 50 तक), तो इसका मतलब होगा कि चांदी की तेजी और तेज हो सकती है।

Silver Price Hike: चांदी की बढ़ती इंडस्ट्रियल डिमांड

अजय केडिया ने चांदी की कीमतों में तेजी के पीछे सबसे बड़े कारण के रूप में इसकी बढ़ती इंडस्ट्रियल डिमांड को बताया।

1. सोलर पैनल इंडस्ट्री: सोलर पैनल बनाने में चांदी एक अनिवार्य घटक है। सोलर सेल्स में चांदी का उपयोग कंडक्टर के रूप में होता है। जैसे-जैसे दुनिया भर में रिन्यूएबल एनर्जी की ओर रुख बढ़ रहा है, सोलर पैनल की डिमांड भी तेजी से बढ़ रही है। भारत सहित कई देशों ने 2030 तक अपनी सोलर कैपेसिटी को कई गुना बढ़ाने के लक्ष्य रखे हैं।

2. इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV): इलेक्ट्रिक कारों और बाइक्स में भी चांदी का उपयोग होता है, खासकर बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम और इलेक्ट्रिकल कनेक्शन में। EV इंडस्ट्री में विस्फोटक वृद्धि हो रही है, जिससे चांदी की डिमांड बढ़ रही है।

3. इलेक्ट्रॉनिक्स: स्मार्टफोन, लैपटॉप, टीवी, और अन्य इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसेज में भी चांदी का उपयोग होता है। 5G नेटवर्क के विस्तार और IoT (Internet of Things) के बढ़ते उपयोग से इलेक्ट्रॉनिक्स की डिमांड बढ़ रही है, जिससे चांदी की जरूरत भी बढ़ रही है।

4. मेडिकल उपयोग: चांदी में एंटीबैक्टीरियल गुण होते हैं, इसलिए इसका उपयोग मेडिकल इक्विपमेंट और दवाओं में भी होता है।

सिल्वर इंस्टीट्यूट के अनुसार, 2024 में वैश्विक इंडस्ट्रियल सिल्वर डिमांड 60% से अधिक बढ़ी है।

Silver Price Hike: सप्लाई की कमी

चांदी की बढ़ती कीमतों का एक और बड़ा कारण सप्लाई की कमी है।

  • माइनिंग की चुनौतियां: चांदी की नई माइंस खोलना महंगा और समय लेने वाला है। मौजूदा माइंस से प्रोडक्शन भी सीमित है।

  • बाय-प्रोडक्ट इश्यू: दुनिया की लगभग 70% चांदी दूसरी धातुओं (जैसे कॉपर, लेड, जिंक) की माइनिंग के दौरान बाय-प्रोडक्ट के रूप में मिलती है। इसलिए चांदी की सप्लाई दूसरी धातुओं की माइनिंग पर निर्भर करती है।

  • रिसाइक्लिंग सीमित: सोने के मुकाबले चांदी की रिसाइक्लिंग कम होती है क्योंकि इसका उपयोग छोटी मात्रा में कई प्रोडक्ट्स में होता है।

  • डिमांड-सप्लाई गैप: 2024 और 2025 में चांदी की डिमांड सप्लाई से लगातार ज्यादा रही है, जिससे कीमतों पर ऊपर की ओर दबाव बन रहा है।

टेक्निकल संकेत: Oversold से रिकवरी

अजय केडिया ने टेक्निकल चार्ट के आधार पर बताया कि चांदी Oversold जोन से बाहर निकल रही है।

RSI इंडिकेटर: Relative Strength Index (RSI) एक टेक्निकल टूल है जो बताता है कि कोई एसेट Overbought (बहुत ज्यादा खरीदा गया) है या Oversold (बहुत ज्यादा बेचा गया)।

  • जब RSI 30 से नीचे होता है, तो एसेट Oversold माना जाता है और इसमें रिकवरी की संभावना होती है।

  • चांदी का RSI हाल ही में बहुत नीचे था, लेकिन अब ऊपर आ रहा है, जो तेजी का संकेत है।

सपोर्ट लेवल: चांदी ने 75 डॉलर के आसपास मजबूत सपोर्ट बना लिया है। जब तक कीमत इस स्तर के ऊपर रहती है, तब तक तेजी की संभावना बनी रहती है।

ब्रेकआउट की संभावना: यदि चांदी 78-80 डॉलर के रेजिस्टेंस को तोड़ती है, तो यह तेजी से 90-95 डॉलर की ओर बढ़ सकती है।

Silver Price Hike: सोने की तुलना में बेहतर निवेश

अजय केडिया का मानना है कि मौजूदा समय में निवेश के लिहाज से चांदी सोने से ज्यादा आकर्षक है।

सोने की स्थिति: सोना पहले ही काफी महंगा हो चुका है और ऑल-टाइम हाई के आसपास ट्रेड कर रहा है। ऐसे में सोने में और ज्यादा तेजी की गुंजाइश सीमित हो सकती है।

चांदी की वैल्यूएशन: GSR के 60 के आसपास होने का मतलब है कि चांदी अभी भी ऐतिहासिक रूप से सस्ती है। लंबी अवधि में GSR का औसत 60-70 के बीच रहा है, लेकिन कभी-कभी यह 40-50 तक भी गिर जाता है।

रिटर्न की संभावना: यदि चांदी 75 डॉलर से 94.50 डॉलर तक जाती है, तो यह लगभग 26% की बढ़त होगी। सोने में इतनी तेजी की संभावना कम है।

Silver Price Hike: अगले 4-6 हफ्तों का अनुमान

अजय केडिया ने स्पष्ट रूप से कहा कि अगले 4 से 6 हफ्तों में चांदी सोने से बेहतर प्रदर्शन कर सकती है।

  • टारगेट: यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी की कीमत 75 डॉलर के ऊपर बनी रहती है, तो यह 94.50 डॉलर प्रति औंस तक जा सकती है।

  • घरेलू बाजार: भारतीय बाजार में भी चांदी की कीमतें इसी अनुपात में बढ़ सकती हैं। मौजूदा कीमत लगभग ₹92,000-95,000 प्रति किलो के आसपास है, जो ₹1,10,000-1,15,000 तक जा सकती है।

  • सावधानी: हालांकि, निवेशकों को सावधानी बरतनी चाहिए। यदि चांदी 75 डॉलर के सपोर्ट को तोड़ती है, तो गिरावट भी आ सकती है।

चांदी में निवेश करने वालों के लिए यह एक अच्छा समय हो सकता है, लेकिन मार्केट की वोलैटिलिटी को देखते हुए सावधानी से निवेश करना चाहिए।

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