महाशिवरात्रि पर शिववास: क्या होता है शिववास और भोलेनाथ की पूजा में क्यों जरूरी है इसे जानना
घर बैठे 12 ज्योतिर्लिंग दर्शन का पुण्य, शिववास गणना विधि और 15 फरवरी का विशेष शुभ संयोग
Mahashivratri Shiv Vaas 2026: महाशिवरात्रि का पावन पर्व नजदीक आ रहा है और इस दिन भगवान शिव की पूजा-अर्चना के लिए शिववास की जानकारी होना बेहद महत्वपूर्ण है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान शिव की विशेष पूजा, रुद्राभिषेक या महामृत्युंजय मंत्र के अनुष्ठान से पहले शिववास की गणना करना आवश्यक माना जाता है। बिना शिववास देखे पूजा करने से प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकते हैं।
Mahashivratri Shiv Vaas 2026: शिववास क्या होता है और इसका महत्व
शिववास का शाब्दिक अर्थ है भगवान शिव का निवास स्थान। हिंदू धर्मशास्त्रों के अनुसार, भगवान शिव हर माह में अलग-अलग सात स्थानों पर विराजमान होते हैं।
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सात स्थान: कैलाश पर्वत, माता गौरी के साथ, नंदी बैल की पीठ पर, सभा में, भोजन करते समय, क्रीडा करते समय और श्मशान में।
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महत्व: अगर शिव जी शुभ स्थान पर विराजमान हैं तो पूजा का फल शुभ और मंगलकारी होता है। लेकिन अगर वे अशुभ स्थान पर हैं और उस समय पूजा या अनुष्ठान किया जाए तो वांछित फल नहीं मिलता, बल्कि कष्ट और संताप का सामना करना पड़ सकता है।
Mahashivratri Shiv Vaas 2026 : शिववास की गणना कैसे करें
शिववास की गणना तिथि के आधार पर एक गणितीय सूत्र के माध्यम से की जाती है:
सूत्र: [(तिथि × 2) + 5] ÷ 7
गणना की विधि:
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जिस तिथि के लिए शिववास जानना है, उस तिथि को 2 से गुणा करें।
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फिर इस गुणनफल में 5 जोड़ दें।
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इस योग को 7 से भाग दें। जो शेषफल आएगा, वही शिववास का स्थान बताएगा।
उदाहरण के लिए, त्रयोदशी (तिथि 13) के लिए: तिथि 13 × 2 = 26; 26 + 5 = 31; 31 ÷ 7 = शेषफल 3। शेषफल 3 आने पर शिववास वृषारूढ़ (नंदी की पीठ पर) होगा।
Mahashivratri Shiv Vaas 2026 : शेषफल के अनुसार शिववास के स्थान और उनके फल
| शेषफल | शिववास का स्थान | फल |
| 1 | कैलाश में निवास | सुख, समृद्धि और शांति की प्राप्ति। |
| 2 | गौरी पार्श्व में | सुख, संपदा और वैभव की प्राप्ति। |
| 3 | वृषारूढ़ (नंदी पर) | अभीष्ट सिद्धिदायक (कार्यों की सिद्धि)। |
| 4 | सभा में | संताप देने वाली स्थिति। |
| 5 | भोजन में | पीड़ादायक (शारीरिक या मानसिक पीड़ा)। |
| 6 | क्रीडारत (खेल में) | कष्टदायक स्थिति। |
| 0 | श्मशान में | सबसे अशुभ और मृत्युदायक। |
Mahashivratri Shiv Vaas 2026 : महाशिवरात्रि 2026 पर शिववास कहां होगा
महाशिवरात्रि 2026 फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को पड़ रही है।
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स्थिति: इस दिन भगवान शिव गौरी पार्श्व में यानी माता पार्वती के साथ कैलाश पर्वत पर विराजमान होंगे।
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प्रभाव: यह अत्यंत शुभ और मंगलकारी स्थिति है। इस दिन शिव पूजन करने से सुख, संपदा, वैभव और पारिवारिक समृद्धि की प्राप्ति होती है। भगवान शिव अपनी अर्धांगिनी माता पार्वती के साथ प्रसन्न मुद्रा में होते हैं।
Mahashivratri Shiv Vaas 2026 : शिववास देखने के नियम
कब शिववास देखना जरूरी नहीं होता:
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निष्काम पूजा: जब पूजा बिना किसी इच्छा या कामना के की जाती है।
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श्रावण मास: पूरे सावन के महीने में शिव पूजन के लिए इसे देखना आवश्यक नहीं है।
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तीर्थ और ज्योतिर्लिंग: 12 ज्योतिर्लिंगों या तीर्थ स्थानों पर पूजा करते समय।
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नियमित पूजा: रोज सुबह-शाम की जाने वाली सामान्य पूजा के लिए।
कब शिववास देखना जरूरी होता है:
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विशेष रुद्राभिषेक करते समय।
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महामृत्युंजय मंत्र अनुष्ठान शुरू करने से पहले।
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विशेष मनोकामना पूर्ति हेतु की जाने वाली पूजा में।
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किसी विशेष संकट निवारण के लिए।
निष्कर्ष
शिववास भगवान शिव की पूजा-अर्चना में एक महत्वपूर्ण पहलू है। महाशिवरात्रि 2026 पर शिववास गौरी पार्श्व में होगा, जो अत्यंत शुभ और मंगलकारी है। भक्तगण इस दिन पूर्ण श्रद्धा और भक्ति से भोलेनाथ की आराधना करें।
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