Shivling Prasad Rules,- शिवलिंग पर चढ़ाया प्रसाद खाना चाहिए या नहीं? शिव पुराण ने बताया पूरा सच, जानें किस शिवलिंग का प्रसाद खा सकते हैं और किसका नहीं
शिव पुराण के अनुसार शिवलिंग पर चढ़ाया प्रसाद खाना वर्जित, चंड गण का भाग माना जाता है, दीक्षित भक्तों के लिए अलग नियम
Shivling Prasad Rules: भगवान शिव की पूजा करने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं के मन में एक सवाल अक्सर उठता है जो वर्षों से लोगों को भ्रमित करता आया है। वह सवाल है कि क्या शिवलिंग पर चढ़ााया गया प्रसाद खाना चाहिए या नहीं? शिव पुराण और अन्य धर्मग्रंथों के अनुसार शिवलिंग के प्रसाद से जुड़ा असली और पूरा सच यहाँ दिया गया है।
Shivling Prasad Rules: शिवलिंग के प्रसाद का रहस्य क्या है
हिंदू धर्म में अन्य देवी-देवताओं को अर्पित किया गया भोग प्रसाद के रूप में श्रद्धालुओं में बांटा जाता है और उसे ग्रहण करना पुण्यदायक माना जाता है। लेकिन भगवान शिव के मामले में नियम थोड़े अलग और गहरे हैं। शिव पुराण के अनुसार शिवलिंग के ऊपर सीधे चढ़ााया गया प्रसाद ग्रहण करना वर्जित माना गया है। इसके पीछे एक गहरी धार्मिक मान्यता है। शिव पुराण में उल्लेख है कि शिवलिंग पर चढ़ााया गया प्रसाद चंड नामक गण का भाग माना जाता है। चंड भगवान शिव के एक प्रमुख और शक्तिशाली गण हैं। यदि कोई व्यक्ति शिवलिंग पर चढ़ा हुआ प्रसाद ग्रहण करता है तो उसे चंड के हिस्से को छीनने का दोष लग सकता है।
Shivling Prasad Rules: शिव दीक्षित भक्तों के लिए अलग है नियम
शास्त्रों में एक महत्वपूर्ण अपवाद भी बताया गया है। भगवान शिव की दीक्षा लेने वाले पुरुष अर्थात जो व्यक्ति शैव परंपरा में विधिवत दीक्षित हैं उनके लिए सभी प्रकार के शिवलिंगों पर चढ़ााया गया नैवेद्य शुभ और महाप्रसाद के समान होता है। ऐसे दीक्षित भक्तों को शिव का प्रसाद अनिवार्य रूप से ग्रहण करना चाहिए। शिव पुराण में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि यदि शिव का प्रसाद सामने आए तो उसे यह कहकर नहीं टालना चाहिए कि मैं इसे बाद में ग्रहण करूंगा। जो व्यक्ति महादेव के प्रसाद को स्वीकार करने में जानबूझकर देरी करता है या उसका अनादर करता है वह अनजाने में पाप का भागीदार बन जाता है।
Shivling Prasad Rules: पापों से मुक्ति देता है शिव प्रसाद
शिव पुराण में शिव प्रसाद की महिमा का अत्यंत विस्तृत वर्णन मिलता है। शास्त्रों में यहां तक कहा गया है कि यदि ब्रह्म-हत्या जैसा घोर और महापाप करने वाला व्यक्ति भी शुद्ध मन और पवित्र भाव से शिव प्रसाद ग्रहण करता है तो उसके समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं। इससे शिव प्रसाद की अपार महिमा और शक्ति का अंदाजा लगाया जा सकता है। शिव प्रसाद को अस्वीकार करना या उसे अपमान के साथ फेंकना घोर अपराध माना गया है। इसलिए जब भी शिव प्रसाद मिले तो उसे श्रद्धा और भक्तिभाव से ग्रहण करना चाहिए।
Shivling Prasad Rules: किस शिवलिंग का प्रसाद खाया जा सकता है
यहाँ एक बेहद महत्वपूर्ण भेद को समझना जरूरी है जिसे अधिकांश लोग नहीं जानते। शास्त्रों के अनुसार केवल वही प्रसाद ग्रहण करना वर्जित है जो सीधे पाषाण यानी पत्थर के शिवलिंग के स्पर्श में आता है। अगर प्रसाद को शिवलिंग से दूर किसी थाली या पात्र में अलग रखकर भगवान को अर्पित किया गया है तो उसे ग्रहण करने में कोई दोष नहीं है। यदि भगवान शिव की मूर्ति जो धातु या पत्थर की बनी हो लेकिन शिवलिंग का रूप न हो के सामने प्रसाद चढ़ााया गया है तो वह भी ग्रहण किया जा सकता है। इसके अलावा नर्मदा नदी में प्राकृतिक रूप से मिलने वाले बाणलिंग पर चढ़ााया गया प्रसाद ग्रहण करना उचित माना जाता है।
Shivling Prasad Rules: धातु से बने शिवलिंग के प्रसाद का क्या है नियम
शिव पुराण में धातु से बने शिवलिंग के संदर्भ में भी स्पष्ट उल्लेख मिलता है। चांदी, तांबा या पीतल जैसी धातुओं से बने शिवलिंग पर चढ़ााया गया प्रसाद ग्रहण किया जा सकता है। इन धातुओं से बने शिवलिंग पर चंड का वैसा अधिकार नहीं माना जाता जैसा पाषाण शिवलिंग पर होता है। शास्त्रों के अनुसार भगवान शिव की प्रतिमाओं या तस्वीर पर भी चंड का अधिकार नहीं होता है। इसलिए शिव की प्रतिमा या चित्र के सामने रखा गया प्रसाद श्रद्धापूर्वक ग्रहण किया जा सकता है। शालिग्राम पर चढ़ााया गया प्रसाद भी अमृत के समान माना जाता है और उसे बिना किसी संकोच के खाया जा सकता है।
Shivling Prasad Rules: शिव पूजा में प्रसाद अर्पण का सही तरीका
शास्त्रीय मान्यता के अनुसार यदि आप शिव पूजा में भोग लगाना चाहते हैं तो सबसे उचित तरीका यह है कि प्रसाद को एक अलग थाली में सजाकर शिवलिंग के सामने रखें लेकिन शिवलिंग पर सीधे न रखें। इस तरह प्रसाद शिव को अर्पित भी हो जाता है और बाद में उसे परिवार के सदस्यों में वितरित भी किया जा सकता है। इसके अलावा शिव मंदिर में पंचामृत यानी दूध, दही, घी, शहद और शक्कर के मिश्रण से शिवलिंग का अभिषेक किया जाता है। इस पंचामृत को प्रसाद के रूप में ग्रहण करना अत्यंत शुभ और पुण्यदायक माना जाता है क्योंकि यह शिवलिंग पर अर्पित तो होता है लेकिन यह एक द्रव पदार्थ है और इसे प्रसाद स्वरूप ग्रहण करने की परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है।
Shivling Prasad Rules: भगवान शिव की पूजा में रखें ये सावधानियां
शिव पूजा में बेलपत्र, धतूरा, भांग और आक के फूल अर्पित किए जाते हैं। इनमें से धतूरा और भांग विषैले पदार्थ हैं इसलिए इन्हें प्रसाद के रूप में कभी नहीं खाना चाहिए। बेलपत्र का प्रसाद भी शिवलिंग से उतारकर नहीं खाना चाहिए। शिव पूजा में तुलसी का उपयोग वर्जित माना जाता है इसलिए तुलसी शिवलिंग पर नहीं चढ़ाई जाती। भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने के लिए इन नियमों और सावधानियों का पालन करना आवश्यक है।
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