SBI रिपोर्ट ने उठाए महंगाई के आंकड़ों पर सवाल: नई CPI सीरीज में UP-महाराष्ट्र का 43% दबदबा, भौगोलिक असंतुलन की चिंता

नई CPI सीरीज में UP-महाराष्ट्र का 43% दबदबा, भौगोलिक असंतुलन से महंगाई आंकड़े धुंधले हो सकते हैं

0

SBI Report : भारत में खुदरा महंगाई को मापने के पैमाने उपभोक्ता मूल्य सूचकांक में हाल ही में किए गए बदलावों ने एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की आर्थिक अनुसंधान टीम ने अपनी नवीनतम रिपोर्ट में सीपीआई की नई गणना पद्धति में बाजारों के चयन पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, नए सूचकांक में शामिल किए गए बाजारों का वितरण भौगोलिक रूप से असंतुलित है, जिसमें उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र का गैरवाजिब दबदबा है। नए खुदरा महंगाई दर के इंडेक्स में यूपी और महाराष्ट्र का संयुक्त रूप से लगभग 43 प्रतिशत का योगदान है।

SBI Report : नए CPI सीरीज में क्या बदला?

हाल ही में सरकार ने सीपीआई की गणना के लिए आधार वर्ष 2012 से बदलकर 2024 कर दिया है। मुख्य बदलाव निम्नलिखित हैं:

  • नई मदें: डिजिटल सेवाएं, ओटीटी प्लेटफॉर्म, सीएनजी/पीएनजी जैसी मदें शामिल की गई हैं।

  • उपभोग पैटर्न: वस्तुओं और सेवाओं की संख्या बढ़ाई गई है ताकि बदलते उपभोग पैटर्न को बेहतर तरीके से पकड़ा जा सके।

  • बाजारों का चयन: एसबीआई रिसर्च का मुख्य सवाल यह है कि डेटा संग्रह के लिए चुने गए बाजारों का भौगोलिक वितरण उचित नहीं है। इंडेक्स में यूपी और महाराष्ट्र के बाजारों को असमान्य रूप से अधिक प्रतिनिधित्व दिया गया है।

SBI Report : भौगोलिक असंतुलन के निहितार्थ

भौगोलिक असंतुलन की यह समस्या कई गंभीर परिणाम उत्पन्न कर सकती है:

  1. राष्ट्रीय दर पर प्रभाव: यदि यूपी और महाराष्ट्र में कीमतें तेजी से बढ़ती हैं तो राष्ट्रीय महंगाई दर अधिक दिखाई देगी, भले ही देश के अन्य हिस्सों में कीमतें स्थिर हों।

  2. आरबीआई की मौद्रिक नीति: आरबीआई मौद्रिक नीति तय करने के लिए सीपीआई डेटा का उपयोग करता है। डेटा असंतुलित होने पर ब्याज दर के निर्णय गलत हो सकते हैं।

  3. वेतन और भत्ता: सरकारी कर्मचारियों का महंगाई भत्ता (DA) इसी पर आधारित होता है। गलत सूचकांक से कर्मचारियों को वास्तविक महंगाई से कम या अधिक मुआवजा मिल सकता है।

  4. सामाजिक योजनाएं: गरीबी रेखा और सब्सिडी योजनाओं के लक्ष्य निर्धारण में भी ये आंकड़े महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

SBI Report : उपभोक्ता टोकरी और राज्यवार प्रतिनिधित्व

  • विविधता: भारत एक विविधतापूर्ण देश है। दक्षिण में चावल और उत्तर में गेहूं मुख्य भोजन है। यदि किसी क्षेत्र का कम प्रतिनिधित्व है, तो वहां की विशिष्ट महंगाई राष्ट्रीय आंकड़ों में नहीं दिखेगी।

  • स्थानीय लागत: तटीय राज्यों में समुद्री उत्पादों की कीमतें और पहाड़ी राज्यों में परिवहन की लागत अधिक होती है। इन विविधताओं को पकड़ने के लिए संतुलित भौगोलिक प्रतिनिधित्व आवश्यक है।

SBI Report : विशेषज्ञों की राय और आगे की राह

कई स्वतंत्र अर्थशास्त्रियों ने भी एसबीआई रिसर्च की चिंताओं को गंभीर माना है:

  • सांख्यिकीय दोष: केवल दो राज्यों का इतना अधिक भार होना एक संरचनात्मक दोष का संकेत हो सकता है।

  • पारदर्शिता: विशेषज्ञों का सुझाव है कि सरकार को नई सीपीआई सीरीज की पद्धति और बाजार चयन के तर्क को सार्वजनिक करना चाहिए।

  • सटीक माप: महंगाई के सटीक माप पर पूरी अर्थव्यवस्था की नीतियां निर्भर करती हैं, इसलिए इसमें कोई समझौता नहीं होना चाहिए।

निष्कर्ष

एसबीआई रिसर्च की यह रिपोर्ट एक महत्वपूर्ण चेतावनी है जिस पर गंभीरता से ध्यान देने की आवश्यकता है। नई सीपीआई सीरीज की पद्धति और बाजार चयन के तर्क को सार्वजनिक डोमेन में रखा जाना चाहिए ताकि पारदर्शिता बनी रहे।

read more here

पाकिस्तान मैच से पहले अभिषेक शर्मा पर संकट: 2 किलो घटा वजन, खेलने पर सस्पेंस बरकरार

महाशिवरात्रि पर शिववास: क्या होता है शिववास और भोलेनाथ की पूजा में क्यों जरूरी है इसे जानना

Samsung Galaxy S25 Ultra में बंपर डिस्काउंट: ₹21,000 सस्ता, अब ₹1.04 लाख में मिल रहा प्रीमियम फोन, फ्लिपकार्ट वैलेंटाइन डे सेल में शानदार ऑफर, 200MP कैमरा और Snapdragon 8 Elite प्रोसेसर वाला फ्लैगशिप फोन

बेंगलुरु में भीषण सड़क हादसा: हाईवे पर कई वाहनों की टक्कर में 7 लोगों की मौत, होसकोटे-दबासपेटे नेशनल हाईवे पर तेज रफ्तार ने छीनी सात जिंदगियां, पुलिस ने ओवरस्पीडिंग को बताया हादसे का कारण

आपको यह भी पसंद आ सकता है
Leave A Reply

Your email address will not be published.