सऊदी ने पाकिस्तान को दिया बड़ा इशारा! फील्ड मार्शल आसिम मुनीर रियाद पहुंचे, प्रिंस खालिद बिन सलमान से हुई मुलाकात, ईरान हमलों के बीच क्या पाकिस्तान जंग में उतरेगा? खाड़ी में तनाव चरम पर

पाक आर्मी चीफ आसिम मुनीर ने सऊदी रक्षा मंत्री से की मुलाकात, ईरान हमलों पर चर्चा, पाकिस्तान पर दबाव बढ़ा

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Saudi Pakistan meeting: मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच एक ऐसी मुलाकात हुई है जिसने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। पाकिस्तान के आर्मी चीफ फील्ड मार्शल आसिम मुनीर रियाद पहुंचे और सऊदी अरब के रक्षा मंत्री प्रिंस खालिद बिन सलमान के साथ एक अहम बैठक में शामिल हुए। इस मुलाकात में ईरान की ओर से सऊदी अरब पर हो रहे हमलों और उन्हें रोकने के उपायों पर विस्तार से चर्चा की गई। यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब ईरान और सऊदी अरब के बीच तनाव अपने चरम पर है और पाकिस्तान पर अब यह दबाव बढ़ता जा रहा है कि वह अपने पुराने सहयोगी सऊदी अरब के साथ खड़ा हो।

Saudi Pakistan meeting: रियाद में क्या बात हुई

सऊदी रक्षा मंत्री प्रिंस खालिद बिन सलमान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस मुलाकात की जानकारी साझा की। उन्होंने लिखा कि इस बैठक में ईरान के हमलों और उन्हें रोकने के उपायों पर संयुक्त सामरिक रक्षा समझौते के दायरे में चर्चा हुई। प्रिंस खालिद ने यह भी कहा कि ईरान की यह कार्रवाइयां पूरे क्षेत्र की सुरक्षा और स्थिरता को नुकसान पहुंचा रही हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि ईरानी पक्ष आगे समझदारी दिखाएगा। इस बातचीत का सबसे अहम पहलू यह है कि इसे दोनों देशों के बीच पहले से मौजूद संयुक्त सामरिक रक्षा समझौते के संदर्भ में देखा जा रहा है। यह समझौता सुरक्षा सहयोग की एक मजबूत कड़ी है।

Saudi Pakistan meeting: क्या पाकिस्तान पर बन रहा है दबाव

रक्षा और कूटनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सऊदी अरब अब इस जंग में अकेले नहीं लड़ना चाहता। ईरान के लगातार हमलों ने रियाद को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि उसे अपने पुराने सहयोगियों को सक्रिय रूप से मैदान में लाना होगा। पाकिस्तान ऐसे देशों में सबसे ऊपर है जिस पर सऊदी अरब सबसे ज्यादा भरोसा करता है। वजह साफ है। पाकिस्तान की आर्थिक हालत इस समय बेहद नाजुक है। सऊदी अरब पाकिस्तान को आर्थिक सहायता, सस्ती तेल आपूर्ति और निवेश के जरिए लगातार मदद करता आया है। ऐसे में पाकिस्तान के लिए सऊदी के अनुरोध को नकारना आसान नहीं होगा।

Saudi Pakistan meeting: सऊदी अरब पर ईरान के ताबड़तोड़ हमले

यह मुलाकात ऐसे दौर में हो रही है जब ईरान सऊदी अरब पर लगातार हमले कर रहा है। सऊदी रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता मेजर जनरल तुर्की अल-मालिकी ने बताया कि सऊदी वायु रक्षा प्रणाली ने शायबह तेल क्षेत्र की ओर बढ़ रहे 16 ड्रोन को चार अलग-अलग हमलों में मार गिराया। ये ड्रोन रूब अल-खाली के रास्ते आए थे। इसके अलावा प्रिंस सुल्तान एयर बेस अल-खरज पर एक बैलिस्टिक मिसाइल और एक क्रूज मिसाइल को भी नष्ट किया गया। अल-खरज रियाद से करीब 80 किलोमीटर दूर एक बड़ा औद्योगिक और सैन्य केंद्र है। इस इलाके पर पिछले कुछ दिनों में लगातार हमले हो रहे हैं।

Saudi Pakistan meeting: शायबह पर 28 फरवरी के बाद पहला बड़ा हमला

शायबह तेल क्षेत्र पर यह हमला 28 फरवरी के बाद का सबसे बड़ा प्रयास था। यह तेल क्षेत्र सऊदी अरब के लिए बेहद रणनीतिक महत्व का है क्योंकि यहाँ से प्राकृतिक गैस लिक्विड का उत्पादन होता है। इस पर हमले का मतलब सऊदी अर्थव्यवस्था की रीढ़ पर चोट करना है। यही वजह है कि सऊदी अरब इन हमलों को लेकर बेहद गंभीर है और पाकिस्तान जैसे विश्वस्त सहयोगियों से मदद लेने की दिशा में तेजी से कदम उठा रहा है। शुक्रवार को भी यहाँ 5 मिसाइलें और कई ड्रोन नष्ट किए गए थे।

Saudi Pakistan meeting: UAE भी है निशाने पर

सऊदी अरब अकेला नहीं है जो ईरान से जुड़े हमलों का सामना कर रहा है। संयुक्त अरब अमीरात यानी UAE ने भी पिछले 24 घंटों में 125 से अधिक ड्रोन और 6 बैलिस्टिक मिसाइलों को नाकाम किया है। इससे साफ है कि ईरान की रणनीति पूरे खाड़ी क्षेत्र को अस्थिर करने की है। इन हमलों की पृष्ठभूमि में अमेरिका और इजराइल की ओर से ईरान पर किए गए हवाई हमले हैं। ईरान इन हमलों का बदला अपने प्रभाव वाले ठिकानों और प्रॉक्सी ताकतों के जरिए खाड़ी देशों पर निकाल रहा है। अरब लीग और इस्लामिक सहयोग संगठन दोनों ने इन हमलों की सख्त निंदा की है।

Saudi Pakistan meeting: पाकिस्तान के सामने बड़ी दुविधा

आसिम मुनीर और प्रिंस खालिद की इस मुलाकात के बाद अब यह सवाल पूरी दुनिया में उठ रहा है कि पाकिस्तान आगे क्या करेगा। एक तरफ सऊदी अरब का आर्थिक दबाव और रक्षा समझौते की बाध्यता है, तो दूसरी तरफ ईरान से सीमा साझा करने वाले पाकिस्तान के लिए यह जंग बेहद संवेदनशील मसला है। पाकिस्तान अगर सऊदी की मदद के लिए आगे आता है तो उसे ईरान की नाराजगी झेलनी होगी। और अगर वह पीछे हटता है तो सऊदी की आर्थिक मदद पर असर पड़ सकता है। यह दुविधा पाकिस्तान की विदेश नीति की सबसे बड़ी परीक्षा बनती जा रही है।

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