Satuan Parv 2026: कब है सतुआन? 14 अप्रैल को सत्तू और आम के टिकोरे से होगा गर्मी का स्वागत; जानें शुभ मुहूर्त, पूजा नियम और दान का फल
14 अप्रैल को सतुआ संक्रांति, जानें पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और सत्तू-दान का महत्व, गर्मी की शुरुआत का पर्व
Satuan Parv 2026: सतुआन पर्व, जिसे सतुआनी या सतुआ संक्रांति के नाम से भी जाना जाता है, मुख्य रूप से बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में बड़े उत्साह से मनाया जाता है। यह पर्व मेष संक्रांति के दिन मनाया जाता है और गर्मी के मौसम की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। इस दिन सत्तू, कच्चे आम और गुड़ का सेवन किया जाता है, जो शरीर को ठंडक प्रदान करता है और गर्मी से बचाव में मदद करता है।
सतुआन पर्व 2026 में 14 अप्रैल मंगलवार को मनाया जाएगा। इस दिन पुण्य काल सुबह 5:57 बजे से दोपहर 1:55 बजे तक रहेगा। मेष संक्रांति का शुभ मुहूर्त सुबह 9:39 बजे है। इस पर्व के साथ खरमास का समापन भी होता है, जिसके बाद शुभ और मांगलिक कार्य फिर से शुरू हो जाते हैं।
गर्मी का प्राकृतिक उपचार: सतुआन पर्व का आध्यात्मिक और वैज्ञानिक महत्व
सतुआन पर्व गर्मी के मौसम की तैयारी का त्योहार है। इस दिन लोग सत्तू का सेवन करते हैं क्योंकि सत्तू ठंडी तासीर वाला होता है और शरीर को गर्मी से राहत देता है। सत्तू बनाने के लिए चने को भूनकर पीसा जाता है, जिसे गुड़ या नमक के साथ मिलाकर खाया जाता है।
इस पर्व के साथ कई लोक मान्यताएं जुड़ी हैं। लोग मानते हैं कि इस दिन सत्तू और कच्चे आम का सेवन करने से पूरे गर्मी के मौसम में स्वास्थ्य अच्छा रहता है। साथ ही इस दिन दान करने से खूब पुण्य प्राप्त होता है।
पूजा की सरल विधि: सूर्य देव को अर्घ्य और जल छिड़काव की परंपरा
सतुआन पर्व के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करना चाहिए। स्नान के बाद सूर्य देव को अर्घ्य दिया जाता है। एक दिन पहले मिट्टी के घड़े में जल भरकर रखा जाता है। अगले दिन घर का कोई सदस्य स्नान के बाद इस जल को पूरे घर में छिड़कता है, जिससे घर की शुद्धि होती है।
इस दिन बासी भोजन करने की भी परंपरा है। मुख्य रूप से सत्तू, कच्चे आम का टिकोरा और गुड़ का सेवन किया जाता है। पूजा में सत्तू को देवता को चढ़ाया जाता है और फिर परिवार के सदस्य इसे प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं।
दान का पुण्य काल: मिट्टी का घड़ा और पंखा दान करने से मिलेगा लाभ
इस दिन दान का विशेष महत्व है। मिट्टी का नया घड़ा लेकर उसमें जल भरें। घड़े पर कलावा बांधें और उसकी पूजा करें। पूजा के बाद इस घड़े को दान कर दें। ऐसा करने से खूब पुण्य प्राप्त होता है।
इसके अलावा सत्तू, गुड़, हाथ वाला पंखा, चप्पल और छाता दान करना भी बेहद शुभ माना गया है। इन वस्तुओं का दान करने से गर्मी के मौसम में जरूरतमंद लोगों की मदद होती है और दानकर्ता को पुण्य मिलता है।
लोक आस्था और मान्यताएं: खरमास की विदाई और शुभ कार्यों की शुरुआत
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इस पर्व से गर्मी की शुरुआत मानी जाती है, इसलिए ठंडी तासीर वाली चीजों का सेवन शुरू किया जाता है।
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सत्तू खाने से शरीर ठंडा रहता है और गर्मी से होने वाली बीमारियों से बचाव होता है।
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इस दिन दान करने से पूर्वजों की आत्मा को शांति मिलती है।
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खरमास समाप्त होने के बाद शुभ कार्य शुरू किए जा सकते हैं।
उत्सव का आनंद: सतुआनी मनाने के पारंपरिक तरीके
सतुआन पर्व को परिवार के साथ मिलकर मनाना चाहिए। सुबह स्नान और पूजा के बाद सत्तू का प्रसाद तैयार करें। परिवार के सभी सदस्य मिलकर इसे ग्रहण करें। दान की सामग्री तैयार करके जरूरतमंदों को दें।
इस दिन बासी भोजन करने की परंपरा भी है, जो गर्मी में पेट को आराम देती है। शाम को परिवार के साथ बैठकर सत्तू और आम का आनंद लें।
संस्कृति की झलक: फसल चक्र और ग्रामीण भारत का जुड़ाव
यह पर्व मुख्य रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में लोकप्रिय है। यह फसल चक्र और मौसम परिवर्तन से जुड़ा त्योहार है। सत्तू एक सस्ता और पौष्टिक भोजन है, जो गर्मी में शरीर को ठंडक और ऊर्जा दोनों देता है। इस पर्व के माध्यम से लोग प्रकृति के साथ तालमेल बिठाते हैं और गर्मी के मौसम की तैयारी करते हैं।
Satuan Parv 2026: स्वास्थ्य और आस्था का संगम
सतुआन पर्व 2026 में 14 अप्रैल को मनाया जाएगा। यह त्योहार गर्मी की शुरुआत का संकेत है और सत्तू, आम और गुड़ जैसे ठंडे पदार्थों का सेवन शुरू करने का मौका देता है। पूजा, दान और सत्तू भोजन के साथ यह पर्व परिवार को एकजुट करता है और स्वास्थ्य का ध्यान रखने की याद दिलाता है।
इस दिन सूर्य देव को अर्घ्य दें, घर में जल छिड़कें और दान करें। सतुआन पर्व को सादगी और श्रद्धा के साथ मनाएं।
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