संभल हिंसा मामले में ASP अनुज चौधरी को बड़ी राहत, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 22 पुलिसकर्मियों के खिलाफ FIR के आदेश पर लगाई रोक
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 22 पुलिसकर्मियों के खिलाफ FIR आदेश पर लगाई रोक, 14 दिन में जवाब दाखिल का निर्देश
ASP Anuj Chaudhary: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने संभल में नवंबर 2024 में हुई हिंसा के सिलसिले में पूर्व क्षेत्राधिकारी (अब ASP) अनुज चौधरी समेत कुल 22 पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट (CJM) संभल के आदेश पर रोक लगा दी है। यह अंतरिम राहत न्यायमूर्ति समित गोपाल की एकल पीठ ने दी। कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं (अनुज चौधरी और पूर्व थानेदार अनुज तोमर) को 14 दिन के अंदर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। साथ ही शिकायतकर्ता यामीन को भी 14 दिन के अंदर अपना जव दाखिल करने का समय दिया गया है।
ASP Anuj Chaudhary: CJM संभल के आदेश पर क्यों लगी रोक?
नवंबर 2024 में संभल जिले में हुई हिंसा के दौरान पुलिस फायरिंग में यामीन के बेटे आलम की मौत हो गई थी। इस घटना के बाद यामीन ने सीजेएम संभल के समक्ष शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि पुलिस ने अनावश्यक बल प्रयोग किया और आलम की मौत के लिए जिम्मेदार है। सीजेएम ने शिकायत पर संज्ञान लेते हुए अनुज चौधरी (तत्कालीन सीओ संभल) समेत 22 पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया था।
इस आदेश को चुनौती देते हुए अनुज चौधरी और अनुज तोमर ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर की। याचिका में कहा गया कि सीजेएम ने बीएनएसएस (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता) की धारा 175 का पालन नहीं किया। इस धारा के तहत किसी लोक सेवक के खिलाफ जांच शुरू करने से पहले दो चरणों का पालन अनिवार्य है:
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पहले वरिष्ठ पुलिस अधिकारी से रिपोर्ट मंगवानी होती है।
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घटना की परिस्थितियों और लोक सेवक के पक्ष/बयानों पर विचार करना होता है।
याचिकाकर्ताओं का कहना था कि सीजेएम ने पुलिस की रिपोर्ट को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया और बिना उचित प्रक्रिया के FIR का आदेश दे दिया।
ASP Anuj Chaudhary: राज्य सरकार का हाईकोर्ट में तर्क
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि यामीन के बेटे आलम को जो गोली लगी थी, वह पुलिस की फायरिंग से नहीं लगी। सरकार ने दावा किया कि पुलिस ने नियंत्रण में रहते हुए बल प्रयोग किया था और घटना की जांच रिपोर्ट में यह साफ दर्ज है। सरकार ने यह भी तर्क दिया कि सीजेएम ने धारा 175 की अनदेखी की है। इस धारा के तहत लोक सेवक के खिलाफ जांच शुरू करने से पहले दो चरणों का पालन जरूरी है, जिसका सीजेएम ने पालन नहीं किया।
ASP Anuj Chaudhary: हाईकोर्ट का फैसला और अंतरिम राहत
न्यायमूर्ति समित गोपाल की एकल पीठ ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद याचिका पर 14 दिन की अंतरिम राहत दे दी। कोर्ट ने स्पष्ट आदेश दिया कि सीजेएम संभल के उस आदेश पर रोक रहेगी जिसमें 22 पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया गया था। साथ ही शिकायतकर्ता यामीन को भी याचिका पर जवाब दाखिल करने के लिए 14 दिन का समय दिया गया है।
कोर्ट ने कहा कि मामले की गहराई से जांच की जरूरत है। दोनों पक्षों की दलीलों और दस्तावेजों को देखने के बाद ही अंतिम फैसला लिया जाएगा। फिलहाल एफआईआर दर्ज नहीं होगी।
ASP Anuj Chaudhary: संभल हिंसा की पृष्ठभूमि
नवंबर 2024 में संभल जिले में एक धार्मिक आयोजन के दौरान तनाव बढ़ गया था। भीड़ ने पुलिस पर पथराव किया था। स्थिति बिगड़ने पर पुलिस को हवाई फायरिंग करनी पड़ी थी। इसी फायरिंग में यामीन के बेटे आलम की मौत हो गई थी। इसके बाद परिवार ने पुलिस पर अनावश्यक बल प्रयोग का आरोप लगाते हुए शिकायत की थी। इस घटना के बाद संभल में कई दिनों तक तनाव बना रहा।
ASP Anuj Chaudhary: पुलिसकर्मियों पर क्या आरोप थे?
शिकायत में कहा गया था कि पुलिस ने बिना उकसावे के फायरिंग की। आलम की मौत के लिए पुलिस जिम्मेदार है। शिकायतकर्ता ने मांग की थी कि सभी शामिल पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज हो। सीजेएम ने शिकायत पर संज्ञान लेते हुए 22 पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया था। अब हाईकोर्ट ने इस आदेश पर रोक लगा दी है।
ASP Anuj Chaudhary: क्या होगा आगे?
अब मामले की सुनवाई 14 दिन बाद होगी। यामीन को अपना जवाब दाखिल करना होगा। हाईकोर्ट दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अंतिम फैसला लेगा। फिलहाल 22 पुलिसकर्मियों के खिलाफ कोई एफआईआर दर्ज नहीं होगी। यह फैसला पुलिसकर्मियों के लिए बड़ी राहत है। संभल हिंसा मामले में अब कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। राज्य सरकार और विपक्ष दोनों ही इस मामले को अपनी राजनीतिक रणनीति का हिस्सा बना सकते हैं।
मणिपुर में हाल ही में हुई हिंसा के बाद यह मामला कानून-व्यवस्था पर सवाल उठा रहा है। हाईकोर्ट का फैसला दोनों पक्षों के लिए महत्वपूर्ण होगा।
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