सोने-चांदी और प्लैटिनम के सभी आभूषणों के आयात पर सरकार ने लगाया सख्त बैन: FTA दुरुपयोग रोकने के लिए बड़ा कदम, DGFT से लाइसेंस अनिवार्य
भारत सरकार ने सोना, चांदी और प्लैटिनम के सभी आभूषणों के आयात पर प्रतिबंध लगा दिया, FTA दुरुपयोग रोकने के लिए DGFT से लाइसेंस अनिवार्य
DGFT New Rule: यह फैसला फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) के दुरुपयोग को पूरी तरह रोकने और देश के स्वदेशी रत्न एवं आभूषण उद्योग को मजबूत बनाने के उद्देश्य से लिया गया है। 1 अप्रैल को पहले सोने, चांदी और प्लैटिनम के आभूषणों पर प्रतिबंध लगाया गया था, अब इसे और व्यापक बनाते हुए चैप्टर 71 के तहत आने वाले सभी उत्पादों पर लागू कर दिया गया है।
DGFT New Rule: DGFT ने क्यों बदली नीति? पूरी डिटेल और तत्काल प्रभाव
DGFT की अधिसूचना संख्या 02/2026-27 के अनुसार, कस्टम्स टैरिफ हेडिंग (CTH) 7113 के तहत आने वाले सोना, चांदी और प्लैटिनम के आभूषणों तथा इनसे संबंधित सभी आर्टिकल्स की आयात नीति को ‘Free’ से बदलकर ‘Restricted’ कर दिया गया है। इसमें प्राकृतिक या कल्चर्ड मोती, कीमती और अर्ध-कीमती पत्थर, नकली आभूषण और सिक्के आदि शामिल हैं। यह प्रतिबंध किसी भी पूर्व अनुबंध, अपरिवर्तनीय लेटर ऑफ क्रेडिट, अग्रिम भुगतान या शिपमेंट की स्थिति में भी लागू होगा। ट्रांजिशनल व्यवस्था का कोई लाभ नहीं मिलेगा।
FTA दुरुपयोग की समस्या: थाईलैंड जैसे देशों से हो रहा था सस्ता आयात
उद्योग विशेषज्ञों के अनुसार, कुछ आयातक भारत-आसियान FTA (2010 से लागू) का गलत इस्तेमाल कर रहे थे। वे थाईलैंड या अन्य देशों से बिना जड़े आभूषण के नाम पर सोना, चांदी और प्लैटिनम आयात कर शुल्क में अंतर का फायदा उठाते थे। आयातक तैयार आभूषण को ‘raw material’ या ‘parts’ दिखाकर सस्ते में ला रहे थे, जिससे घरेलू निर्माताओं को मुकाबला करने में दिक्कत हो रही थी। सरकार ने पहले भी कुछ श्रेणियों पर अस्थायी रोक लगाई थी, लेकिन अब पूर्ण रूप से सभी श्रेणियों पर सख्ती कर दी गई है।
DGFT New Rule: स्वदेशी ज्वेलरी उद्योग को कितना फायदा? निर्यात और रोजगार पर असर
भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सोने का उपभोक्ता देश है और यह सेक्टर करोड़ों लोगों को रोजगार देता है। सरकार का मानना है कि FTA दुरुपयोग से स्वदेशी उद्योग को नुकसान पहुंच रहा था। नए प्रतिबंध से घरेलू उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा, स्वदेशी ब्रांड्स मजबूत होंगे और राजस्व में बढ़ोतरी हो सकती है। इसके अलावा, हॉलमार्किंग और क्वालिटी स्टैंडर्ड बेहतर होंगे। हालांकि, कुछ आयातकों ने लाइसेंसिंग प्रक्रिया को आसान बनाने की मांग की है ताकि ईमानदार व्यापारियों को परेशानी न हो।
DGFT New Rule: कौन-कौन से आयात प्रभावित नहीं होंगे? एक्सेम्प्शन की डिटेल
सरकार ने कुछ क्षेत्रों को इस प्रतिबंध से बाहर रखा है ताकि निर्यात प्रक्रिया बाधित न हो:
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100 प्रतिशत एक्सपोर्ट ओरिएंटेड यूनिट्स (EOUs)
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स्पेशल इकोनॉमिक जोन्स (SEZs) में स्थित यूनिट्स
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जेम्स एंड ज्वेलरी एक्सपोर्ट स्कीम्स के तहत होने वाला आयात
इन इकाइयों को अभी भी बिना प्रतिबंध के आयात की छूट रहेगी, क्योंकि उनका मुख्य फोकस विदेशी बाजारों में निर्यात करना है।
DGFT New Rule: सोने-चांदी की कीमतों पर क्या असर पड़ेगा?
आयात पर सख्ती से घरेलू बाजार में सप्लाई प्रभावित हो सकती है, जिससे कीमतों में हल्की बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि यह प्रभाव सीमित रहेगा क्योंकि भारत में सोने का बड़ा हिस्सा निवेश और शादी-ब्याह के लिए इस्तेमाल होता है। घरेलू उत्पादन बढ़ने से लंबे समय में कीमतें स्थिर रह सकती हैं। ज्वेलर्स एसोसिएशन ने इस फैसले का स्वागत किया है लेकिन साथ ही कहा है कि लाइसेंसिंग प्रक्रिया को तेज और पारदर्शी बनाया जाए।
DGFT New Rule: ज्वेलरी व्यापारियों और उपभोक्ताओं के लिए सलाह
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आयातक: तुरंत DGFT से संपर्क करें और जरूरी लाइसेंस के लिए आवेदन करें। पुराने ऑर्डर भी अब प्रतिबंधित हैं।
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ज्वेलर्स: स्वदेशी कारीगरों और सप्लायर्स पर फोकस बढ़ाएं। क्वालिटी और हॉलमार्किंग को प्राथमिकता दें।
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उपभोक्ता: शादी-ब्याह या निवेश के लिए खरीदारी करते समय लोकल ब्रांड्स और BIS हॉलमार्क वाले आभूषण चुनें। कीमतों में थोड़ा बदलाव हो सकता है, इसलिए प्लानिंग पहले करें।
निष्कर्ष: आत्मनिर्भर भारत की ओर एक कदम
सरकार का यह कदम ‘आत्मनिर्भर भारत’ की दिशा में एक और मजबूत पहल है। इससे न सिर्फ FTA दुरुपयोग रुकेगा बल्कि देश का ज्वेलरी सेक्टर और प्रतिस्पर्धी बनेगा। सरकार का फोकस स्पष्ट है – ईमानदार व्यापार को बढ़ावा और गलत प्रथाओं पर सख्ती। यह कदम न सिर्फ अर्थव्यवस्था को मजबूत करेगा बल्कि छोटे ज्वेलर्स और कारीगरों को भी नई ऊर्जा देगा।
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