होर्मुज स्ट्रेट से भारतीय जहाजों को मिली राहत! जयशंकर की कूटनीति से ईरान ने दी दो LPG जहाजों को गुजरने की अनुमति, 92 हजार टन गैस लेकर मुंद्रा और कांडला पहुंचेंगे; अभी भी 22 जहाज फंसे
जयशंकर की कूटनीति से ईरान ने दी 2 LPG जहाजों को गुजरने की अनुमति
S Jaishankar diplomacy: मध्य पूर्व में चल रहे संघर्ष के बीच भारत ने एक बड़ी कूटनीतिक सफलता हासिल की है। ईरान ने भारत के दो जहाजों को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने की अनुमति दे दी है। इन जहाजों में करीब 92,712 टन एलपीजी भरी हुई है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने ब्रुसेल्स में खुलासा किया कि यह सफलता ईरान के साथ लगातार और सीधी कूटनीतिक बातचीत का नतीजा है।
S Jaishankar diplomacy: ईरान की नाकेबंदी के बीच भारत को कैसे मिली बड़ी राहत
मध्य पूर्व में जंग छिड़ने के बाद ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से तेल और गैस की आवाजाही पर सख्त पाबंदी लगा दी थी। उसने स्पष्ट कर दिया था कि इस जलमार्ग से तेल की एक बूंद भी नहीं गुजरने दी जाएगी। इस फैसले के बाद भारत के 24 जहाज होर्मुज के पश्चिमी हिस्से में फंस गए थे। लेकिन अब इनमें से दो जहाजों को स्वदेश लौटने की अनुमति मिल गई है, जो पूरी दुनिया के लिए हैरानी का विषय बन गया है।
S Jaishankar diplomacy: कौन से जहाज लौट रहे हैं और उनमें क्या है
पहला जहाज शिवालिक आज दोपहर एक से दो बजे के बीच गुजरात के मुंद्रा बंदरगाह पहुंचने वाला है। दूसरा जहाज नंदा देवी 17 मार्च को गुजरात के ही कांडला बंदरगाह पर लंगर डालेगा। दोनों जहाजों में मिलाकर करीब 92,712 टन एलपीजी लदी हुई है। यह गैस भारत की घरेलू जरूरतों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है, खासतौर पर ऐसे समय में जब अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति श्रृंखला बाधित हो रही हो।
S Jaishankar diplomacy: जयशंकर ने ब्रुसेल्स में क्या कहा
विदेश मंत्री एस जयशंकर इस समय ब्रुसेल्स में यूरोपीय संघ के विदेश मंत्रियों की एक अहम बैठक में भाग ले रहे हैं। वहां उन्होंने एक अंतरराष्ट्रीय आर्थिक समाचार पत्र को दिए साक्षात्कार में साफ कहा, “फिलहाल मैं उनसे बात करने में लगा हूं और मेरी बातचीत के कुछ नतीजे निकले हैं।” उन्होंने आगे कहा, “अगर इस बातचीत से मेरे लिए परिणाम सामने आ रहे हैं, तो मैं इस पर ध्यान देना जारी रखूंगा। निश्चित रूप से, भारत के दृष्टिकोण से, यह बेहतर है कि हम तर्क करें और समन्वय करें और हमें समाधान मिल जाए।”
S Jaishankar diplomacy: क्या भारत ने ईरान को कुछ दिया बदले में
यह सवाल स्वाभाविक रूप से उठता है कि क्या भारत ने इस अनुमति के बदले ईरान को कोई रियायत दी है। जयशंकर ने इस बात को स्पष्ट रूप से नकारा है। उन्होंने कहा, “यह एक्सचेंज का मुद्दा नहीं है। भारत और ईरान के बीच एक रिश्ता है। और यह एक ऐसा संघर्ष है जिसे हम बहुत दुर्भाग्यपूर्ण मानते हैं।” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारतीय ध्वज वाले जहाजों के लिए ईरान के साथ कोई सामूहिक व्यवस्था नहीं की गई है और हर जहाज की आवाजाही एक अलग और व्यक्तिगत घटना है।
S Jaishankar diplomacy: क्या यूरोपीय देश भी अपना सकते हैं यह रास्ता
जब जयशंकर से पूछा गया कि क्या यूरोपीय देश भी भारत के इस कूटनीतिक मॉडल को अपना सकते हैं, तो उन्होंने सधा हुआ जवाब दिया। उनके शब्द थे, “बिल्कुल, हर रिश्ता अपनी खूबियों पर खड़ा होता है। मेरे लिए इसकी तुलना किसी अन्य रिश्ते से करना बहुत कठिन है। हम जो कर रहे हैं उसे साझा करने में मुझे खुशी होगी। मैं जानता हूं कि कई लोगों ने तेहरान के साथ भी बातचीत की है।” इससे यह संकेत मिलता है कि भारत का कूटनीतिक तरीका अन्य देशों के लिए भी एक मार्गदर्शक बन सकता है।
S Jaishankar diplomacy: होर्मुज स्ट्रेट का महत्व और भारत पर असर
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया का सबसे व्यस्त और सबसे संवेदनशील जलमार्ग माना जाता है। दुनिया का करीब 20 प्रतिशत तेल और एक बड़ा हिस्सा एलपीजी इसी रास्ते से गुजरता है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से पूरा करता है। ऐसे में होर्मुज का बंद होना भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन सकता था। कूटनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, भारत ने इस संकट को समय रहते पहचाना और सही दिशा में कदम उठाए।
S Jaishankar diplomacy: ईरान का रुख और बातचीत की गुंजाइश
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरगची ने भी हाल ही में एक बयान में कहा है कि ईरान उन देशों से बातचीत के लिए तैयार है जो अपने जहाजों के सुरक्षित मार्ग पर चर्चा करना चाहते हैं। यह बयान महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे यह संकेत मिलता है कि ईरान कूटनीतिक रास्ते को पूरी तरह बंद नहीं करना चाहता। भारत इसी खिड़की का उपयोग करते हुए अपने बाकी जहाजों को भी सुरक्षित निकालने की कोशिश में जुटा हुआ है।
S Jaishankar diplomacy: अभी भी 22 जहाज फंसे हैं
जयशंकर ने यह भी स्वीकार किया कि दो जहाजों का लौटना राहत की बात जरूर है, लेकिन काम अभी पूरा नहीं हुआ है। उन्होंने कहा, “अभी शुरुआत है, हमारे पास वहां कई और जहाज हैं। हालांकि, यह एक स्वागत योग्य डेवलपमेंट है, लेकिन बातचीत जारी है।” फारस की खाड़ी में अभी भी 22 भारतीय जहाज फंसे हुए हैं। इनमें से कई में कच्चा तेल, एलपीजी और अन्य जरूरी सामान लदा हुआ है। भारत सरकार इन सभी जहाजों की सुरक्षित वापसी के लिए राजनयिक प्रयास जारी रखे हुए है।
निष्कर्ष
भारत की यह कूटनीतिक सफलता सिर्फ दो जहाजों की वापसी तक सीमित नहीं है। यह इस बात का प्रमाण है कि भारत ने वैश्विक संघर्षों में तटस्थ लेकिन सक्रिय भूमिका निभाते हुए अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा करना सीख लिया है। विदेश मंत्री जयशंकर की सीधी और लगातार कूटनीति ने ईरान जैसे संवेदनशील देश से रास्ता निकालने में सफलता दिलाई है। अब पूरी दुनिया की नजरें इस बात पर हैं कि भारत बाकी 22 जहाजों को कब और कैसे सुरक्षित वापस लाता है। यह बातचीत जारी है और भारत के इरादे भी पूरी तरह स्पष्ट हैं।
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