आरबीआई ने रेपो रेट में नहीं किया बदलाव, लोन की ब्याज दरें रहेंगी स्थिर, मजबूत बनी रहेगी अर्थव्यवस्था, जानें पूरा फैसला

आरबीआई MPC ने रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया, तटस्थ रुख बरकरार; जीडीपी 7.4% अनुमान, महंगाई नियंत्रित, अर्थव्यवस्था मजबूत

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RBI Repo Rate: भारतीय रिजर्व बैंक ने शुक्रवार को मौद्रिक नीति समिति की बैठक के बाद अहम फैसला सुनाया है। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर स्थिर रखने की घोषणा की है। इसका मतलब है कि रेपो रेट में कोई कटौती या बढ़ोतरी नहीं की गई है। आरबीआई के इस निर्णय से लोन लेने वाले ग्राहकों को कोई राहत नहीं मिलेगी क्योंकि होम लोन, कार लोन, पर्सनल लोन और अन्य सभी प्रकार के ऋणों की ब्याज दरें जस की तस बनी रहेंगी। हालांकि केंद्रीय बैंक ने अपना रुख तटस्थ यानी न्यूट्रल बरकरार रखा है। इसका अर्थ है कि भविष्य में आर्थिक परिस्थितियों के अनुसार आरबीआई ब्याज दरों में कटौती या वृद्धि करने के लिए तैयार है। गवर्नर संजय मल्होत्रा ने भारत की अर्थव्यवस्था को मजबूत बताया और कहा कि अमेरिका के साथ हुई व्यापार समझौते से देश के निर्यात को जबरदस्त बढ़ावा मिलेगा। आरबीआई ने देश की जीडीपी वृद्धि दर 7.4 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है।

लोन की ब्याज दरों पर क्या होगा प्रभाव

रेपो रेट में कोई बदलाव न होने से सभी प्रकार के ऋणों की ब्याज दरें वर्तमान स्तर पर ही बनी रहेंगी। होम लोन लेने वाले उधारकर्ताओं को अपनी मासिक किस्त यानी ईएमआई में कोई कमी नहीं मिलेगी। वाहन ऋण, व्यक्तिगत ऋण, शिक्षा ऋण और व्यावसायिक ऋण की दरें भी अपरिवर्तित रहेंगी। बैंक अपनी ऋण नीतियों में कोई संशोधन नहीं करेंगे।

पिछले कुछ महीनों से कई अर्थशास्त्रियों और विशेषज्ञों ने रेपो रेट में कटौती की उम्मीद जताई थी ताकि आम लोगों को ऋण सस्ता मिल सके। लेकिन आरबीआई ने महंगाई को नियंत्रित रखने और वित्तीय स्थिरता बनाए रखने को प्राथमिकता दी है। रेपो रेट वह दर है जिस पर आरबीआई वाणिज्यिक बैंकों को उधार देता है। जब रेपो रेट कम होता है तो बैंक सस्ती दर पर पैसा उधार लेते हैं और ग्राहकों को भी कम ब्याज दर पर ऋण देते हैं। विपरीत स्थिति में ऋण महंगा हो जाता है।

RBI Repo Rate: एसडीएफ और एमएसएफ दरें भी अपरिवर्तित

भारतीय रिजर्व बैंक ने रेपो रेट के साथ साथ अन्य प्रमुख मौद्रिक दरों में भी कोई परिवर्तन नहीं किया है। स्टैंडिंग डिपॉजिट फैसिलिटी यानी एसडीएफ दर को 5 प्रतिशत पर यथावत रखा गया है। एसडीएफ वह दर है जिस पर बैंक अपनी अतिरिक्त तरलता को आरबीआई के पास जमा कर सकते हैं। इसी प्रकार मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी यानी एमएसएफ दर को भी 5.50 प्रतिशत पर स्थिर रखा गया है।

एमएसएफ आपातकालीन स्थितियों में बैंकों को तरलता प्रदान करने की सुविधा है। इन दरों को अपरिवर्तित रखने से वित्तीय प्रणाली में स्थिरता बनी रहेगी। बैंकिंग क्षेत्र में तरलता का प्रबंधन सुचारू रूप से होता रहेगा। आरबीआई की मौद्रिक नीति का उद्देश्य मुद्रास्फीति को नियंत्रित रखते हुए आर्थिक विकास को बढ़ावा देना है। इन दरों में संतुलन बनाए रखना इसी रणनीति का हिस्सा है।

भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूत स्थिति

आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने देश की आर्थिक स्थिति को लेकर सकारात्मक संकेत दिए हैं। उन्होंने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था और विकास दर अभी मजबूत स्थिति में है। केंद्रीय बैंक ने देश की वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 7.4 प्रतिशत रहने का अनुमान व्यक्त किया है। यह विकास दर दिखाती है कि भारतीय अर्थव्यवस्था सही दिशा में आगे बढ़ रही है। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत की विकास गाथा जारी है।

संजय मल्होत्रा ने यह भी बताया कि भारत अभी भी प्रत्यक्ष विदेशी निवेश यानी एफडीआई के लिए पसंदीदा गंतव्य बना हुआ है। विदेशी निवेशक भारत की आर्थिक क्षमता और भविष्य की संभावनाओं में भरोसा रखते हैं। उन्होंने अमेरिका के साथ हाल ही में हुई व्यापार समझौते का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे भारत के निर्यात को जबरदस्त प्रोत्साहन मिलेगा। निर्यात बढ़ने से विदेशी मुद्रा भंडार मजबूत होगा और रोजगार के अवसर पैदा होंगे।

RBI Repo Rate: महंगाई अभी भी नियंत्रित दायरे में

आरबीआई गवर्नर ने बताया कि देश में खुदरा मुद्रास्फीति यानी महंगाई दर अभी भी नियंत्रित सीमा के भीतर बनी हुई है। हालांकि वित्त वर्ष 2026 में महंगाई दर 2 प्रतिशत से थोड़ी बढ़कर 2.1 प्रतिशत हो गई है लेकिन यह चिंता का विषय नहीं है। आरबीआई का लक्ष्य महंगाई को 4 प्रतिशत के आसपास रखना है जिसमें 2 प्रतिशत ऊपर या नीचे की छूट है। वर्तमान महंगाई दर इस लक्ष्य से काफी नीचे है।

केंद्रीय बैंक ने चालू वित्त वर्ष की चौथी तिमाही के लिए मुद्रास्फीति अनुमान को 2.9 प्रतिशत से बढ़ाकर 3.2 प्रतिशत कर दिया है। आगामी वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही के लिए महंगाई का अनुमान 3.9 प्रतिशत से बढ़ाकर 4 प्रतिशत किया गया है। दूसरी तिमाही के लिए यह अनुमान 4 प्रतिशत से बढ़ाकर 4.2 प्रतिशत कर दिया गया है। ये आंकड़े बताते हैं कि आने वाले महीनों में महंगाई में मामूली बढ़ोतरी हो सकती है लेकिन यह नियंत्रण में रहेगी।

तटस्थ रुख का क्या है अर्थ

भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति ने अपने रुख को तटस्थ यानी न्यूट्रल पर बनाए रखा है। यह एक महत्वपूर्ण संकेत है। तटस्थ रुख का अर्थ है कि आरबीआई इस समय न तो ब्याज दरें बढ़ाने की सोच रहा है और न ही घटाने की। केंद्रीय बैंक आर्थिक परिस्थितियों का आकलन कर रहा है। यदि भविष्य में महंगाई तेजी से बढ़ती है तो आरबीआई रेपो रेट बढ़ा सकता है।

इसके विपरीत अगर आर्थिक विकास धीमा होता है या महंगाई काफी कम हो जाती है तो ब्याज दरों में कटौती की जा सकती है। तटस्थ रुख लचीलापन प्रदान करता है। आरबीआई परिस्थितियों के अनुसार त्वरित निर्णय ले सकता है। यह दृष्टिकोण वित्तीय बाजारों को भी संकेत देता है कि मौद्रिक नीति में नाटकीय बदलाव की उम्मीद नहीं करनी चाहिए। स्थिरता और संतुलन आरबीआई की वर्तमान रणनीति है।

RBI Repo Rate: आम लोगों के लिए क्या है मायने

आम लोगों के लिए इस निर्णय का मतलब यह है कि जो लोग पहले से ऋण ले रखे हैं उनकी ईएमआई में कोई बदलाव नहीं होगा। नया ऋण लेने वालों को भी मौजूदा ब्याज दरों पर ही लोन मिलेगा। बचत खाते और सावधि जमा की ब्याज दरें भी स्थिर रहेंगी।

जो लोग ऋण लेने की योजना बना रहे थे और सस्ते ऋण की उम्मीद कर रहे थे उन्हें निराशा हो सकती है। लेकिन सकारात्मक पक्ष यह है कि अर्थव्यवस्था की मजबूती से रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और आय में वृद्धि होगी। महंगाई नियंत्रित रहने से आम लोगों की क्रय शक्ति प्रभावित नहीं होगी।

आरबीआई का यह फैसला वित्तीय स्थिरता और आर्थिक विकास के बीच संतुलन बनाने का प्रयास है। आने वाली मौद्रिक नीति बैठकों में परिस्थितियों के अनुसार नीति में बदलाव की संभावना बनी रहेगी।

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