मुफ्त राशन योजना में बड़ा बदलाव, अब डिजिटल फूड कूपन से मिलेगा अनाज, बायोमेट्रिक की झंझट खत्म

सरकार फरवरी 2026 से गुजरात, चंडीगढ़, पुडुचेरी में CBDC-आधारित डिजिटल फूड कूपन पायलट शुरू करेगी, QR स्कैन से राशन मिलेगा, बायोमेट्रिक की जरूरत नहीं

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Ration Latest Update: देश की मुफ्त राशन योजना में एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है। सरकार अगले महीने से चंडीगढ़, पुडुचेरी और गुजरात के तीन जिलों में डिजिटल फूड करेंसी का पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने जा रही है। इस नई व्यवस्था के तहत राशन कार्ड धारकों को हर महीने उनके मोबाइल फोन पर डिजिटल फूड कूपन मिलेंगे। इन कूपन की मदद से वे राशन की दुकानों से अपना मुफ्त अनाज ले सकेंगे। इस योजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि अब राशन लेने के लिए बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन यानी अंगूठा लगाने की जरूरत नहीं होगी।

Ration Latest Update: क्या है डिजिटल फूड करेंसी योजना

सरकार की इस नई पहल के तहत लाभार्थियों को सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी यानी सीबीडीसी के रूप में डिजिटल फूड कूपन दिए जाएंगे। ये कूपन सीधे उनके मोबाइल फोन में आरबीआई द्वारा सक्षम डिजिटल वॉलेट में आएंगे। राशन लेने के लिए लाभार्थियों को बस दुकान मालिक का क्यूआर कोड स्कैन करना होगा और वे अपना मुफ्त अनाज प्राप्त कर सकेंगे। यह व्यवस्था पूरी तरह से डिजिटल होगी और इसमें किसी भी प्रकार के फिजिकल दस्तावेज या बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण की आवश्यकता नहीं होगी।

कहां और कब शुरू होगी यह योजना

सूत्रों के अनुसार, यह पायलट प्रोजेक्ट अगले महीने यानी फरवरी 2026 में शुरू होगा। गुजरात में आनंद, साबरमती और दाहोद जिलों में इस योजना को लागू किया जाएगा। इसके अलावा चंडीगढ़ और पुडुचेरी केंद्र शासित प्रदेशों में भी यह परियोजना शुरू की जाएगी। शुरुआत में सीमित संख्या में लाभार्थियों को इस योजना में शामिल किया जाएगा ताकि इसकी व्यवहार्यता और कार्यक्षमता को परखा जा सके।

अहमदाबाद में हो चुकी है सॉफ्ट लॉन्चिंग

जानकारों के अनुसार, इस योजना की सॉफ्ट लॉन्चिंग जनवरी 2026 की शुरुआत में अहमदाबाद में की जा चुकी है। इस परीक्षण में 25 हजार लाभार्थियों को शामिल किया गया था। राज्य सरकार के अधिकारियों ने बताया कि अब तक लगभग 2000 ट्रांजैक्शन सफलतापूर्वक पूरे हो चुके हैं। इन शुरुआती परिणामों से सरकार को इस डिजिटल व्यवस्था को आगे बढ़ाने का विश्वास मिला है।

Ration Latest Update: प्रूफ ऑफ कॉन्सेप्ट के रूप में होगा संचालन

अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि इस पहल को तीन क्षेत्रों में प्रूफ ऑफ कॉन्सेप्ट के तौर पर चलाया जाएगा। यह छोटे पैमाने पर होगा ताकि इस पहल की व्यवहार्यता, कार्यक्षमता और व्यावहारिक क्षमता को ठीक से समझा और परखा जा सके। इसके सफल होने के बाद ही इसे देश के अन्य हिस्सों में लागू करने पर विचार किया जाएगा।

डिजिटल कूपन की समय सीमा होगी तय

सरकार ने यह भी फैसला किया है कि डिजिटल फूड कूपन के जमा होने से बचने के लिए इसके इस्तेमाल के लिए एक निश्चित समय सीमा तय की जाएगी। इसका मतलब है कि लाभार्थियों को तय अवधि के अंदर ही इन कूपन का उपयोग करना होगा। यह व्यवस्था इसलिए बनाई जा रही है ताकि कूपन का दुरुपयोग न हो और सिस्टम में पारदर्शिता बनी रहे।

योजना का मुख्य उद्देश्य क्या है

इस पहल का मुख्य मकसद दुनिया के सबसे बड़े मुफ्त खाद्य सुरक्षा कार्यक्रम में ज्यादा पारदर्शिता लाना है। साथ ही किसी भी तरह की गड़बड़ी और भ्रष्टाचार को रोकना भी इसका लक्ष्य है। वर्तमान में राशन वितरण प्रणाली में कई बार धांधली और लीकेज की खबरें सामने आती रहती हैं। डिजिटल व्यवस्था से इन समस्याओं पर लगाम लगने की उम्मीद है।

Ration Latest Update: बायोमेट्रिक की परेशानी से मिलेगी मुक्ति

इस नई व्यवस्था का एक बड़ा फायदा यह है कि राशन कार्ड धारकों को बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन की परेशानी से छुटकारा मिलेगा। अक्सर देखा गया है कि बुजुर्गों और मजदूरों की उंगलियों के निशान घिस जाने या अस्पष्ट होने के कारण बायोमेट्रिक मशीन उन्हें पहचान नहीं पाती। इससे उन्हें राशन लेने में दिक्कत होती है। डिजिटल कूपन व्यवस्था से यह समस्या पूरी तरह खत्म हो जाएगी।

चंडीगढ़ और पुडुचेरी में खास व्यवस्था

चंडीगढ़ और पुडुचेरी में स्थिति थोड़ी अलग है। केंद्र सरकार ने 2015 में इन दोनों केंद्र शासित प्रदेशों में अनाज के लिए डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर यानी डीबीटी योजना शुरू की थी। इस योजना में अनाज के फिजिकल वितरण की जगह लाभार्थियों के बैंक खातों में सीधे पैसे ट्रांसफर किए जाते हैं। अब डिजिटल फूड करेंसी से यह सुनिश्चित होगा कि लाभार्थी इस सब्सिडी का इस्तेमाल सिर्फ अनाज खरीदने के लिए ही करें, किसी और काम के लिए नहीं।

आउटलेट्स की पहचान पर चल रहा विचार

चूंकि चंडीगढ़ और पुडुचेरी में अनाज बांटने का कोई प्रावधान नहीं है, इसलिए वहां राशन की दुकानें नहीं हैं। ऐसे में अधिकारी इस बात पर विचार कर रहे हैं कि डिजिटल करेंसी स्वीकार करके मुफ्त अनाज बांटने के लिए कुछ आउटलेट्स या दुकानों की कैसे पहचान की जाए। इन आउटलेट्स के माध्यम से जो मुफ्त अनाज बांटा जाएगा, उसकी सप्लाई फूड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया यानी एफसीआई या राज्य सरकार की एजेंसियां करेंगी।

Ration Latest Update: फीचर फोन यूजर्स के लिए विकल्प तलाश रहे

सरकार इस बात को भी ध्यान में रख रही है कि अभी भी कई लाभार्थियों के पास स्मार्टफोन नहीं हैं। उनके पास बेसिक या फीचर फोन हैं जिनमें डिजिटल वॉलेट का इस्तेमाल संभव नहीं है। इसलिए अधिकारी ऐसे विकल्प तलाश रहे हैं ताकि ये लाभार्थी भी डिजिटल फूड करेंसी का उपयोग कर सकें। इसके लिए एसएमएस आधारित या अन्य सरल तरीके विकसित किए जा सकते हैं।

सिस्टम में आएगी पारदर्शिता

डिजिटल फूड करेंसी व्यवस्था से राशन वितरण प्रणाली में पारदर्शिता आने की पूरी संभावना है। हर लेनदेन डिजिटल रूप से रिकॉर्ड होगा जिससे किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी या गड़बड़ी को रोका जा सकेगा। सरकार के पास हर ट्रांजैक्शन का पूरा डेटा होगा जिससे योजना की निगरानी और मूल्यांकन आसान हो जाएगा।

क्या होगा अगले कदम

पायलट प्रोजेक्ट के परिणामों के आधार पर सरकार इस योजना को देश के अन्य राज्यों और जिलों में लागू करने पर फैसला लेगी। यदि यह परियोजना सफल रहती है तो भविष्य में पूरे देश में मुफ्त राशन वितरण की यह डिजिटल व्यवस्था लागू की जा सकती है। इससे करोड़ों राशन कार्ड धारकों को फायदा होगा और सरकारी खजाने पर बोझ भी कम होगा।

डिजिटल फूड करेंसी योजना भारत की सार्वजनिक वितरण प्रणाली में एक क्रांतिकारी बदलाव साबित हो सकती है। यह न केवल लाभार्थियों के लिए सुविधाजनक होगी बल्कि सरकार के लिए भी इस विशाल योजना को बेहतर तरीके से प्रबंधित करना आसान हो जाएगा। अगले महीने से शुरू हो रहे इस पायलट प्रोजेक्ट के नतीजों का इंतजार पूरे देश को है।

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