Rajasthan: जयपुर उपभोक्ता अदालत में सलमान खान के खिलाफ फिर जारी हुआ जमानती वारंट, 23 फरवरी को पेश होने का आदेश
भ्रामक पान मसाला विज्ञापन मामले में अदालत ने दिखाई सख्ती, कोर्ट के आदेश की अवहेलना पर कार्रवाई
Rajasthan: जयपुर की जिला उपभोक्ता अदालत ने बॉलीवुड के दबंग स्टार सलमान खान के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए दोबारा जमानती वारंट जारी किया है। अदालत ने अभिनेता को 23 फरवरी 2026 को अदालत में व्यक्तिगत रूप से पेश होने का आदेश दिया है। यह कार्रवाई राजश्री पान मसाला के भ्रामक विज्ञापन के मामले में की गई है, जहां कोर्ट की रोक के बावजूद विज्ञापन जारी रखने का आरोप है। यह दूसरी बार है जब अदालत ने सलमान खान के खिलाफ वारंट जारी किया है। इससे पहले 15 जनवरी को भी उन्हें जमानती वारंट से तलब किया गया था, लेकिन अभिनेता ने उसके खिलाफ रिवीजन याचिका दायर की थी।
Rajasthan: मामले की पृष्ठभूमि
यह मामला राजश्री पान मसाला (केसर युक्त इलायची) के विज्ञापनों से जुड़ा है, जिसमें सलमान खान ब्रांड एंबेसडर के रूप में नजर आते हैं। जयपुर के निवासी इंद्रमोहन सिंह ने जिला उपभोक्ता आयोग में परिवाद दायर करते हुए आरोप लगाया कि अभिनेता द्वारा किए जा रहे विज्ञापन भ्रामक और गुमराह करने वाले हैं।
परिवाद में कहा गया है कि सलमान खान राजश्री पान मसाला में केसर युक्त इलायची और केसर युक्त पान मसाला के नाम पर उपभोक्ताओं को गुमराह कर रहे हैं। विज्ञापनों में यह दावा किया जाता है कि उत्पाद में असली केसर का उपयोग किया गया है, जो वास्तविकता से परे है। इंद्रमोहन सिंह ने अपने परिवाद में तर्कसंगत सवाल उठाया कि जब केसर का बाजार मूल्य लगभग चार लाख रुपये प्रति किलोग्राम है, तो मात्र पांच रुपये के एक छोटे से पाउच में असली केसर कैसे मिल सकता है। यह स्पष्ट रूप से उपभोक्ताओं को धोखा देने का प्रयास है।
उपभोक्ता अदालत का पहला आदेश
जिला उपभोक्ता आयोग ने परिवाद की सुनवाई के दौरान प्रथम दृष्टया मामले में दम पाया और राजश्री पान मसाला के भ्रामक विज्ञापनों पर रोक लगाने का आदेश दिया। अदालत ने निर्देश दिया कि जब तक मामले में अंतिम निर्णय नहीं आता, तब तक ऐसे विज्ञापन प्रसारित नहीं किए जाने चाहिए।
हालांकि, परिवादी की शिकायत के अनुसार, अदालत के स्पष्ट आदेश के बावजूद राजश्री पान मसाला के विज्ञापन विभिन्न मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर जारी रहे। टेलीविजन चैनलों, डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और सोशल मीडिया पर सलमान खान को उत्पाद का प्रचार करते हुए देखा जा सकता था। अदालत के आदेश की इस स्पष्ट अवहेलना को गंभीरता से लेते हुए उपभोक्ता आयोग ने कड़ा रुख अपनाया और सलमान खान को व्यक्तिगत रूप से तलब करने का निर्णय लिया।
Rajasthan: पहला जमानती वारंट
15 जनवरी 2026 को जिला उपभोक्ता आयोग ने सलमान खान के खिलाफ पहला जमानती वारंट जारी किया। अदालत ने अभिनेता को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने और अदालत की अवहेलना के मामले में अपना पक्ष रखने का आदेश दिया।
जमानती वारंट का अर्थ है कि संबंधित व्यक्ति को गिरफ्तार नहीं किया जाएगा, बल्कि उन्हें स्वयं अदालत में पेश होना होगा। यदि वे निर्धारित तारीख पर पेश नहीं होते, तो अदालत आगे की कार्रवाई कर सकती है, जिसमें गैर-जमानती वारंट भी शामिल हो सकता है। हालांकि, सलमान खान ने इस पहले वारंट के विरुद्ध रिवीजन याचिका दायर की। उनकी कानूनी टीम ने तर्क दिया कि वे केवल ब्रांड एंबेसडर हैं और उत्पाद की सामग्री या विज्ञापन की सामग्री के निर्धारण में उनकी कोई भूमिका नहीं है।
रिवीजन याचिका और दूसरा वारंट
सलमान खान की रिवीजन याचिका के बावजूद, जिला उपभोक्ता आयोग ने अपने रुख में कोई नरमी नहीं दिखाई। अदालत ने माना कि ब्रांड एंबेसडर के रूप में सलमान खान उस उत्पाद के विज्ञापन के लिए जिम्मेदार हैं जिसका वे प्रचार कर रहे हैं।
अदालत ने यह भी नोट किया कि एक प्रभावशाली सेलिब्रिटी होने के नाते, सलमान खान के विज्ञापनों का लाखों लोगों पर प्रभाव पड़ता है। इसलिए उन्हें यह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी है कि वे जिस उत्पाद का प्रचार कर रहे हैं, वह वास्तविक और प्रामाणिक है। इन तथ्यों को ध्यान में रखते हुए, उपभोक्ता आयोग ने सलमान खान के खिलाफ दोबारा जमानती वारंट जारी किया और उन्हें 23 फरवरी 2026 को अदालत में व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश दिया।
Rajasthan: ब्रांड एंबेसडर की जिम्मेदारी
यह मामला एक महत्वपूर्ण कानूनी और नैतिक प्रश्न उठाता है – क्या ब्रांड एंबेसडर उन उत्पादों के लिए जवाबदेह हैं जिनका वे प्रचार करते हैं?
उपभोक्ता संरक्षण कानूनों के तहत, ब्रांड एंबेसडर को यह सुनिश्चित करना होता है कि वे जिस उत्पाद का समर्थन कर रहे हैं, उसके बारे में किए गए दावे सत्य और सत्यापन योग्य हों। यदि विज्ञापन भ्रामक या झूठे हैं, तो ब्रांड एंबेसडर को भी जवाबदेह ठहराया जा सकता है। सेलिब्रिटी एंडोर्समेंट के मामले में, यह जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है क्योंकि आम जनता अपने पसंदीदा सितारों पर भरोसा करती है। लोग मानते हैं कि यदि कोई प्रसिद्ध व्यक्ति किसी उत्पाद का समर्थन कर रहा है, तो वह उत्पाद अच्छा और विश्वसनीय होगा।
केसर की कीमत और भ्रामक दावे
इंद्रमोहन सिंह द्वारा उठाया गया मुद्दा बेहद प्रासंगिक है। केसर विश्व के सबसे महंगे मसालों में से एक है और इसकी कीमत लगभग तीन से पांच लाख रुपये प्रति किलोग्राम तक होती है।
ऐसी स्थिति में, पांच रुपये की एक छोटी पाउच में असली केसर की उपस्थिति का दावा करना स्पष्ट रूप से अतार्किक और भ्रामक है। यदि उत्पाद में वास्तव में केसर है भी, तो उसकी मात्रा नगण्य होगी और “केसर युक्त” का दावा करना उपभोक्ताओं को गुमराह करना है। इस प्रकार के भ्रामक विज्ञापन न केवल कानूनी रूप से गलत हैं, बल्कि नैतिक रूप से भी अनुचित हैं। ये उपभोक्ताओं का विश्वास तोड़ते हैं और उन्हें आर्थिक नुकसान पहुंचाते हैं।
Rajasthan: पान मसाला विज्ञापनों पर प्रतिबंध
यह भी ध्यान देने योग्य है कि भारत में तंबाकू उत्पादों और पान मसाला के प्रत्यक्ष विज्ञापन पर प्रतिबंध है। इसलिए कई कंपनियां “सरोगेट एडवर्टाइजिंग” का सहारा लेती हैं, जहां वे इलायची, मुखवास या अन्य उत्पादों के नाम पर विज्ञापन करती हैं। हालांकि, ये विज्ञापन वास्तव में पान मसाला ब्रांड को बढ़ावा देने के लिए होते हैं। यह प्रथा भी विवादास्पद है और कई बार अदालतों में चुनौती दी गई है।
सलमान खान और अन्य विज्ञापन विवाद
यह पहली बार नहीं है जब सलमान खान किसी विज्ञापन विवाद में फंसे हैं। पहले भी उन्हें विभिन्न उत्पादों के भ्रामक विज्ञापनों के लिए आलोचना का सामना करना पड़ा है।
कई अन्य बॉलीवुड सितारे भी इसी तरह के मामलों में फंस चुके हैं। अमिताभ बच्चन, शाहरुख खान और आमिर खान सहित कई शीर्ष अभिनेताओं को उपभोक्ता अदालतों में नोटिस मिल चुके हैं। इन मामलों ने सेलिब्रिटी एंडोर्समेंट की नैतिकता और कानूनी जिम्मेदारी पर एक व्यापक बहस छेड़ दी है।
Rajasthan: उपभोक्ता अधिकार और जागरूकता
यह मामला उपभोक्ता अधिकारों के महत्व को भी रेखांकित करता है। उपभोक्ताओं को भ्रामक विज्ञापनों के खिलाफ शिकायत दर्ज करने का पूरा अधिकार है।
जिला, राज्य और राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग उपभोक्ताओं की शिकायतों को सुनते हैं और उचित कार्रवाई करते हैं। इंद्रमोहन सिंह का यह कदम अन्य उपभोक्ताओं के लिए प्रेरणादायक है। उपभोक्ताओं को चाहिए कि वे विज्ञापनों में किए गए दावों को आंख मूंदकर स्वीकार न करें। उन्हें उत्पादों की जांच करनी चाहिए और यदि कोई भ्रामक विज्ञापन दिखे, तो उसकी शिकायत करनी चाहिए।
23 फरवरी की सुनवाई
अब सभी की नजरें 23 फरवरी 2026 पर हैं, जब सलमान खान को जयपुर की उपभोक्ता अदालत में पेश होना है। यह देखना होगा कि अभिनेता क्या रुख अपनाते हैं और अदालत क्या निर्णय लेती है। यदि सलमान खान निर्धारित तारीख पर पेश नहीं होते, तो अदालत और सख्त कार्रवाई कर सकती है, जिसमें गैर-जमानती वारंट या अवमानना कार्यवाही शामिल हो सकती है।
Rajasthan: निष्कर्ष
जयपुर उपभोक्ता अदालत द्वारा सलमान खान के खिलाफ दोबारा जमानती वारंट जारी करना यह संदेश देता है कि कानून सभी के लिए समान है। सेलिब्रिटी होने से कोई व्यक्ति अपनी जिम्मेदारियों से बच नहीं सकता। ब्रांड एंबेसडर के रूप में, सलमान खान को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वे जिन उत्पादों का प्रचार कर रहे हैं, वे प्रामाणिक और वास्तविक हैं। यह मामला उपभोक्ता अधिकारों की रक्षा और भ्रामक विज्ञापनों के खिलाफ लड़ाई में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो सकता है।
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