चुनाव आते ही कोर्ट में शुरू हो जाती हैं राजनीतिक लड़ाइयां’ हिमंत बिस्व सरमा के विवादित वीडियो पर CJI की टिप्पणी, SIT गठन की मांग

चुनावी समय में कोर्ट में राजनीतिक लड़ाई, SIT गठन की मांग, CJI बोले- चुनाव आते ही कोर्ट पहुंच जाती हैं लड़ाइयां

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Supreme Court News: असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा के विवादित वीडियो को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिकाओं पर मंगलवार को सुनवाई हुई। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत ने इस मामले पर एक महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि जब चुनाव नजदीक आते हैं तो राजनीतिक लड़ाइयां सुप्रीम कोर्ट में भी पहुंच जाती हैं।

कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया मार्क्सिस्ट और सीपीआई नेता अन्नी राजा ने अलग-अलग याचिकाएं दायर करके असम के मुख्यमंत्री के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि वीडियो में एक विशेष समुदाय को निशाना बनाया गया है और यह नफरत फैलाने वाला है। इस विवाद ने देश में राजनीतिक बहस को तेज कर दिया है।

Supreme Court News: क्या है विवादित वीडियो का पूरा मामला

यह विवाद 7 फरवरी को शुरू हुआ जब असम बीजेपी ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट पर एक वीडियो पोस्ट किया। इस वीडियो में मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा को हाथ में राइफल लिए दिखाया गया था। वीडियो का सबसे विवादास्पद हिस्सा वह था जहां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई की मदद से तैयार किया गया एक दृश्य जोड़ा गया था।

इस एआई जनरेटेड हिस्से में दाढ़ी और सफेद टोपी पहने दो पुरुषों की तस्वीरें दिखाई गई थीं जिन पर गोलियां लगती हुई दिखाई दे रही थीं। यह दृश्य स्पष्ट रूप से एक विशेष धार्मिक समुदाय को निशाना बनाने वाला प्रतीत हो रहा था। वीडियो पोस्ट होते ही सोशल मीडिया पर तीव्र प्रतिक्रिया हुई। जैसे ही विरोध तेज हुआ, असम बीजेपी ने कुछ ही घंटों में वीडियो को हटा दिया। लेकिन तब तक वह काफी वायरल हो चुका था।

Supreme Court News: संसद में हंगामा और राजनीतिक प्रतिक्रिया

इस वीडियो विवाद ने संसद में भी हंगामा मचा दिया। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने इसे लेकर सदन में जमकर हंगामा किया। विपक्ष ने आरोप लगाया कि यह सांप्रदायिक सद्भाव को बिगाड़ने की कोशिश है और संवैधानिक मूल्यों के खिलाफ है।

कांग्रेस ने वीडियो को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा करते हुए सरकार की नैतिकता पर सवाल उठाए। पार्टी ने कहा कि एक मुख्यमंत्री को ऐसे वीडियो में दिखाना घोर निंदनीय है। अन्य विपक्षी दलों ने भी इसकी कड़ी निंदा की। उन्होंने मांग की कि हिमंत बिस्व सरमा को तत्काल पद से हटाया जाए और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए।

Supreme Court News: सुप्रीम कोर्ट में याचिका और मांगें

सीपीएम और अन्नी राजा ने सुप्रीम कोर्ट में अलग-अलग रिट पिटीशन दायर की हैं। याचिकाओं में कई गंभीर मांगें की गई हैं:

  • FIR की मांग: पहली मांग यह है कि हिमंत बिस्व सरमा के खिलाफ नफरती भाषण और सांप्रदायिक ध्रुवीकरण के आरोप में एफआईआर दर्ज की जाए।

  • SIT का गठन: दूसरी महत्वपूर्ण मांग स्पेशल इंवेस्टिगेशन टीम यानी एसआईटी गठित करने की है। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि चूंकि आरोपी स्वयं एक राज्य के मुख्यमंत्री हैं, इसलिए राज्य पुलिस या केंद्रीय जांच एजेंसियों से निष्पक्ष जांच की उम्मीद नहीं की जा सकती।

  • स्वतंत्र जांच: याचिका में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में एक स्वतंत्र एसआईटी गठित की जाए जो निष्पक्ष तरीके से जांच करे।

Supreme Court News: वकील की दलीलें

याचिकाकर्ताओं के वकील एडवोकेट निजाम पाशा ने कोर्ट में विस्तार से मामला रखा। उन्होंने कहा कि हिमंत बिस्व सरमा की ओर से की गई आपत्तिजनक टिप्पणियां और यह वीडियो बेहद गंभीर मामला है जिसमें तत्काल हस्तक्षेप की जरूरत है। वकील ने बताया कि वीडियो में मुख्यमंत्री को एक विशेष समुदाय के लोगों पर गोली चलाते हुए दिखाया गया है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में शिकायत तो दर्ज हो गई है लेकिन एफआईआर नहीं हुई है।

Supreme Court News: CJI की टिप्पणी का महत्व

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत की टिप्पणी बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा:

“हम सुनवाई जरूर करेंगे लेकिन समस्या यह है कि जब चुनाव का समय आता है तो उसका एक हिस्सा कोर्ट में लड़ा जाता है।”

यह टिप्पणी दो पहलुओं को उजागर करती है। एक तो यह कि सीजेआई ने मामले की सुनवाई का आश्वासन दिया है जो याचिकाकर्ताओं के लिए सकारात्मक है। दूसरे, उन्होंने यह भी संकेत दिया कि कई बार राजनीतिक मामले चुनावी लाभ के लिए कोर्ट में लाए जाते हैं। सीजेआई ने कहा कि वे जल्द ही सुनवाई की तारीख देंगे।

Supreme Court News: राजनीतिक विश्लेषण और आगे की राह

यह मामला केवल कानूनी नहीं बल्कि गहरे राजनीतिक निहितार्थ रखता है। एक तरफ विपक्ष इसे सांप्रदायिक ध्रुवीकरण की कोशिश बता रहा है, दूसरी ओर बीजेपी का तर्क हो सकता है कि यह केवल एक तकनीकी गलती थी और वीडियो तुरंत हटा दिया गया।

अब देखना यह होगा कि सुप्रीम कोर्ट इस मामले में क्या रुख अपनाता है। क्या एसआईटी गठित की जाएगी? क्या हिमंत बिस्व सरमा के खिलाफ एफआईआर होगी? ये सभी सवाल अभी अनुत्तरित हैं। यह मामला भारतीय राजनीति में नफरती भाषण, सोशल मीडिया की जिम्मेदारी और राजनीतिक नेताओं की जवाबदेही जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों को भी उठाता है।

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