PM Modi CCS Meeting West Asia Crisis: पश्चिम एशिया संकट पर PM मोदी की हाईलेवल CCS बैठक, खाद-तेल-गैस की कमी से निपटने की रणनीति तय, जानें किन मुद्दों पर हुआ मंथन

पश्चिम एशिया तनाव के बीच PM मोदी की हाईलेवल बैठक, खाद-तेल-गैस आपूर्ति पर बनी रणनीति

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PM Modi CCS Meeting West Asia Crisis: पश्चिम एशिया में ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच जारी भीषण संघर्ष के बीच भारत सरकार पूरी तरह सतर्क और सक्रिय हो गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज मंत्रिमंडल की सुरक्षा समिति यानी CCS की एक उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में पश्चिम एशिया में उपजे हालात की विस्तृत समीक्षा की गई और भारत पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों को कम से कम करने के लिए एक ठोस और बहुआयामी रणनीति पर चर्चा हुई। बैठक में खाद्य सुरक्षा, उर्वरकों की उपलब्धता, ऊर्जा आपूर्ति, पेट्रोलियम, गैस, बिजली और औद्योगिक क्षेत्रों पर संभावित असर का गहन आकलन किया गया। कैबिनेट सचिव ने बैठक में एक विस्तृत प्रेजेंटेशन देकर सभी प्रभावित क्षेत्रों की जानकारी साझा की। प्रधानमंत्री मोदी ने सभी मंत्रालयों को मिलकर काम करने और राज्य सरकारों से समन्वय बनाए रखने के स्पष्ट निर्देश दिए।

PM Modi CCS Meeting West Asia Crisis: क्यों बुलाई गई यह आपात बैठक?

पश्चिम एशिया में ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच छिड़े युद्ध ने पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को हिला कर रख दिया है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जो दुनिया की लगभग 20 प्रतिशत तेल आपूर्ति का मार्ग है उस पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं। खाड़ी देशों में भारतीय नागरिक फंसे हैं। खाद और उर्वरकों की आपूर्ति पर खतरा है। इन सभी कारणों से प्रधानमंत्री मोदी ने CCS की आपात बैठक बुलाई।

CCS यानी Cabinet Committee on Security भारत की सर्वोच्च सुरक्षा और नीति निर्धारण समिति है। इसमें प्रधानमंत्री के साथ रक्षा मंत्री, गृह मंत्री, विदेश मंत्री और वित्त मंत्री सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल होते हैं।

कैबिनेट सचिव का विस्तृत प्रेजेंटेशन

बैठक में कैबिनेट सचिव ने वैश्विक हालात पर एक विस्तृत और डेटा आधारित प्रेजेंटेशन दिया। इसमें भारत सरकार के विभिन्न मंत्रालयों और विभागों द्वारा अब तक उठाए गए कदमों और आगे अपनाए जाने वाले उपायों की पूरी जानकारी दी गई।

प्रेजेंटेशन में कृषि, उर्वरक, खाद्य सुरक्षा, पेट्रोलियम, बिजली, MSME यानी सूक्ष्म लघु और मध्यम उद्यम, निर्यातक, शिपिंग, व्यापार, वित्त और आपूर्ति श्रृंखला सहित सभी प्रभावित क्षेत्रों का विस्तृत विवरण दिया गया। देश की समग्र समष्टि आर्थिक यानी मैक्रो-इकोनॉमिक स्थिति और आगे उठाए जाने वाले कदमों पर भी विचार-विमर्श किया गया।

खाद्य, ऊर्जा और ईंधन सुरक्षा पर विशेष चर्चा

बैठक में सबसे अधिक चिंता आम नागरिकों की बुनियादी जरूरतों को लेकर जताई गई। खाद्य सुरक्षा, ऊर्जा और ईंधन की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता बताई गई।

पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के वैश्विक अर्थव्यवस्था पर अल्पकालिक, मध्यम अवधि और दीर्घकालिक प्रभावों का गहन आकलन किया गया। इस संदर्भ में तत्काल और दीर्घकालिक दोनों प्रकार के प्रतिरोधात्मक उपायों पर चर्चा हुई। यह सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया कि सभी बिजली संयंत्रों में पर्याप्त कोयला भंडार उपलब्ध रहे ताकि देश में बिजली की कोई कमी न हो।

किसानों के लिए उर्वरक की चिंता

बैठक में एक अहम मुद्दा आने वाले खरीफ मौसम के लिए उर्वरकों की उपलब्धता का था। भारत अपनी उर्वरक जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों और ईरान से आयात करता है। युद्ध के कारण इस आपूर्ति पर गहरा संकट आ सकता है जिसका सीधा असर देश की कृषि और खाद्य सुरक्षा पर पड़ेगा।

बैठक में किसानों के लिए उर्वरकों के वैकल्पिक स्रोतों पर गंभीरता से विचार किया गया। सरकार के अनुसार पिछले कुछ वर्षों में उर्वरकों के पर्याप्त भंडार बनाए रखने के लिए जो कदम उठाए गए हैं उससे फिलहाल समय पर उपलब्धता सुनिश्चित होगी। लेकिन यदि युद्ध लंबे समय तक जारी रहा तो वैकल्पिक स्रोतों की तलाश जरूरी होगी।

आयात स्रोतों में विविधता और नए निर्यात बाजार

बैठक में रसायन, औषधि, पेट्रोकेमिकल और अन्य औद्योगिक क्षेत्रों के लिए आवश्यक आयात के स्रोतों में विविधता लाने पर भी विस्तार से चर्चा हुई। सरकार का मानना है कि किसी एक क्षेत्र या देश पर आयात निर्भरता कम करना दीर्घकालिक राष्ट्रीय हित में है।

इसके अलावा पश्चिम एशिया संकट के कारण उन देशों में भारतीय वस्तुओं की मांग बढ़ सकती है जो अभी तक ईरानी या खाड़ी देशों से सामान खरीदते थे। इस अवसर का लाभ उठाने के लिए निकट भविष्य में नए निर्यात बाजार विकसित करने की योजना पर भी विचार किया गया।

PM मोदी के निर्देश

प्रधानमंत्री मोदी ने बैठक में स्पष्ट किया कि पश्चिम एशिया का यह संघर्ष एक लगातार बदलती स्थिति है और पूरी दुनिया किसी न किसी रूप में इससे प्रभावित हो रही है। उन्होंने कहा कि ऐसे समय में यह सुनिश्चित करना हमारी जिम्मेदारी है कि भारत के नागरिकों पर इसका न्यूनतम प्रभाव पड़े।

प्रधानमंत्री ने निर्देश दिया कि सरकार के सभी अंग यानी केंद्रीय मंत्रालय, राज्य सरकारें और जिला प्रशासन मिलकर काम करें। उन्होंने राज्य सरकारों के साथ समुचित समन्वय बनाए रखने को कहा ताकि आवश्यक वस्तुओं की कालाबाजारी और जमाखोरी न होने पाए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जो व्यापारी या कंपनियां संकट का फायदा उठाकर जमाखोरी करेंगी उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

PM Modi CCS Meeting West Asia Crisis: UAE और ओमान से भी हुई बात

इस CCS बैठक से पहले प्रधानमंत्री मोदी ने UAE के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद से फोन पर बात की। इस बातचीत में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की स्थिति और खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव पर चर्चा हुई। इसके अलावा ओमान के सुल्तान और मलेशिया के प्रधानमंत्री से भी मोदी ने बातचीत की और मध्य-पूर्व में जारी तनाव पर चिंता जताई। यह कूटनीतिक सक्रियता दर्शाती है कि भारत इस संकट को गंभीरता से ले रहा है।

अस्वीकरण: यह लेख उपलब्ध सूचनाओं के आधार पर तैयार किया गया है।

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