काम छोड़कर TV के आगे बैठ जाते थे लोग! 90s के इस शो में थे 15 से ज्यादा दिग्गज, नीना गुप्ता से रजत कपूर तक सब थे साथ
90 के दशक में दूरदर्शन पर छाया 'जुनून' नीना गुप्ता, रजत कपूर, फरीदा जलाल, सईद जाफरी तक सब थे, 500 एपिसोड तक दर्शकों को बांधे रखा
Junoon TV serial: आज के दौर में जब OTT प्लेटफॉर्म और सैकड़ों चैनलों की भरमार है, तब भी 90 के दशक के दूरदर्शन के उन पुराने धारावाहिकों की याद आते ही मन एक अजीब सी तड़प से भर जाता है। वह दौर ही कुछ अलग था। एक ही चैनल, सीमित शो और फिर भी वह जादू जो आज के करोड़ों बजट वाले प्रोडक्शन भी नहीं कर पाते। उस दौर में एक ऐसा धारावाहिक आया था जिसने न केवल दर्शकों को अपनी कहानी से बांधा बल्कि अपनी इतनी भारी-भरकम स्टार कास्ट से सबको चौंका दिया कि लोग उसे देखने के लिए अपने सारे काम निपटाकर टीवी के सामने बैठ जाते थे। हम बात कर रहे हैं साल 1993 में शुरू हुए मशहूर धारावाहिक जुनून की, जिसने छोटे पर्दे को बड़े पर्दे के बराबर खड़ा कर दिया था।
Junoon TV serial: स्वर्ण युग का सबसे चमकदार सितारा था जुनून
भारतीय टेलीविजन के इतिहास में 90 का दशक एक ऐसे स्वर्ण काल के रूप में दर्ज है जिसे आज भी पुराने दर्शक बड़े चाव से याद करते हैं। उस समय दूरदर्शन ही एकमात्र ऐसा माध्यम था जो हर घर की पहचान बन चुका था। रामायण, महाभारत और शक्तिमान जैसे शोज ने जो लोकप्रियता पाई वह अपने आप में एक मिसाल थी। लेकिन जुनून ने इस भीड़ में अपनी एक अलग ही जगह बनाई। निर्देशक ए. सलाम के निर्देशन में बना यह धारावाहिक 1993 में शुरू होकर 1998 तक करीब चार वर्षों तक दर्शकों के दिलों पर राज करता रहा। इस शो के लगभग 500 एपिसोड प्रसारित हुए जो उस समय के हिसाब से एक बेमिसाल उपलब्धि थी।
Junoon TV serial: दो परिवारों की दुश्मनी और रिश्तों की उलझन
जुनून की कहानी किसी बड़ी बॉलीवुड फिल्म से जरा भी कम नहीं थी। यह धारावाहिक मुख्य रूप से दो प्रभावशाली और रसूखदार परिवारों राजवंश और धनराज के इर्द-गइर्द बुनी गई थी। इन दोनों परिवारों के बीच पुरानी दुश्मनी थी जो पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही थी। इसी दुश्मनी की जड़ में सत्ता का संघर्ष, संपत्ति की लड़ाई और रिश्तों की जटिल गुत्थियां थीं। लेखकों ने इन किरदारों के बीच इतनी बारीकी से भावनाओं को बुना था कि दर्शक हर किरदार से खुद को जोड़ने लगते थे। कभी किसी किरदार पर तरस आता था, कभी किसी से नफरत होती थी और कभी किसी के लिए आंखें नम हो जाती थीं।
Junoon TV serial: एक नहीं दो नहीं, 15 से भी ज्यादा दिग्गज एक साथ
जुनून को जो चीज सबसे अलग और खास बनाती थी वह थी इसकी अभूतपूर्व स्टार कास्ट। उस दौर में जब बड़े सितारों को टीवी पर लाना लगभग नामुमकिन माना जाता था, जुनून ने एक साथ डेढ़ दर्जन से भी ज्यादा दिग्गज कलाकारों को एक ही मंच पर उतार दिया। फरीदा जलाल जिन्हें उनकी मासूम भूमिकाओं के लिए जाना जाता था, परीक्षित साहनी जिनकी गंभीर अदाकारी हमेशा दर्शकों को बांधती थी, सईद जाफरी जो अपनी धाकड़ आवाज और प्रभावशाली उपस्थिति के लिए मशहूर थे, सोनी राजदान जिन्होंने हमेशा चुनौतीपूर्ण किरदार निभाए और रजत कपूर जो आज भी हिंदी सिनेमा के सबसे प्रतिभाशाली अभिनेताओं में गिने जाते हैं, ये सभी एक ही शो का हिस्सा थे।
Junoon TV serial: इन सितारों ने भी चमकाई महफिल
जुनून की स्टार कास्ट यहीं नहीं रुकती। इसके अलावा तनुजा, राजेश खट्टर, टॉम अल्टर, पंकज बेरी और नीना गुप्ता जैसे दिग्गज भी इस शो में नजर आए। पुनीत इस्सर जो अपनी दमदार शारीरिक उपस्थिति और सशक्त अभिनय के लिए जाने जाते हैं, अर्चना पूरन सिंह जो बाद में कॉमेडी की दुनिया में एक अलग मुकाम हासिल करेंगी, शहबाज खान जिनकी खलनायकी हमेशा यादगार रही, बीना बनर्जी, किट्टू गिडवानी, दीना पाठक जिनका नाम भारतीय अभिनय जगत में एक अलग मकाम रखता है, बेंजामिन गिलानी, रविंद्र कपूर, मंगल ढिल्लो, एकता सोहिनी, शशि Puri और स्मिता जयकर जैसे अभिनेताओं ने इस शो को और भी समृद्ध बनाया।
Junoon TV serial: टाइटल ट्रैक जो आज भी गूंजता है कानों में
किसी भी धारावाहिक की पहचान उसके टाइटल ट्रैक से भी होती है और जुनून इसमें भी पीछे नहीं था। इस शो के टाइटल गीत को उस दौर के मशहूर प्लेबैक सिंगर विनोद राठौर ने अपनी आवाज दी थी। उनकी जादुई आवाज में यह गीत इतना असरदार था कि जैसे ही टीवी पर यह धुन बजती थी, घर का हर सदस्य चाहे जो कर रहा हो, सब कुछ छोड़कर टीवी के सामने आ जाता था। आज भी जो लोग उस दौर में बड़े हुए हैं उनके कानों में यह धुन सुनाई पड़ती है और मन पुरानी यादों में खो जाता है।
Junoon TV serial: जुनून ने बदल दी थी छोटे पर्दे की परिभाषा
जुनून ने उस दौर में एक क्रांति की शुरुआत की थी। यह शो उन चुनिंदा धारावाहिकों में से एक था जिसने यह साबित किया कि टेलीविजन केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं बल्कि एक ऐसा मंच है जहां बेहतरीन कहानियां और दमदार अभिनय का संगम हो सकता है। जो लोग टीवी को छोटा पर्दा कहकर हल्के में लेते थे, जुनून ने उनकी सोच को बदल दिया। आज जब 90 के दशक के यादगार धारावाहिकों की बात होती है तो जुनून का नाम बड़े गर्व और सम्मान के साथ लिया जाता है। यह शो इस बात की जीती-जागती मिसाल है कि अगर कहानी में दम हो, किरदार में जान हो और कलाकारों में जुनून हो तो दर्शकों को सालों तक बांधे रखा जा सकता है।
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