25 मार्च 2026 पंचांग,- चैत्र नवरात्रि की महासप्तमी पर मां कालरात्रि की पूजा का विशेष संयोग, सौभाग्य योग और मृगशिरा नक्षत्र से दिन बना अत्यंत शुभ, जानें शुभ मुहूर्त, राहुकाल और पूजा विधि
महासप्तमी पर सौभाग्य योग संग कालरात्रि पूजा, जानें शुभ समय और राहुकाल
Chaitra Navratri 2026: चैत्र नवरात्रि का पावन पर्व अपनी सातवीं तिथि पर एक विशेष खगोलीय संयोग लेकर आया है। जब सौभाग्य योग और मृगशिरा नक्षत्र एक साथ आते हैं, तो उस दिन की पूजा का फल कई गुना बढ़ जाता है। 25 मार्च को ऐसा ही दुर्लभ संयोग बन रहा है।
Chaitra Navratri 2026: सप्तमी है या अष्टमी, क्या है सही तिथि का रहस्य
यह प्रश्न हर भक्त के मन में है कि 25 मार्च को कौन सी तिथि मनाई जाएगी। पंचांग गणना के अनुसार सप्तमी तिथि दोपहर 1 बजकर 50 मिनट तक रहेगी और उसके पश्चात अष्टमी तिथि आरंभ होगी।
हिंदू धर्म में उदया तिथि का विशेष महत्व होता है। उदया तिथि वह तिथि होती है जो सूर्योदय के समय चल रही हो। चूंकि 25 मार्च को सूर्योदय के समय सप्तमी तिथि विद्यमान रहेगी, इसलिए इस पूरे दिन को महासप्तमी के रूप में मनाया जाएगा।
Chaitra Navratri 2026: मां कालरात्रि की पूजा का पौराणिक महत्व क्या है
नवरात्रि की सप्तमी तिथि पर माँ दुर्गा के सातवें स्वरूप मां कालरात्रि की उपासना की जाती है। पौराणिक आख्यानों के अनुसार जब माता पार्वती ने राक्षसों शुंभ और निशुंभ का संहार करने के लिए अपना स्वर्णिम वर्ण त्याग दिया, तब उनका यह घोर और उग्र रूप प्रकट हुआ जिसे कालरात्रि कहा गया।
मां कालरात्रि की उपासना से जीवन का अंधकार मिटता है, भय का नाश होता है और शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है। काले रंग के वस्त्र धारण किए मां कालरात्रि का स्वरूप बाहर से भले ही भयावह लगे, लेकिन वे अपने भक्तों को सदा शुभ फल ही देती हैं, इसीलिए उन्हें “शुभंकरी” भी कहा जाता है।
Chaitra Navratri 2026: 25 मार्च 2026 का सम्पूर्ण पंचांग विवरण
पंचांग के अनुसार 25 मार्च 2026 को तिथि सप्तमी दोपहर 1 बजकर 50 मिनट तक रहेगी, उसके बाद अष्टमी लग जाएगी। नक्षत्र की बात करें तो मृगशिरा नक्षत्र सायं 5 बजकर 33 मिनट तक रहेगा और उसके पश्चात आर्द्रा नक्षत्र आरंभ होगा।
योग के क्षेत्र में सौभाग्य योग 26 मार्च की रात्रि 3 बजकर 9 मिनट तक बना रहेगा जो इस पूरे दिन को विशेष शुभ बनाता है। सूर्योदय प्रातः 6 बजकर 20 मिनट पर और सूर्यास्त सायं 6 बजकर 35 मिनट पर होगा। चंद्रोदय प्रातः 10 बजकर 53 मिनट पर होगा और चंद्रास्त 26 मार्च की रात्रि 1 बजकर 35 मिनट पर होगा।
Chaitra Navratri 2026: 25 मार्च 2026 के शुभ मुहूर्त कौन से हैं
इस दिन पूजा, अनुष्ठान और शुभ कार्यों के लिए कई उत्तम मुहूर्त उपलब्ध हैं। ब्रह्म मुहूर्त प्रातः 4 बजकर 45 मिनट से 5 बजकर 33 मिनट तक रहेगा जो साधना और ध्यान के लिए सर्वोत्तम माना जाता है।
प्रातः सन्ध्या का मुहूर्त सुबह 5 बजकर 9 मिनट से 6 बजकर 20 मिनट तक रहेगा। अमृत काल प्रातः 9 बजकर 19 मिनट से 10 बजकर 48 मिनट तक रहेगा जो किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत के लिए उत्तम है। विजय मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 30 मिनट से 3 बजकर 19 मिनट तक रहेगा। गोधूलि मुहूर्त सायं 6 बजकर 34 मिनट से 6 बजकर 57 मिनट तक रहेगा। इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग प्रातः 6 बजकर 20 मिनट से सायं 5 बजकर 33 मिनट तक रहेगा।
Chaitra Navratri 2026: प्रमुख शहरों में राहुकाल का समय क्या रहेगा
राहुकाल में कोई भी नया या शुभ कार्य आरंभ करना वर्जित माना जाता है। 25 मार्च को विभिन्न शहरों में राहुकाल का समय अलग-अलग रहेगा।
दिल्ली में राहुकाल दोपहर 12 बजकर 27 मिनट से 1 बजकर 59 मिनट तक रहेगा। मुंबई में यह दोपहर 12 बजकर 45 मिनट से 2 बजकर 16 मिनट तक रहेगा। चंडीगढ़ में दोपहर 12 बजकर 29 मिनट से 2 बजकर 1 मिनट तक और लखनऊ में दोपहर 12 बजकर 13 मिनट से 1 बजकर 44 मिनट तक राहुकाल रहेगा। भोपाल में यह समय दोपहर 12 बजकर 26 मिनट से 1 बजकर 58 मिनट तक होगा। कोलकाता में दोपहर 11 बजकर 43 मिनट से 1 बजकर 14 मिनट तक, अहमदाबाद में दोपहर 12 बजकर 46 मिनट से 2 बजकर 17 मिनट तक और चेन्नई में दोपहर 12 बजकर 15 मिनट से 1 बजकर 46 मिनट तक राहुकाल रहेगा।
Chaitra Navratri 2026: सौभाग्य योग और मृगशिरा नक्षत्र का संयोग क्यों है खास
ज्योतिष शास्त्र के जानकारों के अनुसार सौभाग्य योग वह योग है जो व्यक्ति के भाग्य को उदय करता है और जीवन में समृद्धि तथा सुख का मार्ग प्रशस्त करता है। जब यह योग नवरात्रि की सप्तमी जैसी पवित्र तिथि के साथ मिलता है तो इसका प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है।
मृगशिरा नक्षत्र को सौम्य और शांत नक्षत्र माना जाता है। इस नक्षत्र में की गई पूजा और साधना शीघ्र फलदायी होती है। धर्म विशेषज्ञों का मत है कि इस दिन मां कालरात्रि की पूजा में लाल रंग के पुष्प, गुड़ और तिल का प्रयोग करना अत्यंत शुभ रहेगा।
निष्कर्ष
25 मार्च 2026 का दिन नवरात्रि भक्तों के लिए अत्यंत विशेष और फलदायी है। सौभाग्य योग, मृगशिरा नक्षत्र और सर्वार्थ सिद्धि योग का यह त्रिवेणी संगम इस दिन की पूजा को असाधारण बनाता है। मां कालरात्रि की विधिवत आराधना करें, राहुकाल का ध्यान रखें और शुभ मुहूर्त में अपने मनोरथ पूर्ण करें।
read more here