ऑपरेशन सिंदूर के बाद खुली पाकिस्तान की एयर डिफेंस की पोल, हाई-स्पीड मिसाइल और ड्रोन हमलों के सामने कमजोर सिस्टम; ईरान के शाहेद ड्रोन बने सबसे बड़ा खतरा
ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाक डिफेंस की कमजोरी उजागर, ईरान के ड्रोन बन सकते हैं खतरा
Pakistan air defense: ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत ने जो सटीक और तेज मिसाइल हमले किए, उन्होंने पूरी दुनिया को यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि अगर कोई और देश पाकिस्तान पर इसी तरह का हमला करे तो क्या होगा? खासकर जब सवाल ईरान का हो, जिसके पास हजारों की संख्या में सस्ते मगर घातक ड्रोन हैं। ऑपरेशन सिंदूर ने पाकिस्तान की एयर डिफेंस की असलियत दुनिया के सामने उजागर कर दी है।
Pakistan air defense: ऑपरेशन सिंदूर में कैसे फेल हुआ पाकिस्तान का डिफेंस सिस्टम
मई 2025 में हुए ऑपरेशन सिंदूर में भारतीय सेना ने ब्रह्मोस, स्कैल्प और क्रिस्टल मेज जैसी अत्याधुनिक क्रूज और बैलिस्टिक मिसाइलों का इस्तेमाल करते हुए पाकिस्तान के आतंकी ठिकानों और सैन्य एयरबेस पर सटीक प्रहार किए। पाकिस्तान के पास चीन से खरीदी गई HQ-9, LY-80 और FM-90 जैसी एयर डिफेंस मिसाइल प्रणालियां थीं, लेकिन ये सभी भारतीय हमलों के सामने बेकार साबित हुईं। ब्रह्मोस मिसाइल की रफ्तार ध्वनि की गति से तीन गुना यानी करीब 2.8 मैक है। इतनी तेज रफ्तार से आने वाली मिसाइल को रोकने का समय ही नहीं मिलता। पाकिस्तान की रडार प्रणाली इसे समय पर पकड़ नहीं पाई और जब तक पकड़ी, तब तक मिसाइल अपना निशाना भेद चुकी थी।
Pakistan air defense: ईरान के पास क्या है खतरनाक हथियार
ईरान ने पिछले कुछ वर्षों में शाहेद-136 ड्रोन की तादाद इतनी बढ़ा ली है कि यह किसी भी देश के डिफेंस सिस्टम को थका सकता है। शाहेद-136 एक कामिकाजे ड्रोन है, यानी यह उड़कर सीधे लक्ष्य से टकरा जाता है और विस्फोट कर देता है। इसकी लागत बेहद कम होती है, कुछ रिपोर्टों के मुताबिक एक ड्रोन महज 20 से 25 हजार डॉलर में तैयार हो जाता है। यूक्रेन युद्ध में रूस ने ईरान से मंगाए इन्हीं ड्रोनों का इस्तेमाल किया था और यूक्रेन की पश्चिमी देशों से मिली आधुनिक एयर डिफेंस को भी कई बार इनसे नुकसान उठाना पड़ा। अगर ईरान एक साथ 500 या 1000 शाहेद ड्रोन दागे, तो पाकिस्तान की डिफेंस प्रणाली का इंटरसेप्टर जखीरा खत्म हो जाएगा।
Pakistan air defense: पाकिस्तान की एयर डिफेंस पर ओवरलोड का खतरा
सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी एयर डिफेंस सिस्टम की एक सीमा होती है। पाकिस्तान की HQ-9 मिसाइल प्रणाली एक साथ सीमित लक्ष्यों को ही ट्रैक और नष्ट कर सकती है। इसके अलावा LY-80 मध्यम दूरी की प्रणाली है और FM-90 कम दूरी पर काम आती है। अगर एक साथ सैकड़ों ड्रोन अलग-अलग दिशाओं से हमला करें तो यह सिस्टम पूरी तरह से ओवरलोड हो जाएगा। इजरायल और ईरान के बीच हुई झड़पों में यह साबित हो चुका है कि भले ही आयरन डोम जैसी मजबूत प्रणाली हो, सैकड़ों ड्रोन और मिसाइलें एक साथ आएं तो कुछ न कुछ आगे निकल ही जाती हैं। पाकिस्तान की डिफेंस क्षमता इजरायल से कहीं कमजोर है।
Pakistan air defense: सस्ते ड्रोन बनाम महंगे इंटरसेप्टर की जंग
आधुनिक युद्ध में अब एक नई रणनीति सामने आई है जिसे ‘ड्रोन स्वार्म अटैक’ कहते हैं। इसमें सस्ते ड्रोनों की भारी तादाद दुश्मन के महंगे डिफेंस सिस्टम पर हमला करती है। एक शाहेद ड्रोन की कीमत जहां लाखों रुपये है, वहीं इसे रोकने वाली एक इंटरसेप्टर मिसाइल की कीमत करोड़ों रुपये होती है। इस तरह दुश्मन को आर्थिक और सामरिक दोनों मोर्चों पर नुकसान होता है। ईरान के पास इस वक्त अनुमानित तौर पर हजारों की संख्या में शाहेद ड्रोन का जखीरा है। अगर वो पाकिस्तान पर 2000 से 3000 ड्रोन का हमला बोले, तो पाकिस्तान के इंटरसेप्टर जल्दी ही खत्म हो जाएंगे और बचे हुए ड्रोन अपने लक्ष्य तक पहुंचकर भारी तबाही मचाएंगे।
Pakistan air defense: पाकिस्तान और ईरान के बीच तनाव की असल वजह
पाकिस्तान और ईरान के संबंध हमेशा उतार-चढ़ाव भरे रहे हैं। बलूचिस्तान सीमा पर आतंकी गतिविधियां, शिया-सुन्नी तनाव और ईरान पर अमेरिकी दबाव के चलते पाकिस्तान का झुकाव इन मामलों में हमेशा पेचीदा रहा है। जनवरी 2024 में ईरान ने पाकिस्तान की सीमा में घुसकर एयर स्ट्राइक की थी, जिस पर पाकिस्तान ने जवाबी कार्रवाई भी की थी। इस घटना ने यह साबित कर दिया कि दोनों देशों के बीच सैन्य टकराव की आशंका शून्य नहीं है। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार अगर ईरान और पाकिस्तान के बीच कभी पूर्ण युद्ध हुआ तो ईरान की सबसे बड़ी ताकत उसके ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइलें होंगी।
Pakistan air defense: ऑपरेशन सिंदूर ने दिए क्या सबक
ऑपरेशन सिंदूर एक अहम सैन्य सबक है। इससे साफ हो गया कि अगर हमलावर हाई-स्पीड मिसाइल या भारी तादाद में ड्रोन का इस्तेमाल करे तो पाकिस्तान का मौजूदा डिफेंस सिस्टम उसे नहीं रोक पाएगा। पाकिस्तान को अपनी वायु सुरक्षा को आधुनिक बनाने के लिए भारी निवेश की जरूरत है, लेकिन उसकी आर्थिक हालत ऐसी नहीं है कि वो जल्द ऐसा कर सके। संक्षेप में कहें तो ऑपरेशन सिंदूर ने पाकिस्तान की एयर डिफेंस की कमजोरी उजागर कर दी है और ईरान जैसे देश के लिए यह एक बड़ी खिड़की खोल दी है। ड्रोन युद्ध के इस नए दौर में पाकिस्तानी सेना के पास कोई ठोस जवाब नहीं है।
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