100 डॉलर पार हुआ कच्चा तेल तो पाकिस्तान के उड़े होश, IMF के आगे फैलाए हाथ!
कच्चा तेल 118$ पार, पाकिस्तान पर मासिक 600 मिलियन $ बोझ, पेट्रोल-डीजल 55 रुपये महंगा, IMF से पेट्रोलियम लेवी में राहत की गुहार
Pakistan economic crisis: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें आसमान छूने लगी हैं और इसका सबसे बुरा असर पड़ोसी देश पाकिस्तान पर देखने को मिल रहा है। एक तरफ जहां ब्रेंट क्रूड और WTI क्रूड दोनों 118 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गए हैं, वहीं पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था इस झटके से बुरी तरह डगमगा गई है। हालात इतने खराब हो गए कि पाकिस्तान सरकार को अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष यानी IMF के सामने राहत की गुहार लगानी पड़ी। पाकिस्तान के वित्त मंत्री और पेट्रोलियम मंत्री दोनों ने माना है कि देश पर आर्थिक संकट के बादल गहरे हो रहे हैं।
Pakistan economic crisis: 118 डॉलर के पार पहुंचा कच्चा तेल, दुनिया में हड़कंप
सोमवार को वैश्विक तेल बाजार में जो हुआ उसने पूरी दुनिया को चौंका दिया। इंटरनेशनल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 118.22 डॉलर प्रति बैरल पर जा पहुंचा। इसके साथ ही WTI क्रूड ऑयल भी शुक्रवार के 90.90 डॉलर के बंद भाव की तुलना में लगभग 30 प्रतिशत की भारी उछाल के साथ 118.21 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करने लगा। यह उछाल महज एक दिन में आई, जो बताती है कि बाजार में कितनी घबराहट है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह तेजी मिडल ईस्ट में जारी संघर्ष के चलते एनर्जी सप्लाई और शिपिंग रूट में संभावित बाधाओं की आशंका का नतीजा है।
Pakistan economic crisis: पाकिस्तान पर हर महीने 600 मिलियन डॉलर का अतिरिक्त बोझ
पाकिस्तान के वित्त मंत्री मोहम्मद औरंगजेब ने रविवार को एक बड़ा खुलासा किया। उन्होंने बताया कि अगर पश्चिम एशिया में यह तनाव इसी तरह बना रहा तो पाकिस्तान का मासिक तेल आयात बिल 600 मिलियन डॉलर तक बढ़ सकता है। यह रकम पाकिस्तान जैसे पहले से कंगाली की कगार पर खड़े देश के लिए बेहद भारी है। वित्त मंत्री ने स्वीकार किया कि सरकार कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के वित्तीय प्रभाव को संभालने के लिए इमरजेंसी योजना बना रही है। पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पहले से ही IMF के कर्ज पर निर्भर है और विदेशी मुद्रा भंडार बेहद कम स्तर पर बना हुआ है।
Pakistan economic crisis: IMF के आगे झुका पाकिस्तान, पेट्रोलियम लेवी पर मांगी राहत
हालात से घबराई पाकिस्तान सरकार ने IMF के पास पहुंचकर पेट्रोलियम लेवी में राहत देने की अपील की है। पेट्रोलियम मंत्री अली परवेज मलिक ने इस बात की पुष्टि की है। दरअसल, IMF ने पाकिस्तान को जो कर्ज दिया है उसकी शर्तों में पेट्रोलियम लेवी से जुड़े कड़े प्रावधान शामिल हैं। अब पाकिस्तान चाहता है कि इन शर्तों में कुछ ढील दी जाए ताकि आम जनता पर तेल की बढ़ती कीमतों का असर थोड़ा कम किया जा सके। हालांकि IMF आमतौर पर ऐसी रियायतें देने में आनाकानी करता है क्योंकि उसकी शर्तें ही कर्ज देने की आधारशिला होती हैं।
Pakistan economic crisis: पेट्रोल और डीजल 55 रुपये प्रति लीटर महंगा, जनता बेहाल
इससे पहले पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच पाकिस्तान सरकार ने 7 मार्च को पेट्रोल और डीजल दोनों की कीमतों में 55 रुपये प्रति लीटर की भारी बढ़ोतरी कर दी। यह बढ़ोतरी पाकिस्तान की जनता के लिए किसी झटके से कम नहीं थी। वैसे भी पाकिस्तान में महंगाई दर पहले से बहुत ऊंचे स्तर पर बनी हुई है और आम आदमी की क्रय शक्ति लगातार घटती जा रही है। तेल की कीमतों में इस तरह की भारी बढ़ोतरी से न केवल ट्रांसपोर्ट महंगा होगा बल्कि खाने पीने की चीजों से लेकर दैनिक उपयोग की हर वस्तु के दाम बढ़ेंगे।
Pakistan economic crisis: LNG सप्लाई भी खतरे में, वैकल्पिक रूट की तलाश
पेट्रोलियम मंत्री अली परवेज मलिक ने बताया कि सोमवार को तीन पेट्रोलियम शिपमेंट के आने की उम्मीद थी, जिससे कुछ राहत मिलने की संभावना है। लेकिन उन्होंने साथ ही यह भी चेताया कि LNG यानी तरलीकृत प्राकृतिक गैस की सप्लाई में रुकावट एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। LNG पाकिस्तान की बिजली उत्पादन में अहम भूमिका निभाता है और इसकी सप्लाई बाधित होने से बिजली संकट गहरा सकता है। इस स्थिति से निपटने के लिए पाकिस्तान होर्मुज स्ट्रेट के आगे वैकल्पिक समुद्री मार्ग तलाश कर रहा है। इसके लिए ओमान, सउदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात के साथ बातचीत चल रही है।
Pakistan economic crisis: फ्यूल बचत के उपाय अपनाने की अपील
पेट्रोलियम मंत्री ने देशवासियों से ईंधन बचाने के उपाय अपनाने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि इस संकट की घड़ी में हर नागरिक को जिम्मेदारी से काम लेना होगा और अनावश्यक ईंधन खपत से बचना होगा। सरकार इस्लामाबाद के विदेशी मुद्रा भंडार को संरक्षित रखने की हर संभव कोशिश कर रही है। कुल मिलाकर देखें तो पाकिस्तान इस वक्त चारों तरफ से आर्थिक संकट में घिरा हुआ है। एक तरफ कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतें हैं, दूसरी तरफ IMF की सख्त शर्तें हैं, तीसरी तरफ विदेशी मुद्रा भंडार की कमी है और चौथी तरफ घरेलू महंगाई की मार है।
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