Operation Kiya: जम्मू-कश्मीर के बसंतगढ़ में सुरक्षा बलों की बड़ी कामयाबी – दो आतंकवादी ढेर, जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े थे आतंकी, जानें पूरा ऑपरेशन

बसंतगढ़ में भारतीय सेना, J&K पुलिस और CRPF की संयुक्त कार्रवाई। जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े 2 आतंकवादी मारे गए, कोई जवान शहीद नहीं

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Operation Kiya: जम्मू-कश्मीर के बसंतगढ़ क्षेत्र में सुरक्षा बलों ने आतंकवाद के खिलाफ बड़ी कामयाबी हासिल की है। ‘ऑपरेशन किया’ (Operation Kiya) के तहत बुधवार, 4 फरवरी 2026 को भारतीय सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और CRPF की संयुक्त टीम ने रामनगर क्षेत्र के जाफ्फेर जंगल में चलाए गए सुनियोजित आतंकवाद विरोधी अभियान में दो आतंकवादियों को सफलतापूर्वक मार गिराया। खुफिया सूचनाओं के अनुसार, मारे गए आतंकवादियों का संबंध पाकिस्तान स्थित प्रतिबंधित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (JeM) से था। इस सफल अभियान ने अंतर-एजेंसी समन्वय, सामरिक सटीकता और उच्च स्तरीय व्यावसायिकता को उजागर किया है।

Operation Kiya: ऑपरेशन की शुरुआत – खुफिया सूचना पर कार्रवाई

यह अभियान सोमवार तड़के शुरू हुआ जब विशाल वन क्षेत्र में दो से तीन आतंकवादियों की संदिग्ध गतिविधियों की विश्वसनीय खुफिया सूचना मिली। सूचना के अनुसार ये आतंकवादी जाफ्फेर वन क्षेत्र में छिपे हुए थे और इनका कथित संबंध पाकिस्तान स्थित जैश-ए-मोहम्मद संगठन से था। जैश-ए-मोहम्मद जम्मू-कश्मीर में सक्रिय सबसे खतरनाक आतंकवादी संगठनों में से एक है और इसके आतंकियों ने अतीत में कई बड़े हमले किए हैं।

खुफिया इनपुट मिलने के तुरंत बाद सुरक्षा बलों ने तत्परता दिखाते हुए एक विस्तृत योजना तैयार की। भारतीय सेना की व्हाइट नाइट कोर की CIF डेल्टा यूनिट, जम्मू-कश्मीर पुलिस और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के जवानों ने मिलकर इस संयुक्त आतंकवाद विरोधी अभियान की योजना बनाई।

सुनियोजित घेराबंदी और सामरिक तैनाती

बुधवार को सुबह तड़के सुरक्षा बलों ने जोफर वन, बसंतगढ़ के सामान्य क्षेत्र में केंद्रित संयुक्त आतंकवाद विरोधी अभियान शुरू किया। अभियान की योजना अत्यंत सावधानीपूर्वक बनाई गई थी ताकि आतंकवादियों को भागने का कोई मौका न मिले।

अभियान की प्रमुख विशेषताएं:

  • विशाल वन क्षेत्र को पूरी तरह से घेर लिया गया

  • सभी संभावित भागने के रास्तों पर सुरक्षा बल तैनात किए गए

  • क्षेत्र पर प्रभावी नियंत्रण सुनिश्चित किया गया

  • तीनों सुरक्षा बलों के बीच निर्बाध संचार और समन्वय बनाए रखा गया

  • आधुनिक हथियारों और उपकरणों का प्रयोग किया गया

घने जंगल और पहाड़ी इलाके में तलाशी अभियान चलाया गया। सुरक्षा बलों ने हर संभावित छिपने की जगह की जांच की और धीरे-धीरे घेरे को संकुचित करते हुए आतंकवादियों को घेर लिया।

Operation Kiya: मुठभेड़ और आतंकवादियों का सफाया

जब सुरक्षा बलों ने आतंकवादियों का पता लगा लिया तो उन्हें आत्मसमर्पण करने का मौका दिया गया। हालांकि आतंकवादियों ने सुरक्षा बलों पर गोलीबारी शुरू कर दी। इसके जवाब में सुरक्षा बलों ने भी संयमित और सटीक जवाबी कार्रवाई की।

घनघोर गोलीबारी कुछ समय तक जारी रही। सुरक्षा बलों की बेहतर रणनीति, प्रशिक्षण और अनुशासन के कारण अंततः दोनों आतंकवादियों को मार गिराया गया। इस पूरी कार्रवाई में सुरक्षा बलों के किसी भी जवान को कोई चोट नहीं आई, जो इस ऑपरेशन की सफलता और व्यावसायिकता को दर्शाता है।

अंतर-एजेंसी समन्वय की मिसाल

‘ऑपरेशन किया’ की सफलता में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के बीच निर्बाध समन्वय की रही। भारतीय सेना की व्हाइट नाइट कोर की CIF डेल्टा यूनिट, जम्मू-कश्मीर पुलिस और CRPF के बीच उत्कृष्ट तालमेल देखने को मिला।

समन्वय के प्रमुख बिंदु:

  • सभी स्रोतों से प्राप्त खुफिया जानकारी का समन्वय किया गया

  • जमीनी स्तर पर एकीकृत कमांड संरचना लागू की गई

  • संयुक्त योजना और क्रियान्वयन सुनिश्चित किया गया

  • वास्तविक समय सूचना साझा करने की व्यवस्था बनाई गई

  • एक-दूसरे की ताकत का इष्टतम उपयोग किया गया

यह अभियान इस बात का उदाहरण है कि जब विभिन्न सुरक्षा एजेंसियां एकजुट होकर काम करती हैं तो आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई कितनी प्रभावी हो सकती है।

Operation Kiya: ऑपरेशन त्राशी I का जारी रहना

यह उल्लेखनीय है कि बसंतगढ़ में यह सफल ऑपरेशन उस समय हुआ जब जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले में ‘ऑपरेशन त्राशी I’ अभी भी जारी है। 18 जनवरी 2026 को शुरू हुआ यह व्यापक आतंकवाद विरोधी अभियान पिछले दो सप्ताह से अधिक समय से चल रहा है।

31 जनवरी को भारतीय सेना की व्हाइट नाइट कोर, जम्मू-कश्मीर पुलिस और CRPF ने किश्तवाड़ के डोलगाम क्षेत्र में आतंकवादियों से दोबारा संपर्क स्थापित किया था। घेराबंदी स्थापित कर दी गई और ऑपरेशन जारी रखा गया।

‘ऑपरेशन त्राशी I’ और ‘ऑपरेशन किया’ दोनों मिलकर जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के खिलाफ सुरक्षा बलों के निरंतर और समन्वित प्रयासों को दर्शाते हैं।

जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद विरोधी अभियानों का महत्व

ये सफल अभियान जम्मू-कश्मीर में शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। सुरक्षा बलों की इस तरह की सक्रिय और प्रभावी कार्रवाई से:

  • आतंकवादी गतिविधियों पर अंकुश लगता है

  • स्थानीय जनता में सुरक्षा की भावना बढ़ती है

  • आतंकवादी संगठनों की कमर टूटती है

  • युवाओं को आतंकवाद की राह पर जाने से रोका जा सकता है

  • क्षेत्र में विकास और प्रगति का माहौल बनता है

‘ऑपरेशन किया’ की सफलता एक बार फिर सिद्ध करती है कि भारतीय सुरक्षा बल आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में पूरी तरह सक्षम और प्रतिबद्ध हैं।

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