Nishant Kumar Profile,- कौन हैं निशांत कुमार जो अचानक बिहार की राजनीति में छाए? जानें पढ़ाई, परिवार, संपत्ति और JDU में ग्रैंड एंट्री की पूरी कहानी

नीतीश कुमार के इकलौते बेटे निशांत कुमार 5 मार्च 2026 को JDU में शामिल होंगे, जानें पढ़ाई, परिवार, संपत्ति और राजनीतिक एंट्री की पूरी कहानी

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Nishant Kumar Profile: बिहार की राजनीति में आज एक बड़ा और ऐतिहासिक दिन है। जहां एक तरफ 10 बार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार राज्यसभा के लिए नामांकन दाखिल कर दिल्ली की राजनीति की ओर कदम बढ़ा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ उनके इकलौते बेटे निशांत कुमार बिहार की सियासत में अपनी धमाकेदार एंट्री करने की तैयारी में हैं। करीब 50 वर्ष की उम्र में निशांत कुमार का यह राजनीतिक कदम बिहार की सियासत का सबसे बड़ा बदलाव माना जा रहा है।

Nishant Kumar Profile: कौन हैं निशांत कुमार

निशांत कुमार मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उनकी दिवंगत पत्नी मंजू सिन्हा के इकलौते पुत्र हैं। उनका जन्म 20 जुलाई 1975 को हुआ था। इस प्रकार वे अभी लगभग 50 वर्ष के हैं। उनकी माता मंजू सिन्हा का निधन वर्ष 2007 में हो गया था जो परिवार के लिए एक गहरा आघात था। निशांत कुमार अविवाहित हैं और पटना में सादगीपूर्ण जीवन व्यतीत करते हैं। वे अपने पिता के विपरीत हमेशा से सार्वजनिक जीवन और राजनीतिक मंचों से दूर रहे हैं। उनकी पहचान एक शांत, अध्यात्मिक और लो प्रोफाइल व्यक्तित्व के रूप में रही है। मुख्यमंत्री का बेटा होने के बावजूद उन्होंने कभी अपनी पहचान को लेकर शोरशराबा नहीं किया।

Nishant Kumar Profile: निशांत कुमार की शिक्षा और करियर

निशांत कुमार ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा पटना के प्रतिष्ठित सेंट करेन स्कूल से प्राप्त की। इसके बाद उच्च माध्यमिक शिक्षा के लिए उन्होंने मसूरी के मानव भारती इंटरनेशनल स्कूल में दाखिला लिया जो उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्र में स्थित एक प्रतिष्ठित आवासीय विद्यालय है। उच्च शिक्षा के लिए निशांत ने झारखंड के रांची स्थित बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी यानी BIT मेसरा में दाखिला लिया जो देश के सबसे प्रतिष्ठित तकनीकी संस्थानों में से एक है। यहां से उन्होंने सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग में डिग्री हासिल की। अपने पिता नीतीश कुमार भी इंजीनियरिंग के छात्र रहे हैं और निशांत ने भी उसी परंपरा को आगे बढ़ाया।

Nishant Kumar Profile: राजनीति से क्यों दूर रहे निशांत

यह एक स्वाभाविक सवाल है कि इतने बड़े राजनीतिक घराने का बेटा होने के बावजूद निशांत कुमार इतने वर्षों तक राजनीति से दूर क्यों रहे। इसका जवाब उनके स्वभाव और रुचियों में छुपा है। जानकारों के मुताबिक निशांत को अध्यात्म और शांत जीवनशैली पसंद है। वे राजनीति की चमक-धमक और भाषणबाजी से हमेशा दूर रहे। नीतीश कुमार ने भी कभी अपने बेटे पर राजनीति में आने का दबाव नहीं डाला। वे स्वयं एक कर्मठ और जमीनी राजनेता हैं और उन्होंने हमेशा अपने परिवार को राजनीतिक विरासत से अलग रखा। लेकिन अब परिस्थितियां बदल रही हैं। नीतीश कुमार के दिल्ली जाने के बाद बिहार में नेतृत्व का सवाल उठ रहा है।

Nishant Kumar Profile: JDU नेताओं की लंबे समय से थी मांग

बिहार सरकार के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री जमा खान सहित जदयू के कई वरिष्ठ नेता लंबे समय से निशांत कुमार को पार्टी में लाने की मांग करते रहे हैं। पार्टी कार्यकर्ताओं का मानना है कि नीतीश कुमार की विरासत को आगे ले जाने के लिए उनके बेटे का पार्टी में होना जरूरी है। बिहार में 2025 के विधानसभा चुनाव में JDU की सफलता के बाद से निशांत की राजनीतिक एंट्री की चर्चाएं और तेज हो गई थीं। हाल के महीनों में निशांत ने भी कुछ राजनीतिक बयान देकर संकेत दिए कि वे अब सक्रिय जीवन की ओर बढ़ सकते हैं। अपने जन्मदिन पर उन्होंने कहा था कि उनके पिता ही मुख्यमंत्री बनेंगे और एनडीए को बहुमत मिलेगा।

Nishant Kumar Profile: 5 मार्च को JDU में ग्रैंड एंट्री

सूत्रों के मुताबिक 5 मार्च 2026 को जब नीतीश कुमार राज्यसभा के लिए नामांकन दाखिल करेंगे उसी दिन निशांत कुमार JDU की औपचारिक सदस्यता ग्रहण कर सकते हैं। पार्टी ने इसके लिए स्वागत समारोह की तैयारी भी कर ली है। यदि ऐसा होता है तो बिहार की राजनीति में यह एक युगांतरकारी घटना होगी। जहां एक तरफ नीतीश कुमार का दिल्ली प्रस्थान होगा वहीं दूसरी तरफ उनके बेटे का बिहार की राजनीति में पदार्पण होगा। यह सत्ता के एक नई पीढ़ी को हस्तांतरण का प्रतीक होगा।

Nishant Kumar Profile: निशांत कुमार की संपत्ति

निशांत कुमार बेहद सादगीपूर्ण जीवन जीने के लिए जाने जाते हैं और उन्होंने कभी सार्वजनिक रूप से अपनी संपत्ति या व्यवसाय को लेकर कोई जानकारी साझा नहीं की है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार उनकी कुल संपत्ति करोड़ों रुपये में बताई जाती है जिसमें मुख्यतः पारिवारिक संपत्ति और निवेश शामिल हैं। उनके पास कोई बड़ा कारोबार नहीं है। बिहार के सबसे प्रभावशाली राजनीतिक परिवार के वारिस होने के बावजूद उन्होंने हमेशा अपनी पहचान सादगी से ही बनाई है।

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