ईरान-अमेरिका परमाणु वार्ता का अगला दौर गुरुवार को जेनेवा में, ट्रंप की धमकी के बावजूद कूटनीति की उम्मीद बरकरार
ट्रंप की सैन्य धमकी के बावजूद ओमान की मध्यस्थता से वार्ता, परमाणु मुद्दे पर कूटनीति की उम्मीद बरकरार
Iran-US War: अमेरिका और ईरान के बीच जारी भीषण सैन्य तनाव के बीच परमाणु मुद्दे पर वार्ता का अगला महत्वपूर्ण दौर गुरुवार, 27 फरवरी 2026 को जेनेवा में आयोजित होगा। ओमान के विदेश मंत्री बद्र अल-बुसैदी ने रविवार को इसकी आधिकारिक पुष्टि की। यह वार्ता ऐसे समय हो रही है जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी थी कि यदि कूटनीति विफल रही तो ईरान के खिलाफ सीमित सैन्य हमले संभव हैं।
Iran-US War: ओमान की मध्यस्थता से आगे बढ़ी वार्ता
खाड़ी क्षेत्र का छोटा लेकिन कूटनीतिक रूप से महत्वपूर्ण देश ओमान पिछले कई दशकों से अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाता रहा है।
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पुष्टि: ओमान के विदेश मंत्री बद्र अल-बुसैदी ने सोशल मीडिया पर लिखा कि वार्ता का अगला दौर गुरुवार को जेनेवा में होगा।
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भूमिका: चूंकि अमेरिका और ईरान के बीच कोई सीधा राजनयिक संबंध नहीं है, इसलिए ओमान जैसे तटस्थ देशों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है।
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दृष्टिकोण: ओमान के सुल्तान हैथम बिन तारिक अल सैद ने व्यक्तिगत रूप से इस मध्यस्थता में रुचि ली है क्योंकि वे क्षेत्रीय स्थिरता को आवश्यक मानते हैं।
ईरान की स्थिति: कूटनीति की उम्मीद बरकरार
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने परमाणु मुद्दे पर कूटनीतिक समाधान की “अच्छी संभावना” व्यक्त की है।
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मुख्य बिंदु: अराघची ने स्पष्ट किया कि वार्ता में केवल परमाणु मुद्दा ही चर्चा का विषय है।
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अधिकार: ईरानी विदेश मंत्री ने साफ कर दिया कि तेहरान अपने यूरेनियम संवर्धन के अधिकार से समझौता नहीं करेगा।
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दृढ़ता: अराघची ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, “क्या आप जानना चाहते हैं कि हम आत्मसमर्पण क्यों नहीं करते? क्योंकि हम ईरानी हैं।”
Iran-US War: राष्ट्रपति पेजेश्कियन का संतुलित बयान
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने ओमान की पुष्टि के बाद एक महत्वपूर्ण बयान जारी किया:
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प्रतिबद्धता: “हम कूटनीति के मार्ग पर आगे बढ़ने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”
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तैयारी: “हमने किसी भी संभावित परिदृश्य के लिए सभी आवश्यक तैयारियां कर ली हैं।”
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चेतावनी: यदि कूटनीति विफल होती है, तो ईरान अपनी रक्षा करने में सक्षम है।
Iran-US War: अमेरिका की अड़ियल मांगें
वाशिंगटन ने स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी समझौते में निम्नलिखित शर्तें अनिवार्य हैं:
| शर्त | विवरण |
| पहली शर्त | ईरान के पास परमाणु हथियार या उन्हें बनाने की क्षमता नहीं होनी चाहिए। |
| दूसरी शर्त | ईरान को यूरेनियम संवर्धन पूरी तरह से बंद करनी होगी। |
| तीसरी शर्त | ईरान को अपने बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम को सीमित करना होगा। |
| चौथी शर्त | क्षेत्रीय सशस्त्र समूहों (जैसे हिजबुल्लाह, हमास, हौथी) से संबंध तोड़ने होंगे। |
ट्रंप की दोहरी रणनीति: वार्ता और धमकी
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को चेतावनी दी कि यदि वार्ता विफल होती है तो ईरान के खिलाफ सीमित सैन्य हमले संभव हैं।
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सैन्य उपस्थिति: ट्रंप प्रशासन ने मध्य पूर्व में दो विमानवाहक पोत समूह और हजारों अतिरिक्त सैनिक तैनात किए हैं।
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अधिकतम दबाव: विश्लेषकों का मानना है कि यह कूटनीति के साथ-साथ सैन्य खतरा बनाए रखने की “अधिकतम दबाव” की रणनीति है।
Iran-US War: 2015 के समझौते का भूत (JCPOA)
वर्तमान गतिरोध को समझने के लिए 2015 के परमाणु समझौते का संदर्भ आवश्यक है:
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सहमति: 2015 में ईरान ने यूरेनियम संवर्धन सीमित करने और अंतर्राष्ट्रीय निरीक्षण की अनुमति देने पर सहमति जताई थी।
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अमेरिकी वापसी: 2018 में राष्ट्रपति ट्रंप ने एकतरफा इस समझौते से बाहर निकलने का फैसला किया था।
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वर्तमान चुनौती: दोनों पक्षों के बीच विश्वास पूरी तरह टूट चुका है, जिसे पाटना गुरुवार की वार्ता की सबसे बड़ी चुनौती होगी।
निष्कर्ष: जेनेवा में होने वाली गुरुवार की वार्ता एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकती है। यदि दोनों पक्ष लचीलापन दिखाते हैं, तो एक समझौता संभव है जो क्षेत्रीय स्थिरता ला सकता है।
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