ब्रिटेन की राजनीति में नया मोड़: शबाना महमूद बन सकती हैं पहली मुस्लिम प्रधानमंत्री, एपस्टीन फाइल्स से हिली स्टारमर सरकार
एपस्टीन फाइल्स से हिली स्टारमर सरकार, होम सेक्रेटरी शबाना महमूद मजबूत दावेदार, मैक्सवीनी इस्तीफा
UK New Prime Minister: ब्रिटेन की राजनीति में इन दिनों भूचाल सा मचा हुआ है। अमेरिकी यौन अपराधी जेफरी एपस्टीन से जुड़ी फाइलों के नए खुलासे ने प्रधानमंत्री कीर स्टारमर की सरकार को गहरे संकट में डाल दिया है। इन फाइलों में कई बड़ी हस्तियों के नाम सामने आए हैं, जिनमें से एक नाम पूर्व राजदूत पीटर मैंडेलसन का भी है। मैंडेलसन को स्टारमर ने ही अमेरिका में ब्रिटेन का राजदूत बनाया था। इस खुलासे के बाद सत्तारूढ़ लेबर पार्टी के अंदर कोहराम मच गया है। स्टारमर के करीबी और चीफ ऑफ स्टाफ मॉर्गन मैक्सवीनी ने इस नियुक्ति की जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दे दिया है। अब पार्टी के अंदर से ही स्टारमर के इस्तीफे की मांग तेज हो गई है।
इसी राजनीतिक उथल-पुथल के बीच सबकी नजरें संभावित उत्तराधिकारियों पर टिक गई हैं। सबसे मजबूत दावेदार के रूप में सामने आ रही हैं मौजूदा होम सेक्रेटरी शबाना महमूद। अगर वे पार्टी लीडरशिप की दौड़ में सफल रहीं तो ब्रिटेन की पहली मुस्लिम महिला प्रधानमंत्री बन सकती हैं। 45 साल की शबाना लेबर पार्टी की एक उभरती हुई चेहरा हैं। उनकी सख्त छवि और इमिग्रेशन पर कड़े रुख ने उन्हें पार्टी के भीतर मजबूत स्थिति में पहुँचा दिया है।
UK New Prime Minister: शबाना महमूद का सफर, पाकिस्तान मूल की बेटी से होम सेक्रेटरी तक
शबाना महमूद का जन्म 1980 में बर्मिंघम में हुआ था। उनका परिवार पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के मीरपुर से ताल्लुक रखता है। उन्होंने बचपन का कुछ समय सऊदी अरब में भी बिताया। शबाना ने ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित लिंकन कॉलेज से कानून की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद वे एक सफल वकील बनीं। साल 2010 में वे ब्रिटिश संसद पहुँचने वाली पहली मुस्लिम महिला सांसद बनीं। उन्होंने बर्मिंघम लेडीवुड सीट से जीत हासिल की।
शबाना ने अपनी राजनीतिक यात्रा में लगातार प्रगति की। 2024 में वे लॉर्ड चांसलर और जस्टिस सेक्रेटरी बनीं। इस पद पर रहते हुए उन्होंने जेलों में भीड़ कम करने के लिए कैदियों की जल्दी रिहाई का कार्यक्रम लागू किया। साथ ही सिविल अशांति पर कड़ी कार्रवाई की। 2025 में उन्हें होम सेक्रेटरी का महत्वपूर्ण पद सौंपा गया। होम सेक्रेटरी के तौर पर उन्होंने इमिग्रेशन नीति पर बहुत सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने पुलिसिंग में ब्रिटेन की सबसे बड़ी लाइव फेशियल रिकग्निशन तकनीक को आगे बढ़ाया।
UK New Prime Minister: इमिग्रेशन पर सख्त रवैया
शबाना महमूद का इमिग्रेशन को लेकर रुख काफी कड़ा है। उन्होंने अवैध प्रवास पर लगाम लगाने के लिए कई सख्त कदम उठाए हैं। उनका कहना है कि ब्रिटेन की सीमाओं की रक्षा और कानून का पालन होना जरूरी है। उन्होंने अवैध प्रवासियों के खिलाफ कार्रवाई तेज करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही वैध तरीके से आने वाले प्रवासियों के लिए पारदर्शी नीति बनाने पर जोर दिया है। उनका यह रुख पार्टी के कई पारंपरिक वोटरों को भले ही पसंद न आए, लेकिन युवा और मध्यम वर्ग में काफी लोकप्रिय हो रहा है।
UK New Prime Minister: एपस्टीन फाइल्स से स्टारमर सरकार पर संकट
एपस्टीन फाइल्स के नए खुलासे ने ब्रिटेन की राजनीति को हिला कर रख दिया है। इन फाइलों में कई प्रभावशाली लोगों के नाम शामिल हैं। पीटर मैंडेलसन का नाम सबसे चर्चा में रहा क्योंकि स्टारमर ने ही उन्हें अमेरिका में राजदूत बनाया था। इस नियुक्ति को लेकर अब सवाल उठ रहे हैं कि स्टारमर को मैंडेलसन के एपस्टीन से संबंधों की जानकारी थी या नहीं।
मैक्सवीनी के इस्तीफे के बाद लेबर पार्टी में असंतोष बढ़ गया है। कई सांसद और कार्यकर्ता स्टारमर के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। पार्टी के भीतर यह बहस तेज हो गई है कि क्या स्टारमर के नेतृत्व में पार्टी चुनाव जीत सकती है या नया चेहरा लाना बेहतर होगा। ऐसे में शबाना महमूद का नाम सबसे मजबूत दावेदार के रूप में सामने आ रहा है। उनकी सख्त छवि, कानूनी पृष्ठभूमि और अल्पसंख्यक समुदाय से जुड़ाव उन्हें पार्टी के लिए मजबूत विकल्प बनाता है।
UK New Prime Minister: ब्रिटेन में पहली मुस्लिम प्रधानमंत्री की संभावना
अगर शबाना महमूद लेबर पार्टी की कमान संभाल लेती हैं और पार्टी चुनाव जीतती है तो वे ब्रिटेन की पहली मुस्लिम प्रधानमंत्री बनेंगी। यह ब्रिटिश इतिहास में एक ऐतिहासिक कदम होगा। शबाना का जन्म ब्रिटेन में हुआ, लेकिन उनका परिवार पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर से है। उनकी सफलता न सिर्फ मुस्लिम समुदाय के लिए बल्कि पूरे ब्रिटेन के लिए प्रेरणादायक होगी।
वर्तमान में ब्रिटेन की राजनीति में यह संकट गहराता जा रहा है। स्टारमर सरकार पर दबाव बढ़ रहा है। एपस्टीन फाइल्स के खुलासे ने कई बड़े सवाल खड़े किए हैं। आने वाले दिनों में देखना होगा कि लेबर पार्टी इस संकट से कैसे उबरती है और क्या शबाना महमूद जैसा नया चेहरा पार्टी की कमान संभालता है।
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