NSE IPO की लिस्टिंग में नई अड़चन! दिल्ली हाई कोर्ट में SEBI की NOC को चुनौती, पूर्व न्यायिक अधिकारी ने CAA उल्लंघन का लगाया आरोप

पूर्व न्यायिक अधिकारी ने SEBI की NOC को चुनौती दी, CAA उल्लंघन का आरोप, IPO की राह में कानूनी अड़चन

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NSE IPO: भारत के सबसे बड़े स्टॉक मार्केट एक्सचेंज, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया (NSE) की बहुप्रतीक्षित लिस्टिंग में एक बार फिर नई रुकावट आ गई है। अब एक बार फिर NSE के प्रस्तावित इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) के लिए सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) की तरफ से जारी किए गए नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) को चुनौती देते हुए दिल्ली हाई कोर्ट में एक रिट पिटीशन दाखिल की गई है।

NSE IPO: याचिका और याचिकाकर्ता की जानकारी

  • किसने दाखिल की: नई दिल्ली के रहने वाले 72 वर्षीय पूर्व न्यायिक अधिकारी केसी अग्रवाल ने 10 फरवरी 2026 को यह याचिका दायर की है।

  • चुनौती: याचिका में SEBI द्वारा 30 जनवरी को NSE को दी गई मंजूरी पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं।

  • सुनवाई की उम्मीद: दिल्ली हाई कोर्ट के सोमवार या इस हफ्ते के अंत में इस मामले पर सुनवाई करने की उम्मीद है।

NSE IPO: NSE की लिस्टिंग में देरी के मुख्य कारण

NSE 2016 से पब्लिक होने की कोशिश कर रहा है, लेकिन बार-बार इन विवादों ने इसकी योजना को रोक रखा है:

  1. को-लोकेशन स्कैम: 2015-16 में ब्रोकरों को तेज ट्रेडिंग एक्सेस मिलने का मामला।

  2. SEBI की जांच: गहन जांच और अधिकारियों के खिलाफ हुई कार्रवाई।

  3. रेगुलेटरी मंजूरी: विभिन्न तकनीकी और रेगुलेटरी मुद्दों के कारण होने वाली देरी।

NSE IPO: याचिका में लगाए गए मुख्य आरोप

केसी अग्रवाल की याचिका में SEBI के कॉर्पोरेट एक्शन एडजस्टमेंट (CAA) फ्रेमवर्क पर फोकस किया गया है:

  • वैल्यू न्यूट्रैलिटी का उल्लंघन: इस फ्रेमवर्क का उद्देश्य बोनस इश्यू या डिविडेंड के दौरान ट्रेडर्स की आर्थिक स्थिति को “न्यूट्रल” रखना है।

  • अवैध डेबिट का आरोप: अग्रवाल का आरोप है कि NSE ने प्राइस और क्वांटिटी दोनों को एडजस्ट करने के बजाय सिर्फ प्राइस बदले और ट्रेडर्स के अकाउंट से सीधे डिविडेंड के बराबर राशि डेबिट कर ली।

  • कानूनी तर्क: याचिका के अनुसार, “डिविडेंड सिर्फ शेयरहोल्डर्स के होते हैं, डेरिवेटिव्स ट्रेडर्स के नहीं।” इसलिए यह डेबिट कानून के खिलाफ है।

NSE IPO: पारदर्शिता और सूचना का अभाव

अग्रवाल ने यह भी आरोप लगाया कि प्रणाली में पारदर्शिता की कमी है:

  • शिकायतों की अनदेखी: NSE ने उनकी शिकायतों को बिना उचित सुनवाई के बंद कर दिया और SEBI ने भी स्वतंत्र समीक्षा नहीं की।

  • RTI आवेदनों को खारिज करना: डेबिट किए गए फंड्स की जानकारी मांगने के लिए किए गए RTI आवेदनों को बार-बार खारिज कर दिया गया।

  • प्रतिक्रिया का अभाव: जनवरी 2026 तक SEBI की चेयरपर्सन को भेजे गए ईमेल का भी कोई जवाब नहीं मिला।

 NSE IPO का महत्व और भविष्य

  • महत्व: सार्वजनिक कंपनी होने से NSE में अधिक पारदर्शिता और बेहतर गवर्नेंस आने की उम्मीद है।

  • अनुमानित साइज: विशेषज्ञों का मानना है कि यह IPO 10,000 करोड़ रुपये से अधिक का हो सकता है।

आगे क्या होगा? दिल्ली हाई कोर्ट के पास याचिका को खारिज करने, SEBI/NSE से जवाब मांगने या IPO प्रक्रिया पर अस्थायी रोक लगाने जैसे विकल्प हैं। NSE और SEBI की तरफ से अभी तक इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

डिस्क्लेमर: यह एक समाचार लेख है, निवेश की सलाह नहीं। स्टॉक मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेश करने से पहले किसी प्रमाणित निवेश सलाहकार से परामर्श अवश्य करें।

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