राज्यसभा चुनाव 2026 में एनडीए का दबदबा! 37 में से 22 सीटें जीतकर बढ़ाया संख्याबल, कांग्रेस को सिर्फ 6 सीटें; बिहार, हरियाणा और ओडिशा में विपक्षी रणनीति हुई फेल

37 सीटों में NDA को 22, कांग्रेस को 6 सीटें; कई राज्यों में विपक्ष को झटका

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Rajya Sabha elections 2026: भारतीय लोकतंत्र के उच्च सदन की दिशा तय करने वाले राज्यसभा चुनावों का फैसला आ गया है और इस बार सत्तापक्ष ने विपक्ष को उसी के दाँव पर मात दी है।

Rajya Sabha elections 2026: राज्यसभा चुनाव 2026 का पूरा स्कोरकार्ड क्या रहा

देश के 10 राज्यों में कुल 37 राज्यसभा सीटों पर मतदान संपन्न हुआ और नतीजों में एनडीए ने 22 सीटें अपने नाम कीं। कांग्रेस के नेतृत्व वाले विपक्षी दलों को कुल मिलाकर 15 सीटें ही मिल सकीं जिनमें से कांग्रेस को 6 सीटें प्राप्त हुईं। बीजेपी अकेले ही इस चुनाव में सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरी। उसके सहयोगी दलों के साथ मिलकर एनडीए का प्रदर्शन इस बार पिछले चुनावों से भी बेहतर रहा जो सत्तापक्ष के लिए एक बड़ी राजनीतिक उपलब्धि है।

Rajya Sabha elections 2026: बिहार में तेजस्वी और ओवैसी का गठजोड़ क्यों नहीं चला

बिहार की राज्यसभा सीटों पर विपक्षी खेमे ने एक असामान्य राजनीतिक प्रयोग किया। राजद नेता तेजस्वी यादव ने एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी से हाथ मिलाया लेकिन यह गठजोड़ बीजेपी की रणनीतिक बढ़त के आगे टिक नहीं सका। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार बीजेपी ने बिहार में अपने विधायकों को एकजुट रखते हुए वोटों का कुशल प्रबंधन किया। जेडीयू और अन्य सहयोगी दलों के समर्थन से एनडीए ने बिहार में अपेक्षित सीटें जीतने में सफलता हासिल की।

Rajya Sabha elections 2026: ओडिशा में कांग्रेस और बीजेडी मिलकर भी क्यों हारे

ओडिशा में कांग्रेस और बीजू जनता दल ने मिलकर एनडीए को चुनौती देने की कोशिश की लेकिन यह जोड़ी भी बीजेपी की रणनीति के आगे प्रभावी साबित नहीं हुई। बीजेपी ने ओडिशा में पिछले विधानसभा चुनाव में मिली बड़ी जीत के बाद राज्यसभा में भी अपनी स्थिति मजबूत कर ली। संविधान विशेषज्ञों का मानना है कि राज्यसभा चुनावों में विधानसभा की ताकत का सीधा प्रतिबिंब दिखता है और ओडिशा में बीजेपी की विधानसभा में मजबूती ही उसकी राज्यसभा जीत का आधार बनी।

Rajya Sabha elections 2026: हरियाणा में क्या हुआ और एनडीए ने कैसे बढ़त बनाई

हरियाणा में भी एनडीए ने अपने विधायकों की संख्या के अनुरूप सीटें हासिल कीं। हरियाणा विधानसभा में बीजेपी की सरकार होने के कारण राज्यसभा में भी उसकी स्थिति स्वाभाविक रूप से मजबूत थी। पिछले कुछ वर्षों में हरियाणा से राज्यसभा चुनावों में क्रॉस वोटिंग की घटनाएँ देखी गई थीं लेकिन इस बार सत्तापक्ष ने पूरी सावधानी के साथ अपने मतों का प्रबंधन किया।

Rajya Sabha elections 2026: राज्यसभा चुनाव में किस पार्टी को फायदा और किसे नुकसान हुआ

एनडीए को इस चुनाव में सबसे बड़ा फायदा हुआ। 22 सीटें जीतकर राज्यसभा में उसकी संख्या बल में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है जो महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कराने में सहायक होगी। कांग्रेस को 6 सीटें मिलीं जो उसके विधायक बल को देखते हुए संतोषजनक कही जा सकती हैं लेकिन बड़े विपक्षी दल के रूप में उसे उम्मीद से कम सफलता मिली। समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस और अन्य क्षेत्रीय दलों को भी उनके संबंधित राज्यों में प्रतिनिधित्व मिला।

Rajya Sabha elections 2026: राज्यसभा में अब सत्तापक्ष की क्या स्थिति होगी

राज्यसभा की कुल 245 सीटों में से अब एनडीए की स्थिति पहले से बेहतर हो गई है। राजनीतिक विश्लेषक प्रभात झा के अनुसार राज्यसभा में बढ़ती सत्तापक्ष की ताकत से सरकार के लिए नीतिगत और विधायी कार्यक्रमों को आगे बढ़ाना अधिक सुगम होगा। हालांकि राज्यसभा में पूर्ण बहुमत का आंकड़ा अभी भी चुनौतीपूर्ण बना हुआ है और सरकार को महत्वपूर्ण विधेयकों पर सहयोगी दलों और कुछ निर्दलीय सदस्यों के समर्थन की जरूरत बनी रहेगी।

Rajya Sabha elections 2026: राज्यसभा चुनाव की यह प्रक्रिया कैसे काम करती है

राज्यसभा के सदस्य सीधे जनता द्वारा नहीं बल्कि राज्य विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्यों द्वारा चुने जाते हैं। यही कारण है कि जिस दल का विधानसभा में जितना अधिक बहुमत होता है उसकी राज्यसभा में उतनी ही अधिक सीटें आती हैं। मतदान की प्रक्रिया में एकल हस्तांतरणीय मत प्रणाली का उपयोग होता है और प्रत्येक सीट के लिए एक निर्धारित कोटा होता है। यदि किसी उम्मीदवार को पहली गिनती में ही आवश्यक कोटा मिल जाता है तो वह निर्वाचित घोषित हो जाता है।

निष्कर्ष

राज्यसभा चुनाव 2026 के नतीजों ने एक बार फिर साबित किया है कि विधानसभाओं में जनादेश का असर सीधे उच्च सदन की बनावट पर पड़ता है। एनडीए की 22 सीटों की जीत उसके विधानसभा स्तर पर मजबूत जनाधार का प्रमाण है। विपक्षी दलों को इन नतीजों से सबक लेने की जरूरत है। गठबंधन की राजनीति तभी कारगर होती है जब उसके पीछे विधायक संख्या का ठोस आधार हो। आने वाले महीनों में बदला हुआ राज्यसभा समीकरण देश की नीति निर्माण प्रक्रिया पर गहरा असर डालेगा।

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