Mumbai: भायखला की 18 मंजिला इमारत में टूटी लिफ्ट की केबल, चौथी मंजिल से नीचे गिरा लिफ्ट का डिब्बा, पांच लोग बुरी तरह जख्मी
जय कृपा टॉवर में चौथे तल से लिफ्ट गिरा, 5 लोग गंभीर रूप से जख्मी, फायर ब्रिगेड-एम्बुलेंस ने किया रेस्क्यू
Mumbai: महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में बुधवार देर रात एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। शहर के भायखला इलाके में स्थित एक ऊंची रिहायशी इमारत में लिफ्ट का तार अचानक टूट गया, जिसके बाद लिफ्ट का डिब्बा चौथे तल से सीधा नीचे आ गिरा। इस भीषण हादसे में लिफ्ट के भीतर सवार पांच लोगों को गंभीर चोटें आई हैं और उन सभी को तत्काल विभिन्न चिकित्सालयों में दाखिल कराया गया है। इस दुर्घटना ने एक बार फिर मुंबई जैसे महानगर में बहुमंजिला इमारतों में लिफ्ट की सुरक्षा और रखरखाव को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
रात के अंधेरे में हुआ खौफनाक हादसा, पूरी इमारत में मची दहशत
यह दर्दनाक घटना बुधवार रात लगभग 10 बजे के आसपास घटी। भायखला के घोडापदेव क्रॉस लेन नंबर एक पर बनी जय कृपा टॉवर नामक ग्राउंड प्लस 18 मंजिला रिहायशी इमारत में लिफ्ट अचानक बेकाबू होकर चौथे तल से जमीन पर आ गिरी। लिफ्ट गिरने की भीषण आवाज सुनकर इमारत में रहने वाले लोगों में खलबली मच गई। निवासी अपने-अपने घरों से बाहर निकलकर दौड़ पड़े और जब उन्होंने लिफ्ट की हालत देखी तो सभी सहम गए। लिफ्ट के अंदर फंसे लोगों की चीख-पुकार से माहौल और भी भयावह हो गया था।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार लिफ्ट गिरने के तुरंत बाद इमारत के कई निवासियों ने मिलकर घायलों की मदद करने की कोशिश की और साथ ही आपातकालीन सेवाओं को सूचित किया। रात का समय होने के बावजूद स्थानीय लोगों ने बेहद तत्परता दिखाई और राहत कार्य में अपना पूरा सहयोग दिया।
Mumbai: लिफ्ट की केबल में आई खराबी बनी हादसे की मुख्य वजह
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि लिफ्ट को ऊपर-नीचे ले जाने वाले स्टील के तार यानी केबल में अचानक गड़बड़ी आ गई, जिसके चलते लिफ्ट का डिब्बा अनियंत्रित होकर नीचे की ओर गिर गया। यह अभी तक स्पष्ट नहीं हो पाया है कि केबल में यह खराबी जंग लगने, अत्यधिक भार या फिर नियमित जांच में लापरवाही के कारण आई। अधिकारियों ने बताया कि इस मामले में विस्तृत तकनीकी जांच के आदेश दिए गए हैं और लिफ्ट के रखरखाव से जुड़ी कंपनी के रिकॉर्ड की भी पड़ताल की जा रही है।
बहुमंजिला इमारतों में लिफ्ट की सुरक्षा जांच एक निश्चित अंतराल पर होनी अनिवार्य मानी जाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर समय-समय पर केबल, ब्रेकिंग सिस्टम और अन्य यांत्रिक हिस्सों की गहन जांच कराई जाए तो इस तरह के हादसों से बचा जा सकता है।
पांच घायलों को अलग-अलग अस्पतालों में कराया गया दाखिल
इस दुर्घटना में जख्मी हुए पांचों व्यक्तियों की पहचान हो चुकी है। इनमें 38 वर्षीय कल्पिता पवार, 24 वर्षीय यश बलविकर, 56 वर्षीय उषा गुप्ता, 50 वर्षीय जमुना प्रसाद शिवहरे और 54 वर्षीय शिल्पा मोरे शामिल हैं। इन पांचों को हादसे के बाद तुरंत चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई गई।
जख्मी लोगों में से तीन व्यक्तियों को सरकारी जे.जे. अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जबकि एक घायल को बालाजी अस्पताल और एक अन्य को जसलोक अस्पताल ले जाया गया। चिकित्सकों की टीम सभी घायलों का उपचार कर रही है और उनकी सेहत पर लगातार नजर रखी जा रही है। फिलहाल किसी भी घायल की हालत नाजुक नहीं बताई गई है, जो इस भीषण हादसे के बीच कुछ राहत की बात है।
Mumbai: बचाव दलों ने दिखाई गजब की फुर्ती, मिनटों में पहुंची मदद
हादसे की खबर मिलते ही सी.पी. कंट्रोल रूम को तुरंत जानकारी दी गई। इसके बाद मुंबई फायर ब्रिगेड की टीम, स्थानीय थाने के पुलिसकर्मी, 108 आपातकालीन एम्बुलेंस सेवा, बेस्ट के कर्मचारी और बीएमसी के वार्ड अधिकारी कुछ ही मिनटों में मौके पर पहुंच गए। बचाव दल ने सबसे पहले लिफ्ट के मलबे से घायलों को बेहद सावधानी के साथ बाहर निकाला और उन्हें प्राथमिक उपचार देने के बाद एम्बुलेंस के जरिए नजदीकी चिकित्सालयों में रवाना किया।
अग्निशमन विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि रात के समय इस तरह की घटना में बचाव कार्य चुनौतीपूर्ण होता है, लेकिन सभी एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल की वजह से घायलों को समय पर चिकित्सा सुविधा मुहैया कराई जा सकी। उन्होंने यह भी कहा कि इमारत की लिफ्ट को तब तक सील कर दिया गया है जब तक पूरी तकनीकी जांच पूरी नहीं हो जाती।
मुंबई में लिफ्ट हादसों का बढ़ता सिलसिला बना चिंता का विषय
मुंबई जैसे घनी आबादी वाले शहर में जहां लाखों लोग रोजाना बहुमंजिला इमारतों में लिफ्ट का इस्तेमाल करते हैं, वहां इस तरह की दुर्घटनाएं बेहद चिंताजनक हैं। पिछले कुछ वर्षों में मुंबई और आसपास के इलाकों में लिफ्ट से जुड़ी कई दुर्घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जिनमें जानमाल का नुकसान हुआ है। नगरीय प्रशासन और भवन निर्माण प्राधिकरणों पर लिफ्ट सुरक्षा मानकों को सख्ती से लागू कराने का दबाव लगातार बढ़ रहा है।
विशेषज्ञों के मुताबिक पुरानी इमारतों में लगी लिफ्ट को नियमित अंतराल पर अपग्रेड करना और हर छह महीने में अनिवार्य सुरक्षा ऑडिट कराना जरूरी है। इसके साथ ही इमारतों की सोसाइटियों और प्रबंधन समितियों को भी इस दिशा में जागरूक होना चाहिए और लिफ्ट की देखभाल में किसी भी तरह की कोताही नहीं बरतनी चाहिए।
Mumbai: प्रशासन से उठ रही सख्त कार्रवाई की मांग
इस ताजा हादसे के बाद स्थानीय नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने नगर निगम तथा संबंधित अधिकारियों से सख्त कदम उठाने की मांग की है। लोगों का कहना है कि जब तक दोषी रखरखाव एजेंसियों और इमारत प्रबंधन पर कठोर कार्रवाई नहीं होगी, तब तक ऐसी दुर्घटनाएं रुकने वाली नहीं हैं। स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भी इस मामले को गंभीरता से लेते हुए प्रशासन से जल्द से जल्द जांच पूरी कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई की मांग उठाई है।
फिलहाल पुलिस ने इस मामले में जांच शुरू कर दी है और इमारत की लिफ्ट से जुड़े सभी दस्तावेजों की पड़ताल की जा रही है। उम्मीद की जा रही है कि आने वाले दिनों में जांच रिपोर्ट के आधार पर इस हादसे के असली कारणों का खुलासा होगा और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जाएगी।
बता दें कि मुंबई में बहुमंजिला इमारतों की तादाद तेजी से बढ़ रही है और ऐसे में लिफ्ट एक जरूरी सुविधा बन चुकी है। लेकिन सुविधा तभी सुरक्षित मानी जा सकती है जब उसका उचित रखरखाव समय पर किया जाए। भायखला का यह हादसा पूरे शहर के लिए एक चेतावनी है कि लापरवाही की कीमत कभी भी किसी की जान ले सकती है।
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