मुंबई हमले का आरोपी तहव्वुर राणा,- कनाडा छीनेगा नागरिकता, PM कार्नी के भारत दौरे से पहले बड़ा कदम

26/11 मुंबई हमले के आरोपी तहव्वुर राणा ने नागरिकता के लिए गलत जानकारी दी, IRCC ने कार्रवाई शुरू की

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Tahawwur Rana:  26/11 मुंबई आतंकी हमले की साजिश में शामिल बताए जाने वाले तहव्वुर हुसैन राणा के लिए एक और बड़ी मुसीबत खड़ी हो गई है। कनाडा सरकार ने उसकी कनाडाई नागरिकता रद करने की दिशा में कदम उठाना शुरू कर दिया है। यह कार्रवाई ऐसे समय में हो रही है जब कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी जल्द ही भारत दौरे पर आने वाले हैं। इस कदम को भारत-कनाडा संबंधों को बेहतर करने की दिशा में एक संकेत के रूप में भी देखा जा रहा है।

Tahawwur Rana: कौन है तहव्वुर राणा?

तहव्वुर हुसैन राणा 64 साल का पाकिस्तान में जन्मा व्यक्ति है, जिसे वर्ष 2001 में कनाडाई नागरिकता मिली थी। वह 26/11 मुंबई हमले के मुख्य आरोपियों में से एक डेविड कोलमैन हेडली उर्फ दाऊद गिलानी का करीबी सहयोगी रहा है। हेडली ने मुंबई में हमले से पहले रेकी की थी और राणा पर आरोप है कि उसने इस पूरे नापाक मिशन में सक्रिय भूमिका निभाई थी।

राणा अप्रैल 2025 में अमेरिका से भारत लाया गया था। नई दिल्ली पहुंचते ही राष्ट्रीय जांच एजेंसी यानी NIA ने उसे गिरफ्तार कर लिया और तब से वह तिहाड़ जेल में बंद है। उस पर भारत में मुकदमा चल रहा है और NIA की जांच में उसके 26/11 हमले में गहरी संलिप्तता के कई अहम खुलासे हो चुके हैं।

Tahawwur Rana: कनाडाई नागरिकता रद करने की क्या है वजह?

कनाडा के इमिग्रेशन, रिफ्यूजी और सिटिजनशिप कनाडा यानी IRCC ने स्पष्ट किया है कि राणा की नागरिकता सीधे तौर पर आतंकवाद से जुड़े किसी आरोप के कारण नहीं, बल्कि नागरिकता आवेदन के दौरान जानबूझकर गलत जानकारी देने के आधार पर रद की जा रही है।

IRCC की जांच में यह सामने आया कि जब राणा ने वर्ष 2000 में कनाडाई नागरिकता के लिए आवेदन किया था, तब उसने दावा किया था कि वह पिछले चार वर्षों से ओटावा और टोरंटो में रह रहा है और इस दौरान केवल छह दिन ही देश से बाहर रहा है। लेकिन जांच में यह तथ्य उजागर हुआ कि राणा वास्तव में लगभग पूरा समय अमेरिका के शिकागो शहर में बिताता था, जहां उसकी कई संपत्तियां और व्यावसायिक प्रतिष्ठान थे।

IRCC ने 31 मई 2024 को राणा को भेजे एक आधिकारिक पत्र में लिखा कि उसने नागरिकता प्रक्रिया के दौरान कनाडा में अपने निवास के बारे में गलत जानकारी प्रस्तुत की और जानबूझकर अपनी कनाडा से अनुपस्थिति का उल्लेख नहीं किया। यह भी कहा गया कि इस झूठी जानकारी के आधार पर अधिकारियों को लगा कि राणा ने नागरिकता के लिए निर्धारित निवास शर्तें पूरी कर ली हैं, जबकि वास्तविकता इसके विपरीत थी।

Tahawwur Rana: 1997 में कैसे पहुंचा था कनाडा?

ग्लोबल न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, राणा 1997 में कनाडा आया था। वह 1997 से 2001 के बीच कनाडा में रहने का दावा करता रहा, लेकिन वास्तव में इस दौरान उसका अधिकांश समय शिकागो में बीता। इसी आधार पर IRCC का कहना है कि नागरिकता की शर्तों को पूरा करने के बारे में उसने गंभीर और जानबूझकर धोखाधड़ी की, जिसके कारण अधिकारियों को गलत धारणा के आधार पर निर्णय लेना पड़ा।

इससे पहले अमेरिका में भी राणा को डेनमार्क के एक अखबार के पत्रकारों पर हमले की साजिश रचने के मामले में दोषी ठहराया जा चुका है। यह तथ्य भी उसके आतंकी नेटवर्क से गहरे जुड़ाव को और स्पष्ट करता है।

Tahawwur Rana: फेडरल कोर्ट करेगी अंतिम फैसला

कनाडा सरकार ने स्पष्ट किया है कि राणा का मामला अब फेडरल कोर्ट को भेजा जा रहा है। कोर्ट यह तय करेगी कि क्या उसकी नागरिकता वास्तव में गलत जानकारी, धोखाधड़ी या जानबूझकर जरूरी तथ्यों को छिपाकर हासिल की गई थी। यदि कोर्ट ने यह माना तो राणा की कनाडाई नागरिकता औपचारिक रूप से रद कर दी जाएगी।

हालांकि राणा की ओर से टोरंटो के एक इमिग्रेशन वकील ने इस फैसले के खिलाफ अपील की है। वकील का तर्क है कि यह निर्णय गलत है और इससे राणा के कानूनी अधिकारों का हनन होता है। इस अपील पर भी फेडरल कोर्ट में सुनवाई होगी।

Tahawwur Rana: भारत-कनाडा संबंधों के लिहाज से क्यों है अहम?

हाल के वर्षों में भारत और कनाडा के बीच संबंध काफी तनावपूर्ण रहे हैं। ऐसे में प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के भारत दौरे से पहले राणा की नागरिकता रद करने की दिशा में उठाया गया यह कदम राजनयिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भारत लंबे समय से राणा को लेकर कनाडा से जवाब मांगता रहा है। इस कदम से यह संदेश जाता है कि कनाडा आतंकवाद के मामलों में भारत की चिंताओं को गंभीरता से ले रहा है।

Tahawwur Rana: NIA की जांच में क्या हुए खुलासे?

भारत में NIA की जांच में राणा के कुबूलनामे से 26/11 हमले की कई परतें उजागर हुई हैं। जांच में सामने आया है कि राणा ने हमले से पहले उत्तर से दक्षिण भारत तक कई दौरे किए थे। उसकी सक्रिय भूमिका हेडली के साथ समन्वय करने और साजिश को अंजाम देने में रही। NIA के पास उसके खिलाफ मजबूत साक्ष्य हैं और मामले में सुनवाई जारी है।

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