पूर्व थल सेनाध्यक्ष मनोज नरवणे ने तोड़ी चुप्पी, आत्मकथा विवाद पर रखा अपना पक्ष

'फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी' को लेकर मचे बवाल के बीच जनरल नरवणे ने पेंगुइन के बयान को किया शेयर

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MM Naravane: भारतीय थल सेना के पूर्व प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे की आत्मकथा ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ को लेकर देश में चल रहे विवाद के बीच अब खुद जनरल नरवणे ने अपना पक्ष सामने रखा है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर उन्होंने पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया के आधिकारिक बयान को शेयर करते हुए किताब की वर्तमान स्थिति स्पष्ट की है। यह विवाद तब शुरू हुआ जब कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने संसद में इस किताब की कथित प्रति लेकर भाजपा पर हमला बोला था। उन्होंने दावा किया था कि किताब में कुछ ऐसे खुलासे हैं जो सरकार के लिए शर्मनाक हैं। इसके जवाब में भाजपा ने कहा था कि यह किताब अभी प्रकाशित ही नहीं हुई है और राहुल गांधी गलत जानकारी फैला रहे हैं। इस पूरे प्रकरण ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी और अब स्वयं जनरल नरवणे के सामने आने से स्थिति और स्पष्ट हो गई है।

जनरल नरवणे ने क्या कहा?

पूर्व थल सेनाध्यक्ष जनरल मनोज मुकुंद नरवणे ने अपने आधिकारिक एक्स हैंडल पर पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया के बयान को शेयर किया। इस पोस्ट के साथ उन्होंने लिखा, “किताब की वर्तमान स्थिति यह है।”

यह संक्षिप्त लेकिन महत्वपूर्ण बयान स्पष्ट करता है कि जनरल नरवणे प्रकाशक के आधिकारिक बयान से सहमत हैं और वही उनकी किताब की वास्तविक स्थिति है।

यह कदम महत्वपूर्ण इसलिए भी है क्योंकि इससे पहले उन्होंने इस पूरे विवाद पर कोई सीधी टिप्पणी नहीं की थी। राजनीतिक दलों के बीच जारी बहस के बीच उनकी चुप्पी कई तरह के अटकलों को जन्म दे रही थी।

अब उनके इस स्पष्टीकरण से यह साफ हो गया है कि किताब अभी आधिकारिक रूप से प्रकाशित नहीं हुई है और जो भी प्रतियां सामने आ रही हैं, वे अनधिकृत हैं।

MM Naravane: पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया का पूरा बयान

पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया ने जो आधिकारिक बयान जारी किया था, उसमें कई महत्वपूर्ण बिंदु शामिल थे। प्रकाशक ने स्पष्ट किया कि जनरल मनोज मुकुंद नरवणे द्वारा लिखित ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ के प्रकाशन अधिकार उनके पास हैं।

बयान में कहा गया, “हालिया सार्वजनिक चर्चा और मीडिया रिपोर्टों के मद्देनजर, पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया यह स्पष्ट करना चाहता है कि भारतीय सेना के पूर्व प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे द्वारा लिखित पुस्तक ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ के प्रकाशन अधिकार हमारे पास हैं।”

सबसे महत्वपूर्ण बात यह थी कि प्रकाशक ने स्पष्ट रूप से कहा कि पुस्तक का प्रकाशन अभी तक नहीं हुआ है। उन्होंने बताया कि पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया द्वारा पुस्तक की कोई भी प्रति – मुद्रित या डिजिटल रूप में – प्रकाशित, वितरित, बेची या किसी अन्य माध्यम से जनता के लिए उपलब्ध नहीं कराई गई है।

कॉपीराइट उल्लंघन की चेतावनी

पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया ने अपने बयान में कड़ी चेतावनी भी जारी की। प्रकाशक ने कहा कि पुस्तक की कोई भी प्रति, चाहे वह पूर्ण हो या आंशिक, मुद्रित, डिजिटल, पीडीएफ या किसी अन्य प्रारूप में, ऑनलाइन या ऑफलाइन, किसी भी प्लेटफॉर्म पर प्रसारित हो रही हो, उनके कॉपीराइट का उल्लंघन है।

बयान में स्पष्ट रूप से कहा गया कि ऐसी किसी भी अनधिकृत प्रति के प्रसार को तत्काल बंद किया जाना चाहिए। प्रकाशक ने यह भी घोषणा की कि वे पुस्तक के अवैध और अनधिकृत प्रसार के विरुद्ध कानूनी रूप से उपलब्ध सभी उपायों का प्रयोग करेंगे।

यह कदम दर्शाता है कि प्रकाशक अपने बौद्धिक संपदा अधिकारों की रक्षा के लिए गंभीर है और किसी भी अनधिकृत वितरण के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेगा।

MM Naravane: राहुल गांधी का संसदीय हमला

इस पूरे विवाद की शुरुआत तब हुई जब कांग्रेस नेता राहुल गांधी संसद में इस किताब की कथित प्रति लेकर पहुंचे। उन्होंने इस किताब के हवाले से भाजपा सरकार पर कई गंभीर आरोप लगाए।

राहुल गांधी ने दावा किया कि किताब में ऐसे खुलासे हैं जो सरकार की विदेश नीति और सुरक्षा मामलों पर सवाल खड़े करते हैं। उन्होंने सदन में किताब दिखाते हुए कहा कि यह दस्तावेज सरकार की विफलताओं को उजागर करता है।

कांग्रेस नेता ने विशेष रूप से चीन सीमा विवाद और सैन्य मामलों से जुड़े कुछ अंशों का हवाला दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने संसद और देश को गुमराह किया है। यह हमला कांग्रेस की व्यापक रणनीति का हिस्सा था जिसमें वे सरकार को सुरक्षा और राष्ट्रीय हित के मुद्दों पर घेरना चाहते थे।

भाजपा का पलटवार

कांग्रेस के आरोपों के जवाब में भाजपा के शीर्ष नेताओं ने तुरंत पलटवार किया। उन्होंने राहुल गांधी पर गलत जानकारी फैलाने और देश को गुमराह करने का आरोप लगाया।

भाजपा नेताओं ने कहा कि जिस किताब का राहुल गांधी हवाला दे रहे हैं, वह अभी आधिकारिक रूप से प्रकाशित ही नहीं हुई है। उन्होंने सवाल किया कि राहुल गांधी के पास यह अप्रकाशित किताब कैसे पहुंची।

कुछ भाजपा नेताओं ने यह भी आरोप लगाया कि यह पूरा प्रकरण एक राजनीतिक साजिश हो सकता है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सेना के पूर्व प्रमुख के नाम का राजनीतिक लाभ के लिए दुरुपयोग कर रही है। भाजपा ने मांग की कि राहुल गांधी स्पष्ट करें कि उन्हें यह किताब कहां से मिली और क्या यह वास्तविक प्रति है या नकली।

MM Naravane: कानूनी और नैतिक पहलू

इस पूरे मामले में कई कानूनी और नैतिक सवाल उठते हैं। यदि किताब अभी प्रकाशित नहीं हुई है, तो इसकी प्रतियां कैसे सामने आ रही हैं? क्या यह कॉपीराइट उल्लंघन है?

एक अन्य महत्वपूर्ण सवाल यह है कि क्या एक पूर्व सेना प्रमुख की आत्मकथा को राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल करना उचित है? क्या इससे सेना की गरिमा प्रभावित नहीं होती? प्रकाशक के कड़े बयान से यह स्पष्ट है कि वे अपने कानूनी अधिकारों की रक्षा के लिए गंभीर हैं। अब देखना है कि वे किस तरह की कानूनी कार्रवाई करते हैं।

आगे क्या होगा?

अब जबकि जनरल नरवणे ने खुद स्पष्ट कर दिया है कि पेंगुइन का बयान ही किताब की वास्तविक स्थिति है, इससे राजनीतिक बहस की दिशा बदल सकती है। कांग्रेस के सामने यह सवाल खड़ा है कि उन्होंने जिस किताब का हवाला दिया, वह कहां से आई? क्या यह प्रति वास्तविक थी या नहीं?

भाजपा निश्चित रूप से इस मुद्दे को आगे बढ़ाएगी और कांग्रेस पर दबाव बनाएगी। वे यह जानना चाहेंगे कि अप्रकाशित किताब तक किसकी पहुंच थी। प्रकाशक भी अब कानूनी कदम उठा सकता है यदि उसे लगता है कि कॉपीराइट उल्लंघन हुआ है।

MM Naravane: निष्कर्ष

पूर्व थल सेनाध्यक्ष जनरल मनोज नरवणे द्वारा पेंगुइन के बयान को शेयर करना इस विवाद में एक महत्वपूर्ण मोड़ है। यह स्पष्ट हो गया है कि ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ अभी आधिकारिक रूप से प्रकाशित नहीं हुई है। इससे यह सवाल उठता है कि संसद में जो प्रति दिखाई गई, वह कहां से आई और क्या वह वास्तविक थी। यह मामला अब केवल राजनीतिक बहस तक सीमित नहीं रहा बल्कि कानूनी और नैतिक आयाम भी ले चुका है। आने वाले दिनों में इस विवाद के और भी पहलू सामने आ सकते हैं और राजनीतिक गलियारों में इसकी गूंज जारी रहेगी।

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