एमएम नरवणे की किताब लीक मामले में दिल्ली पुलिस ने खोली साजिश की परतें, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जांच तेज, रक्षा मंत्रालय की मंजूरी से पहले ही चार देशों में बिकी थी पुस्तक
रक्षा मंजूरी से पहले 4 देशों में बिकी पुस्तक, अंतरराष्ट्रीय जांच तेज, राहुल तक कैसे पहुंची
MM Naravane Book Controversy: पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे की आत्मकथा ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ के लीक होने का मामला अब एक अंतरराष्ट्रीय साजिश का रूप लेता दिख रहा है। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल द्वारा की गई प्रारंभिक जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं।
जांच में पता चला है कि इस पुस्तक को सुनियोजित तरीके से रक्षा मंत्रालय की अनिवार्य मंजूरी मिलने से पहले ही कनाडा, अमेरिका, जर्मनी और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में ऑनलाइन उपलब्ध करा दिया गया था। मंगलवार को दिल्ली पुलिस ने इस मामले में आपराधिक साजिश की धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की थी। यह कार्रवाई तब हुई जब यह सवाल उठा कि आखिर एक अप्रकाशित और अनुमोदित पुस्तक कांग्रेस नेता राहुल गांधी तक कैसे पहुंची।
MM Naravane Book Controversy: समन्वित अभियान के तहत की गई साजिश
स्पेशल सेल के सूत्रों ने बताया कि यह किसी साधारण लीक की घटना नहीं थी, बल्कि एक सुनियोजित और समन्वित अभियान के तहत पुस्तक को सार्वजनिक किया गया।
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आधिकारिक प्रक्रियाओं की अनदेखी: जांचकर्ताओं का मानना है कि रक्षा संबंधी प्रकाशनों के लिए निर्धारित आधिकारिक प्रक्रियाओं को जानबूझकर दरकिनार किया गया।
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विदेशों से शुरुआत: विशेष बात यह है कि पुस्तक का सर्कुलेशन सबसे पहले भारत में नहीं बल्कि विदेशों में शुरू हुआ। यह तथ्य जांच एजेंसियों को यह संकेत दे रहा है कि इस पूरी योजना को बेहद सोच-समझकर क्रियान्वित किया गया।
MM Naravane Book Controversy: चार देशों में फैला जांच का दायरा
दिल्ली पुलिस ने अब इस मामले की जांच का दायरा अंतरराष्ट्रीय स्तर तक विस्तारित कर दिया है।
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डिजिटल और वित्तीय पड़ताल: अमेरिका, कनाडा, जर्मनी और ऑस्ट्रेलिया में हुई डिजिटल और वित्तीय गतिविधियों की बारीकी से पड़ताल की जा रही है।
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भूमिका की जांच: यह पता लगाया जा रहा है कि पुस्तक को इन देशों में उपलब्ध कराने के लिए किन व्यक्तियों या संस्थाओं ने भूमिका निभाई। साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि क्या इस पूरी प्रक्रिया में किसी विदेशी एजेंसी या संगठन का हाथ था।
MM Naravane Book Controversy: रक्षा मंत्रालय की मंजूरी का महत्व
भारतीय सेना के किसी भी पूर्व या वर्तमान अधिकारी द्वारा लिखी गई पुस्तक को प्रकाशित करने से पहले रक्षा मंत्रालय से अनिवार्य मंजूरी लेना जरूरी है।
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सुरक्षा और गोपनीयता: यह प्रक्रिया राष्ट्रीय सुरक्षा और गोपनीय जानकारी की सुरक्षा को ध्यान में रखकर बनाई गई है।
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संवेदनशील डेटा: जनरल नरवणे की आत्मकथा में भी कई महत्वपूर्ण घटनाओं और निर्णयों का उल्लेख है। पुस्तक के समय से पहले लीक होने से यह पूरी प्रक्रिया ही प्रभावित हो गई और संभावित सुरक्षा खतरा भी पैदा हो गया।
MM Naravane Book Controversy: राहुल गांधी से संबंध और प्रकाशक की भूमिका
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राहुल गांधी तक पहुंच: जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि किन माध्यमों से और किसके द्वारा यह पुस्तक राहुल गांधी तक पहुंचाई गई, जिन्होंने संसद में इसका हवाला दिया था।
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राजनीतिक रणनीति: यह भी देखा जा रहा है कि क्या पुस्तक के कुछ अंशों को चुनिंदा तरीके से लीक करना और फिर उसका राजनीतिक इस्तेमाल करना एक सुनियोजित रणनीति का हिस्सा था।
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प्रकाशक की भूमिका: यह पता लगाया जा रहा है कि क्या प्रकाशक ने रक्षा मंत्रालय से मंजूरी मिलने से पहले ही वितरण प्रक्रिया शुरू कर दी थी। पांडुलिपि तक किन-किन लोगों की पहुंच थी, इसकी भी पूछताछ की जा रही है।
MM Naravane Book Controversy: डिजिटल फुटप्रिंट्स और अगली रणनीति
दिल्ली पुलिस की साइबर टीम डिजिटल गतिविधियों के निशानों की गहन जांच कर रही है:
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आईपी और ईमेल: यह देखा जा रहा है कि पुस्तक की डिजिटल कॉपी कब और कहां अपलोड की गई और किन आईपी एड्रेस से इसे एक्सेस किया गया।
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अंतरराष्ट्रीय सहयोग: विदेशी प्लेटफार्म्स से जानकारी प्राप्त करने के लिए कूटनीतिक चैनलों और इंटरपोल के माध्यम से भी जानकारी एकत्र की जा रही है।
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गिरफ्तारी के संकेत: दिल्ली पुलिस ने इस मामले में तेजी से कार्रवाई करने का संकेत दिया है और जल्द ही कुछ महत्वपूर्ण गिरफ्तारियां हो सकती हैं।
निष्कर्ष
यह मामला केवल एक पुस्तक के लीक होने तक सीमित नहीं है बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मुद्दा है। एक पूर्व सेनाध्यक्ष की आत्मकथा में संवेदनशील सैन्य जानकारी का बिना समीक्षा के सार्वजनिक होना देश की सुरक्षा के लिए चुनौती पैदा कर सकता है।
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