महंगाई मापने का तरीका बदला: अब OTT, ऑनलाइन शॉपिंग और ई-कॉमर्स भी होंगे शामिल, CPI की नई सीरीज लागू, आधार वर्ष 2012 से बदलकर 2024 किया गया, डिजिटल खर्च पहली बार गणना में शामिल

महंगाई गणना में आधार वर्ष 2024, डिजिटल खर्च पहली बार शामिल, खाद्य वेटेज घटा, 358 वस्तु-सेवाएं

0

CPI Inflation: देश में महंगाई मापने के तरीके में एक बड़ा और ऐतिहासिक बदलाव किया गया है। गुरुवार से खुदरा मूल्य सूचकांक यानी कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) की नई सीरीज लागू हो गई है। इस नई व्यवस्था में आधार वर्ष को 2012 से बदलकर 2024 कर दिया गया है। यह सिर्फ एक तकनीकी बदलाव नहीं है, बल्कि इसमें पिछले 12 सालों में भारतीय उपभोक्ताओं की खरीदारी और खर्च करने की आदतों में आए बड़े बदलावों को भी शामिल किया गया है।

सबसे खास बात यह है कि पहली बार ई-कॉमर्स, ऑनलाइन शॉपिंग और ओटीटी प्लेटफॉर्म की सब्सक्रिप्शन जैसे डिजिटल खर्चों को भी महंगाई की गणना में शामिल किया गया है। यह कदम भारत की बदलती अर्थव्यवस्था और डिजिटल क्रांति को दर्शाता है।

CPI Inflation: आधार वर्ष में बदलाव और इसकी जरूरत

आधार वर्ष वह संदर्भ बिंदु होता है जिससे किसी भी अर्थव्यवस्था में कीमतों में होने वाले बदलाव को मापा जाता है। भारत में 2012 के बाद पहली बार इस आधार वर्ष को अपडेट किया गया है।

  • डिजिटल क्रांति: 2012 में जहां लोग पारंपरिक बाजारों से खरीदारी करते थे, वहीं अब ऑनलाइन शॉपिंग एक आम बात हो गई है।

  • बदलती जीवनशैली: स्मार्टफोन और इंटरनेट की पहुंच बढ़ने से अब अमेजन, फ्लिपकार्ट और नेटफ्लिक्स (OTT) जैसी सेवाओं पर करोड़ों लोग खर्च करते हैं।

  • सटीक गणना: अगर महंगाई की गणना में इन नए खर्चों को शामिल नहीं किया जाता, तो वह असली तस्वीर नहीं दिखाती। इसीलिए आधार वर्ष को अपडेट करना बेहद जरूरी था।

CPI Inflation: डिजिटल युग की महंगाई: ई-कॉमर्स और OTT का समावेश

नई CPI सीरीज की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें पहली बार डिजिटल अर्थव्यवस्था से जुड़े खर्चों को शामिल किया गया है:

  • ई-कॉमर्स: अब ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर बिकने वाले सामान की कीमतें सीधे महंगाई की गणना में जोड़ी जाएंगी।

  • OTT सब्सक्रिप्शन: नेटफ्लिक्स, अमेजन प्राइम वीडियो, जियो सिनेमा, सोनी लिव जैसे प्लेटफॉर्म की सब्सक्रिप्शन फीस अब सीधे ऑनलाइन स्रोतों से जुटाई जाएगी।

  • यात्रा और संचार: हवाई किराए की कीमतें ऑनलाइन बुकिंग प्लेटफॉर्म से ली जाएंगी। टेलीफोन सेवाओं के लिए अब प्रीपेड और पोस्टपेड दोनों तरह के मोबाइल टैरिफ प्लान शामिल किए गए हैं।

CPI Inflation: बाजारों का दायरा और डेटा संग्रह

नई CPI सीरीज में डेटा संग्रह का दायरा भी काफी बढ़ाया गया है:

  • व्यापक कवरेज: अब 1,465 ग्रामीण बाजार और 1,395 शहरी बाजार इस गणना में शामिल हैं। ये बाजार देश के 434 विभिन्न कस्बों और शहरों में फैले हुए हैं।

  • ऑनलाइन मार्केट: 25 लाख से अधिक आबादी वाले 12 बड़े शहरों में 12 ऑनलाइन बाजारों को भी शामिल किया गया है।

  • साप्ताहिक डेटा: ऑनलाइन कीमतें साप्ताहिक आधार पर ली जाएंगी, क्योंकि ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर फ्लैश सेल और फेस्टिवल ऑफर के चलते कीमतें बहुत तेजी से बदलती हैं।

CPI Inflation: वस्तुओं और सेवाओं की संख्या में बड़ा इजाफा

पहले की CPI सीरीज में अखिल भारतीय स्तर पर 299 वस्तुओं और सेवाओं को शामिल किया गया था, जिसे अब बढ़ाकर 358 कर दिया गया है:

  • वस्तुएं: 259 से बढ़कर 308 हो गई हैं (स्मार्टवॉच, वायरलेस ईयरफोन, इलेक्ट्रिक वाहन आदि)।

  • सेवाएं: 40 से बढ़कर 50 हो गई हैं (ऐप-बेस्ड टैक्सी, फूड डिलीवरी, ऑनलाइन एजुकेशन आदि)।

CPI Inflation: खाने-पीने की चीजों का हिस्सा क्यों घटाया गया

नई व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण बदलाव यह है कि खाद्य और पेय पदार्थों (फूड एंड बेवरेजेस) का हिस्सा घटाकर 36.75 फीसदी कर दिया गया है (पुरानी सीरीज में यह 45 फीसदी से अधिक था)।

  • कारण: जैसे-जैसे देश विकसित होता है और लोगों की आय बढ़ती है, उनके कुल खर्च में खाने-पीने का हिस्सा सापेक्षिक रूप से घटता जाता है और अन्य चीजों जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य और मनोरंजन पर खर्च बढ़ता है। यह बदलाव इसी वास्तविकता को दर्शाता है।

CPI Inflation: महंगाई के आंकड़ों और जनता पर असर

  • महंगाई के आंकड़े: चूंकि खाद्य पदार्थों का वेटेज कम हो गया है और सेवाओं का बढ़ गया है, इसलिए अब सेवाओं की कीमतों में बदलाव का समग्र CPI पर अधिक प्रभाव दिखेगा।

  • नीति निर्धारण: आरबीआई (RBI) के लिए यह नई सीरीज मौद्रिक नीति बनाने में मददगार होगी, क्योंकि इससे अधिक सटीक और व्यापक डेटा मिलेगा।

  • आम जनता: महंगाई भत्ता (DA), वेतन संशोधन और पेंशन CPI से जुड़ी होती हैं। डिजिटल खर्च शामिल होने से सरकारी आंकड़े अब आपकी वास्तविक जीवनशैली को बेहतर तरीके से दर्शाएंगे।

निष्कर्ष

नई CPI सीरीज एक औसत तस्वीर देती है, लेकिन यह सुनिश्चित करती है कि सरकारी आंकड़े बदलती वास्तविकता के साथ तालमेल बनाए रखें। यह कदम आधुनिक भारत की उपभोग प्राथमिकताओं को मापने की दिशा में एक सही प्रयास है।

read more here

कौन हैं हुसैन उस्तारा: मुंबई अंडरवर्ल्ड का वो नाम जिसने दाऊद को भी दी थी चुनौती, शाहिद कपूर की फिल्म ‘ओ रोमियो’ ने फिर से जगाई 80 के दशक के खूंखार गैंगस्टर की यादें

बांग्लादेश में BNP की जीत पर PM मोदी ने तारिक रहमान को दी बधाई: भारत लोकतांत्रिक बांग्लादेश के साथ हमेशा खड़ा रहेगा

8 साल पुरानी साइकोलॉजिकल थ्रिलर ‘ब्रीथ’ आज भी क्यों है दर्शकों की पसंद: आर माधवन-अमित साद की दमदार जुगलबंदी

AI ने बदला मीडिया का समीकरण, समाचार वेबसाइटों पर ट्रैफिक में 770% की विस्फोटक वृद्धि, ChatGPT सबसे आगे

आपको यह भी पसंद आ सकता है
Leave A Reply

Your email address will not be published.