Mesh Sankranti 2026: सूर्य का मेष राशि में महागोचर, 14 अप्रैल को मनेगी मेष संक्रांति, जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और दान का विशेष पुण्य फल
14 अप्रैल को मेष संक्रांति, सूर्य देव की पूजा से मिलेगा पुण्य, जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और खास महत्व
Mesh Sankranti 2026: मेष संक्रांति 2026 इस बार 14 अप्रैल 2026, मंगलवार को मनाई जाएगी। यह दिन सूर्य देव के मेष राशि में प्रवेश का पवित्र अवसर है। पूरे देश में इसे अलग-अलग नामों से मनाया जाता है उड़ीसा में पणा संक्रांति, तमिलनाडु में पुथंडु, केरल में विषु, बंगाल में पोहेला बोइशाख, असम में बिहू और पंजाब में वैसाखी। मेष संक्रांति को महा विशुव संक्रांति भी कहा जाता है। इस दिन सूर्य देव की पूजा-अर्चना, स्नान-दान और तर्पण करने से विशेष फल प्राप्त होता है।
संक्रांति काल: पुण्य और महा पुण्य काल का सटीक समय
मेष संक्रांति तिथि: 14 अप्रैल 2026, मंगलवार
मेष संक्रांति का क्षण: सुबह 9:39 बजे
पुण्य काल: सुबह 5:57 बजे से दोपहर 1:55 बजे तक
महा पुण्य काल: सुबह 7:30 बजे से 11:47 बजे तक
अन्य शुभ मुहूर्त: – ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:15 से 4:58 बजे
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अभिजित मुहूर्त: दोपहर 11:52 से 12:45 बजे
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विजय मुहूर्त: दोपहर 2:31 से 3:24 बजे
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गोधूलि मुहूर्त: शाम 6:55 से 7:17 बजे
सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करना और अर्घ्य देना अत्यंत शुभ माना जाता है।
पूजा अनुष्ठान: सूर्य देव को प्रसन्न करने की विधि
मेष संक्रांति पर सूर्य देव की पूजा का विशेष महत्व है। पूजा विधि इस प्रकार है:
सुबह सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें। स्नान के बाद सूर्य देव को अर्घ्य दें। अर्घ्य के जल में लाल फूल, चावल और कुमकुम अवश्य मिलाएं। अर्घ्य देते समय “ॐ सूर्याय नमः” या “ॐ घृणि सूर्याय नमः” मंत्र का जाप करें।
इस दिन आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करना अत्यंत शुभ है। पूजा के बाद घर के मुख्य द्वार पर घी का दीपक जलाएं। भगवान विष्णु और भगवान शिव की भी पूजा करें। पूजा समाप्ति पर जरूरतमंद व्यक्ति को अन्न, वस्त्र या दक्षिणा का दान अवश्य करें।
धार्मिक मान्यताएं: सतुआ संक्रांति और पितृ तर्पण का फल
मेष संक्रांति को सतुआन या सतुआ संक्रांति भी कहा जाता है। यह दिन स्नान, दान, जप और तर्पण के लिए अत्यंत शुभ है। इस दिन पितरों का तर्पण करने से पूर्वजों की आत्मा को शांति मिलती है।
सूर्य देव मेष राशि में प्रवेश करते हैं, जिससे नई ऊर्जा और नई शुरुआत का संकेत मिलता है। कई राज्यों में इस दिन नए साल की शुरुआत मानी जाती है। फसल कटाई के बाद किसान इस दिन विशेष पूजा करते हैं।
मर्यादा और नियम: क्या सावधानी बरतें?
करें: – सूर्य देव को अर्घ्य दें और आदित्य हृदय स्तोत्र पढ़ें।
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दान-पुण्य करें, गरीबों को भोजन कराएं।
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पितरों का तर्पण करें।
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घर में घी का दीपक जलाएं।
न करें: – इस दिन झगड़ा या विवाद न करें।
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अनावश्यक खर्च से बचें।
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मांसाहार और तामसिक भोजन से दूर रहें।
ज्योतिषीय दृष्टिकोण और विशेषज्ञों की सलाह
वरिष्ठ ज्योतिषाचार्यों के अनुसार मेष संक्रांति पर सूर्य पूजा करने से सूर्य संबंधी दोष दूर होते हैं और स्वास्थ्य, सम्मान तथा धन की प्राप्ति होती है। एक प्रसिद्ध ज्योतिषी ने कहा, “इस दिन सूर्य को अर्घ्य देने से पूरे साल सूर्य की कृपा बनी रहती है। तर्पण करने से पितर प्रसन्न होते हैं।”
Mesh Sankranti 2026: सुख-समृद्धि का मार्ग
मेष संक्रांति 2026 (14 अप्रैल) सूर्य देव की कृपा प्राप्त करने का शुभ अवसर है। इस दिन सूर्य पूजा, अर्घ्य, दान और तर्पण करने से पूरे साल सुख-समृद्धि बनी रहती है। सूर्य देव को अर्घ्य दें, आदित्य हृदय स्तोत्र पढ़ें और जरूरतमंदों को दान करें। मेष संक्रांति पर किए गए पुण्य कार्य पूरे वर्ष फल देते हैं।
मेष संक्रांति 2026 की हार्दिक शुभकामनाएं। सूर्य देव की कृपा से आपके जीवन में प्रकाश, स्वास्थ्य और समृद्धि बनी रहे।
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