KGMU की मजारें नहीं हटेंगी अभी! रमजान बना ढाल, 28 फरवरी की डेडलाइन हुई बेअसर
28 फरवरी की डेडलाइन बेअसर, KGMU प्रशासन ने रमजान के कारण कार्रवाई टाली, अब ईद के बाद होगी आगे की योजना
KGMU mazar issue: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ स्थित किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी यानी KGMU में अवैध मजारों को लेकर चल रहे विवाद में एक नया मोड़ आ गया है। यूनिवर्सिटी प्रशासन ने 28 फरवरी तक मजारें हटाने की जो डेडलाइन दी थी, वह अब बेअसर हो गई है। प्रशासन ने रमजान के पवित्र महीने को देखते हुए फिलहाल किसी भी तरह की कार्रवाई न करने का फैसला लिया है।
इस फैसले से जहां एक तबके को राहत मिली है, वहीं दूसरी तरफ यह मामला एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गया है।
KGMU mazar issue: क्या था पूरा विवाद
यह मामला तब शुरू हुआ जब KGMU प्रशासन की नजर यूनिवर्सिटी परिसर में बनी उन पांच मजारों पर पड़ी जो बिना किसी अनुमति के बनाई गई थीं:
-
प्रशासन का पक्ष: प्रशासन का कहना था कि इन मजारों का निर्माण अतिक्रमण करके अवैध रूप से किया गया है।
-
अवरोध: इससे न केवल विश्वविद्यालय की संपत्ति का दुरुपयोग हो रहा है बल्कि परिसर में इलाज के लिए आने वाले मरीजों और उनके परिजनों को भी आने जाने में दिक्कत हो रही है।
-
नोटिस: यूनिवर्सिटी प्रशासन ने इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए 23 जनवरी को पांचों मजारों पर नोटिस चस्पा किया और 15 दिन के भीतर उन्हें हटाने का निर्देश दिया था।
KGMU mazar issue: दो-दो नोटिस दिए गए लेकिन मजारें नहीं हटीं
प्रशासन द्वारा दी गई समय-सीमा का विवरण इस प्रकार है:
-
पहला नोटिस: 23 जनवरी को जारी किया गया।
-
दूसरा नोटिस: मियाद पूरी होने के बाद 9 फरवरी को दूसरा नोटिस लगाया गया।
-
अंतिम तिथि: इस बार 15 दिन का अतिरिक्त समय दिया गया और यह डेडलाइन 28 फरवरी को समाप्त होनी थी।
दो-दो नोटिस जारी होने के बावजूद मजारें अपनी जगह बनी रहीं। अब जबकि 28 फरवरी की डेडलाइन नजदीक आ गई थी, तो प्रशासन ने रमजान के मद्देनजर फिलहाल कोई कार्रवाई न करने का फैसला करके इस मामले को टाल दिया है।
KGMU mazar issue: रमजान के कारण टली कार्रवाई
KGMU प्रशासन का कहना है कि इस समय रमजान का पवित्र महीना चल रहा है और इस दौरान किसी भी धार्मिक स्थल को लेकर कोई बड़ा कदम उठाना उचित नहीं होगा:
-
प्रशासनिक निर्णय: इसी सोच के साथ फिलहाल मजारें न हटाने का निर्णय लिया गया है।
-
भविष्य की योजना: प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि रमजान समाप्त होने के बाद इस मामले पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब पहले से ही इस मामले को लेकर तीखी बहस छिड़ी हुई है।
KGMU mazar issue: AIMIM ने दी थी आंदोलन की चेतावनी
जब KGMU में मजारों पर नोटिस की खबर सामने आई थी, तब राजनीतिक हलकों में विरोध तेज हो गया था:
-
कड़ा रुख: असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM ने साफ कहा था कि अगर बुलडोजर एक्शन हुआ तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा।
-
मुस्लिम संगठनों का तर्क: पार्टी और कई मुस्लिम संगठनों का तर्क था कि ये मजारें वर्षों से यहां मौजूद हैं और इन्हें हटाना धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना है।
KGMU mazar issue: क्या है कानूनी पहलू
-
अतिक्रमण: सरकारी या शैक्षणिक संस्थान की जमीन पर बिना अनुमति के किसी भी तरह का धार्मिक ढांचा खड़ा करना अतिक्रमण की श्रेणी में आता है।
-
अधिकार: KGMU की जमीन सरकारी संपत्ति है और वहां बिना प्रशासन की अनुमति के बनाई गई किसी भी संरचना को हटाने का पूरा अधिकार विश्वविद्यालय प्रशासन के पास है।
-
वैधानिक प्रक्रिया: कानूनी जानकारों का कहना है कि प्रशासन ने नोटिस देकर और समय देकर पूरी वैधानिक प्रक्रिया का पालन किया है।
KGMU mazar issue: मरीजों और परिजनों को होती है परेशानी
KGMU उत्तर प्रदेश का सबसे बड़ा और पुराना सरकारी मेडिकल संस्थान है:
-
भीड़ और आवाजाही: यहां रोजाना हजारों की संख्या में मरीज आते हैं। परिसर में जगह की कमी है और अवैध मजारें परेशानी का सबब बन जाती हैं।
-
अस्पताल कर्मियों का पक्ष: डॉक्टरों का भी कहना है कि परिसर को अतिक्रमण मुक्त रखना जरूरी है ताकि आपातकालीन स्थिति में एम्बुलेंस व अन्य वाहनों की आवाजाही निर्बाध हो सके।
KGMU mazar issue: रमजान के बाद क्या होगा?
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि रमजान खत्म होने के बाद क्या प्रशासन ठोस कदम उठाएगा:
-
अगली चुनौती: रमजान का महीना मार्च के अंत तक चलेगा, उसके बाद ईद का त्योहार आएगा। ऐसे में यह मामला कुछ और हफ्तों तक खिंच सकता है।
-
प्रतिक्रिया: कुछ हिंदूवादी संगठनों ने इस फैसले पर नाराजगी जाहिर की है और कहा है कि कानून सबके लिए एक होना चाहिए।
प्रशासन के सामने यह एक संवेदनशील मामला है जिसमें कानून, धर्म और प्रशासनिक जिम्मेदारी तीनों एक साथ उलझी हुई हैं। रमजान के बाद प्रशासन किस तरह इस पेचीदे मामले से निपटता है, यह देखना दिलचस्प होगा।
read more here
कानपुर में 103 फर्जी डिग्रियों का पर्दाफाश! 5 यूनिवर्सिटी की जांच में हुए चौंकाने वाले खुलासे