तीन दिन में शेयर बाजार में भारी तबाही, सेंसेक्स 1000 अंक से ज्यादा टूटा और निफ्टी भी लुढ़का; कच्चे तेल की कीमतों में उछाल, वैश्विक तनाव और विदेशी निवेशकों की बिकवाली से डूबे लाखों करोड़

तेल कीमतों में उछाल और FII बिकवाली से सेंसेक्स-निफ्टी में लगातार तीसरे दिन गिरावट

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Indian stock market crash: भारतीय शेयर बाजार इन दिनों भारी उथलपुथल के दौर से गुजर रहा है। 13 मार्च 2026 को लगातार तीसरे दिन बाजार में जोरदार गिरावट देखने को मिली। दोपहर करीब साढ़े बारह बजे तक बीएसई सेंसेक्स 1028 अंक से भी ज्यादा लुढ़क चुका था और 75,005 के आसपास कारोबार कर रहा था। वहीं एनएसई निफ्टी 50 भी 361 अंक की गिरावट के साथ 23,278 के स्तर पर आ गई। निवेशकों के लिए यह सप्ताह बेहद मुश्किल भरा साबित हो रहा है और बाजार से करोड़ों रुपये स्वाहा हो चुके हैं।

Indian stock market crash: कच्चे तेल की आग ने बाजार को झुलसाया

शेयर बाजार में मौजूदा गिरावट की सबसे बड़ी और तात्कालिक वजह कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी उछाल है। दरअसल मध्य पूर्व में तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। ईरान की ओर से दो तेल टैंकरों पर हमले की खबरें सामने आई हैं जिसके बाद होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते दुनिया भर में तेल आपूर्ति बाधित होने की आशंका तेज हो गई है। इसका सीधा असर अंतरराष्ट्रीय बाजार में दिखा और ब्रेंट क्रूड की कीमत उछलकर करीब 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब जा पहुंची। भारत के लिए यह खबर इसलिए और चिंताजनक है क्योंकि देश अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात से पूरा करता है। जब तेल महंगा होता है तो इसका असर सीधे कंपनियों की लागत पर पड़ता है और निवेशक घबराकर बिकवाली शुरू कर देते हैं।

Indian stock market crash: वैश्विक बाजारों से नकारात्मक संकेत

भारतीय बाजार की यह कमजोरी केवल घरेलू कारणों से नहीं है। पूरी दुनिया के शेयर बाजार इस समय दबाव में हैं। एशिया के प्रमुख बाजारों की बात करें तो जापान का निक्केई 225, चीन का एसएसई कंपोजिट और हांगकांग का हैंग सेंग इंडेक्स सभी लाल निशान पर कारोबार कर रहे हैं। ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव ने पूरे वैश्विक बाजार में डर का माहौल बना दिया है। जब दुनिया के बड़े बाजार गिरते हैं तो भारतीय बाजार भी उससे अछूता नहीं रह पाता। अमेरिकी बाजार में भी बीते सत्रों में दबाव देखा गया जिसका असर एशियाई बाजारों पर पड़ा और अंततः भारतीय बाजार भी इस चपेट में आ गया।

Indian stock market crash: FII की बिकवाली ने तोड़ी बाजार की कमर

विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी एफआईआई की लगातार बिकवाली भारतीय बाजार को कमजोर करने में बड़ी भूमिका निभा रही है। एक्सचेंज से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार गुरुवार के एक ही सत्र में विदेशी निवेशकों ने करीब 7,049 करोड़ रुपये से भी अधिक के शेयर बेच दिए। अगर मार्च महीने की बात करें तो अब तक विदेशी निवेशक कुल मिलाकर 39,000 करोड़ रुपये से भी ज्यादा की बिकवाली कर चुके हैं। यह आंकड़ा अपने आप में बहुत बड़ा है। जब इतने बड़े पैमाने पर विदेशी पैसा बाजार से निकलता है तो शेयरों पर बिकवाली का दबाव बढ़ जाता है और सूचकांक नीचे आने लगते हैं।

Indian stock market crash: रुपये की कमजोरी ने बढ़ाई चिंता

शेयर बाजार की गिरावट के साथ ही भारतीय रुपया भी दबाव में है। शुक्रवार को रुपया 12 पैसे और कमजोर होकर डॉलर के मुकाबले 92.37 के स्तर तक लुढ़क गया। यह स्तर हाल के समय के सबसे कमजोर स्तरों में गिना जा रहा है। रुपये की कमजोरी और शेयर बाजार की गिरावट एक दूसरे को प्रभावित करते हैं। जब रुपया कमजोर होता है तो आयात महंगा हो जाता है जिससे महंगाई बढ़ने का खतरा बढ़ जाता है। कच्चे तेल की ऊंची कीमतें पहले से ही देश के आयात बिल को बढ़ा रही हैं और ऊपर से कमजोर रुपया इस बोझ को और भारी बना देता है।

Indian stock market crash: निवेशक क्या करें

बाजार की इस मौजूदा स्थिति में निवेशकों के मन में घबराहट स्वाभाविक है। लेकिन विशेषज्ञों की सलाह है कि बाजार में गिरावट के दौरान घबराहट में फैसले लेना नुकसानदायक हो सकता है। लंबी अवधि के निवेशकों के लिए यह समय धैर्य रखने का है। जो निवेशक सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान यानी एसआईपी के जरिए निवेश करते हैं उन्हें अपनी निवेश यात्रा जारी रखनी चाहिए। गिरावट के समय खरीदारी का मौका होता है लेकिन यह फैसला हमेशा किसी योग्य वित्तीय सलाहकार की राय लेकर ही करना चाहिए। बाजार का यह उतार चढ़ाव अस्थायी हो सकता है लेकिन वैश्विक परिस्थितियों पर नजर रखना जरूरी है।

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