RTI में बड़ा खुलासा,- भारत के पास सिर्फ 9.5 दिन का रणनीतिक कच्चा तेल भंडार, वैश्विक तनाव के बीच बढ़ी ऊर्जा सुरक्षा की चिंता, जानें भंडारण क्षमता, जोखिम, सरकारी तैयारी और वैकल्पिक ऊर्जा विकल्प

RTI खुलासे से बढ़ी चिंता, ऊर्जा सुरक्षा पर सवाल और विकल्पों की चर्चा

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India oil reserves: जब दुनिया के कई हिस्सों में संघर्ष और युद्ध की आग धधक रही है, तब भारत की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। पेट्रोलियम और नेचुरल गैस मंत्रालय को भेजे गए एक RTI के जवाब में यह स्पष्ट किया गया है कि यदि कच्चे तेल का आयात अचानक रुक जाए, तो भारत का रणनीतिक भंडार मात्र 9.5 दिनों की आपूर्ति ही कर सकता है।

India oil reserves RTI में क्या सामने आया और इसका क्या मतलब है?

पेट्रोलियम मंत्रालय के आधिकारिक RTI जवाब के अनुसार भारत के रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार में इस समय उतना कच्चा तेल संग्रहीत है जो आयात पूरी तरह बंद होने की स्थिति में केवल 9.5 दिनों तक देश की जरूरतें पूरी कर सकता है।

यह आंकड़ा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी यानी IEA अपने सदस्य देशों को कम से कम 90 दिनों का रणनीतिक तेल भंडार रखने की सिफारिश करती है। भारत उस मानक से अभी बहुत पीछे है।

India oil reserves: भारत में रणनीतिक तेल भंडार कहां और कितना रखा गया है?

भारत में रणनीतिक कच्चे तेल के भंडारण के लिए तीन स्थानों पर भूमिगत सुविधाएं बनाई गई हैं। ये तीनों स्थान दक्षिण भारत में स्थित हैं जिनमें विशाखापत्तनम, मंगलुरु और पादुर शामिल हैं।

इन तीनों सुविधाओं को भारतीय रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार लिमिटेड यानी ISPRL संचालित करती है। इनकी कुल भंडारण क्षमता लगभग 53.3 लाख मीट्रिक टन है। हालांकि यह क्षमता देश की बढ़ती ऊर्जा मांग के अनुपात में अपर्याप्त मानी जा रही है।

India oil reserves: वैश्विक संघर्ष के बीच भारत की ऊर्जा सुरक्षा को क्या खतरा है?

मध्य पूर्व में चल रहे सैन्य संघर्ष और अमेरिका की बढ़ती सैन्य तैनाती के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर दबाव बढ़ने की आशंका बनी हुई है। भारत अपनी कुल कच्चे तेल की जरूरत का लगभग 85 प्रतिशत से अधिक हिस्सा आयात के जरिये पूरा करता है।

ऐसे में यदि समुद्री आपूर्ति मार्ग बाधित हों तो केवल 9.5 दिनों का रणनीतिक भंडार किसी भी आपात स्थिति में बहुत कम साबित हो सकता है। ऊर्जा नीति विशेषज्ञों का कहना है कि इस कमजोरी को तत्काल नीतिगत ध्यान देने की जरूरत है।

India oil reserves: विशेषज्ञ क्या कह रहे हैं और सरकार की क्या है तैयारी?

ऊर्जा विशेषज्ञों के अनुसार रणनीतिक तेल भंडार किसी भी देश की ऊर्जा संप्रभुता की पहली शर्त है। एक वरिष्ठ पेट्रोलियम विश्लेषक के अनुसार भारत को अगले तीन से पांच वर्षों में अपनी भंडारण क्षमता को कम से कम तीन गुना बढ़ाना होगा।

सरकार ने पहले ही रणनीतिक भंडार क्षमता विस्तार की योजनाओं की घोषणा की है। चंडीखोल और पादुर में नई भूमिगत सुविधाओं के निर्माण की बात चल रही है जिनसे कुल क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होने की उम्मीद है।

India oil reserves: भारत के पास क्या वैकल्पिक ऊर्जा स्रोत और विकल्प उपलब्ध हैं?

यहां एक महत्वपूर्ण बात यह है कि भारत की ऊर्जा तस्वीर केवल रणनीतिक भंडार तक सीमित नहीं है। देश में व्यावसायिक तेल भंडारण अलग से मौजूद है जो तेल कंपनियां और रिफाइनरियां अपने संचालन के लिए रखती हैं।

इसके अलावा भारत ने पिछले कुछ वर्षों में नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में जबरदस्त प्रगति की है। सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा और हाइड्रोजन ईंधन के क्षेत्र में भारत की स्थापित क्षमता तेजी से बढ़ रही है जो दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा में बड़ी भूमिका निभा सकती है।

India oil reserves: रूस से सस्ता तेल और कूटनीतिक संतुलन कैसे मदद कर रहा है?

यूक्रेन युद्ध के बाद से भारत ने रूस से रियायती दरों पर कच्चा तेल खरीदने की रणनीति अपनाई है। आंकड़ों के अनुसार भारत के तेल आयात में रूसी कच्चे तेल की हिस्सेदारी पिछले दो वर्षों में कई गुना बढ़ी है।

यह कूटनीतिक संतुलन भारत को पश्चिम एशिया की अस्थिरता से कुछ हद तक अलग रखता है। साथ ही भारत ने मध्य पूर्व, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका जैसे विविध स्रोतों से तेल आयात की नीति अपनाई है ताकि किसी एक क्षेत्र पर निर्भरता कम हो सके।

India oil reserves: आगे क्या होगा और भारत को क्या करना चाहिए?

ऊर्जा विशेषज्ञ इस बात पर एकमत हैं कि भारत को अपनी रणनीतिक तेल भंडारण क्षमता को जल्द से जल्द 30 दिनों और फिर 90 दिनों के स्तर तक ले जाने की दिशा में काम करना चाहिए।

इसके साथ ही नवीकरणीय ऊर्जा में निवेश को और तेज करना होगा ताकि कच्चे तेल पर निर्भरता धीरे धीरे कम हो सके। घरेलू तेल उत्पादन बढ़ाने के लिए ONGC और OIL जैसी कंपनियों को नए अन्वेषण क्षेत्रों में तेजी से काम करना होगा।

निष्कर्ष

RTI से मिली यह जानकारी भारत की ऊर्जा नीति की एक महत्वपूर्ण कमजोरी को उजागर करती है। केवल 9.5 दिनों का रणनीतिक तेल भंडार वैश्विक अस्थिरता के इस दौर में भारत को असुरक्षित स्थिति में रख सकता है। हालांकि यह भी उतना ही सच है कि भारत ने विविध आयात स्रोतों, रूस से सस्ते तेल और नवीकरणीय ऊर्जा में निवेश के जरिये अपनी ऊर्जा सुरक्षा को बहुआयामी बनाने की कोशिश की है। जरूरत इस बात की है कि रणनीतिक भंडार को युद्धस्तर पर बढ़ाया जाए।

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