CAG रिपोर्ट का बड़ा खुलासा,- बिहार में नाबालिगों को मिले पक्के मकान, 2.50 लाख का भुगतान भी हुआ; दिल्ली-झारखंड में हुई घरों की जियो-टैगिंग

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Bihar CAG Report: भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक यानी CAG ने बिहार में प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के क्रियान्वयन में कई चौंकाने वाली अनियमितताओं का खुलासा किया है। गुरुवार को राज्य विधानसभा में पेश की गई इस रिपोर्ट ने सरकारी तंत्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रिपोर्ट में सामने आया है कि नाबालिगों के नाम पर अनियमित रूप से पक्के मकान स्वीकृत किए गए और उन्हें 2.50 लाख रुपये का भुगतान भी किया गया। इतना ही नहीं, बिहार में बने घरों की जियो-टैगिंग दिल्ली और झारखंड जैसे दूसरे राज्यों में की गई, जो इस पूरे मामले को और भी गंभीर बनाती है।

Bihar CAG Report: क्या है प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण

प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण की शुरुआत जून 2015 में केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय द्वारा की गई थी। इस योजना का मुख्य उद्देश्य देश के ग्रामीण इलाकों में रहने वाले गरीब परिवारों को पक्के मकान उपलब्ध कराना है। योजना के तहत कच्चे घरों में रहने वाले परिवारों को स्वच्छ रसोई और बुनियादी सुविधाओं सहित पक्का मकान दिया जाता है। यह केंद्र सरकार की एक महत्वाकांक्षी और जनकल्याणकारी योजना है, लेकिन बिहार में इसके क्रियान्वयन में जो अनियमितताएं सामने आई हैं वे इस योजना की साख पर बड़ा सवाल खड़ा करती हैं।

Bihar CAG Report: नाबालिगों के नाम पर हुआ आवास पंजीकरण

CAG रिपोर्ट में सबसे चौंकाने वाला खुलासा यह है कि बिहार में नाबालिग लाभार्थियों के नाम पर आवास स्वीकृत किए गए, जो कि नियमों के सरासर विरुद्ध है। रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण में नाबालिगों के नाम पर आवास पंजीकरण या स्वीकृति का कोई प्रावधान नहीं है। नमूना जिलों के अभिलेखों की जांच के दौरान ऑडिट टीम को ऐसे मामले मिले जिनमें अपात्र लाभार्थियों को आवास स्वीकृत किए गए थे।

Bihar CAG Report: माता-पिता जीवित होने के बावजूद मिला मकान

इन चार मामलों में से दो मामले तो और भी अधिक गंभीर हैं। इन दो मामलों में नाबालिगों के माता-पिता पूरी तरह जीवित थे, यानी अनाथ बच्चे की स्थिति बिल्कुल नहीं थी, फिर भी उन्हें अनियमित रूप से पक्के मकान स्वीकृत कर दिए गए। इससे साफ संकेत मिलता है कि संबंधित लाभार्थियों की पात्रता का समुचित सत्यापन नहीं किया गया। सत्यापन प्रक्रिया में इतनी बड़ी चूक कैसे हुई, यह अपने आप में एक बड़ा सवाल है जिसका जवाब राज्य सरकार को देना होगा।

Bihar CAG Report: अपात्र नाबालिगों को 2.50 लाख रुपये का भुगतान

सिर्फ मकान स्वीकृत करना ही नहीं, बल्कि इन दो अपात्र नाबालिग लाभार्थियों को 2.50 लाख रुपये का वास्तविक भुगतान भी कर दिया गया। यह रकम सरकारी खजाने यानी जनता की गाढ़ी कमाई के पैसों से निकाली गई। CAG रिपोर्ट ने इस भुगतान को पूरी तरह अनियमित और अपात्र करार दिया है। यह मामला केवल प्रशासनिक चूक नहीं बल्कि एक संभावित वित्तीय अनियमितता की ओर भी इशारा करता है, जिसकी गहन जांच होनी चाहिए।

Bihar CAG Report: जियो-टैगिंग में हैरान करने वाली गड़बड़ी

इस रिपोर्ट में एक और अत्यंत चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है। वह है घरों की जियो-टैगिंग में बड़े पैमाने पर हुई विसंगतियां। जियो-टैगिंग एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें निर्मित मकान की वास्तविक भौगोलिक स्थिति को उपग्रह के माध्यम से डिजिटल रूप से दर्ज किया जाता है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जिस स्थान पर मकान बनाने का दावा किया गया है, वहां वास्तव में मकान बना है या नहीं। CAG की जांच में पाया गया कि 52 मामलों में घरों की जियो-टैगिंग उनके वास्तविक स्थान से काफी दूर दर्ज की गई। तीन मामले ऐसे थे जिनमें बिहार में बने घरों की जियो-टैगिंग दिल्ली और झारखंड में की गई थी।

Bihar CAG Report: यह गड़बड़ी क्यों है गंभीर

जियो-टैगिंग में इस तरह की विसंगतियां कई गंभीर सवाल खड़े करती हैं। पहला सवाल यह है कि क्या जिन मकानों की जियो-टैगिंग दिल्ली और झारखंड में हुई, वे मकान बिहार में वास्तव में बने भी हैं या नहीं। दूसरा सवाल यह है कि यदि मकान बने ही नहीं हैं तो उनके लिए जो राशि आवंटित की गई, वह कहां गई। तीसरा सवाल यह है कि क्या यह गड़बड़ी किसी तकनीकी चूक का परिणाम है या फिर यह जानबूझकर की गई धोखाधड़ी का हिस्सा है। 915 किलोमीटर की दूरी तो यह दर्शाती है कि जियो-टैगिंग पूरी तरह गलत या जानबूझकर गलत दर्ज की गई।

Bihar CAG Report: CAG रिपोर्ट की अहमियत

CAG यानी भारत का नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक एक संवैधानिक संस्था है जो केंद्र और राज्य सरकारों के खर्चों की स्वतंत्र रूप से जांच करती है। CAG की रिपोर्ट को संसद और राज्य विधानसभाओं में पेश किया जाता है। इसका उद्देश्य सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करना और जनता के पैसों के दुरुपयोग को रोकना है। बिहार में प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के संदर्भ में आई यह रिपोर्ट राज्य सरकार के लिए एक बड़ी चेतावनी है।

Bihar CAG Report: अब क्या होगा आगे

CAG रिपोर्ट विधानसभा में पेश होने के बाद अब राज्य सरकार की जवाबदेही तय होगी। विपक्षी दल इस रिपोर्ट को आधार बनाकर सरकार पर हमला बोल सकते हैं। इसके अलावा संबंधित अधिकारियों पर विभागीय कार्रवाई की मांग भी उठ सकती है। जरूरी यह है कि अपात्र नाबालिगों को किए गए 2.50 लाख रुपये के भुगतान की वसूली हो और जियो-टैगिंग में हुई गड़बड़ियों की गहन जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में ऐसी अनियमितताओं की पुनरावृत्ति न हो।

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