रेल नेटवर्क में बड़ा विस्तार,- कैबिनेट ने 9072 करोड़ की 3 रेलवे परियोजनाओं को दी मंजूरी, महाराष्ट्र-MP-बिहार-झारखंड के 8 जिलों की बदलेगी तस्वीर, 307 KM नई रेल लाइन से 98 लाख लोगों को फायदा

महाराष्ट्र-MP-बिहार-झारखंड के 8 जिलों में 307 KM नई रेल लाइन, 98 लाख लोगों को फायदा

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Railway Update: देश में रेल इंफ्रास्ट्रक्चर को और मजबूत और आधुनिक बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला लिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति ने कुल 9,072 करोड़ रुपये की लागत से तीन महत्वपूर्ण रेलवे परियोजनाओं को हरी झंडी दे दी है। इन तीन परियोजनाओं से महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, बिहार और झारखंड यानी चार राज्यों के कुल 8 जिलों में रेल कनेक्टिविटी मजबूत होगी और भारतीय रेल नेटवर्क का लगभग 307 किलोमीटर तक विस्तार होगा। इन परियोजनाओं से करीब 5,407 गांवों को बेहतर रेल संपर्क मिलेगा जहां लगभग 98 लाख की आबादी निवास करती है। यह फैसला न केवल इन राज्यों की कनेक्टिविटी बेहतर करेगा बल्कि पर्यटन, व्यापार, रोजगार और पर्यावरण सभी पर सकारात्मक असर डालेगा। आइए जानते हैं इन तीनों परियोजनाओं के बारे में विस्तार से।

Railway Update: किन तीन परियोजनाओं को मिली मंजूरी

1. गोंदिया-जबलपुर डबल लाइन (231 किलोमीटर)

तीनों परियोजनाओं में सबसे बड़ी और सबसे महत्वपूर्ण परियोजना है गोंदिया से जबलपुर के बीच 231 किलोमीटर लंबी डबल रेल लाइन बिछाने की परियोजना। इस परियोजना की कुल लागत लगभग 5,236 करोड़ रुपये है और इसे 5 साल की समयसीमा में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। यह परियोजना रणनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि यह मार्ग गोंदिया को हावड़ा-मुंबई हाई डेंसिटी नेटवर्क से जोड़ेगा और जबलपुर को इटारसी-वाराणसी रूट से जोड़ेगा। इससे महाराष्ट्र के गोंदिया और मध्य प्रदेश के जबलपुर, मंडला तथा बालाघाट जिलों के लोगों को सीधा फायदा होगा। इस डबल लाइन के बनने से इस रूट पर ट्रेनों की संख्या बढ़ेगी, देरी कम होगी और यात्रियों को बेहतर सुविधा मिलेगी।

2. पुनारख-किउल तीसरी-चौथी लाइन (50 किलोमीटर)

दूसरी महत्वपूर्ण परियोजना है बिहार में पुनारख से किउल के बीच 50 किलोमीटर लंबी तीसरी और चौथी रेल लाइन बिछाने की। इस परियोजना की कुल लागत 2,268 करोड़ रुपये है और इसे 3 साल में पूरा करने का लक्ष्य है। यह परियोजना बिहार के पटना और लखीसराय जिलों को बेहतर और मजबूत रेल कनेक्टिविटी प्रदान करेगी। इस रूट पर पहले से ही यात्री और माल ट्रेनों का काफी दबाव है। तीसरी और चौथी लाइन बनने से यह दबाव कम होगा और इस महत्वपूर्ण रूट पर रेल परिचालन और अधिक सुगम और कुशल हो जाएगा।

3. गम्हरिया-चांडिल तीसरी-चौथी लाइन (26 किलोमीटर)

तीसरी परियोजना झारखंड में गम्हरिया से चांडिल के बीच 26 किलोमीटर लंबी तीसरी और चौथी रेल लाइन बिछाने की है। इस परियोजना की लागत 1,168 करोड़ रुपये है। इस परियोजना से झारखंड के सरायकेला-खरसावां जिले को सबसे अधिक लाभ होगा। यह इलाका औद्योगिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है और यहां स्टील, कोयला और अन्य खनिजों की ढुलाई का काफी काम होता है। नई लाइनें बनने से इस क्षेत्र की माल और यात्री दोनों परिवहन की क्षमता में बड़ा इजाफा होगा।

Railway Update: 98 लाख लोगों और 5407 गांवों को होगा फायदा

सरकार के अनुसार इन तीनों मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं से लगभग 5,407 गांवों को बेहतर रेल संपर्क मिलेगा। इन गांवों में करीब 98 लाख लोगों की आबादी रहती है। इन लोगों के लिए यह परियोजनाएं जीवन को आसान बनाने वाली साबित होंगी। रेल लाइन की क्षमता बढ़ने से ट्रेनों की आवाजाही और अधिक सुगम होगी, ट्रेनें समय पर चलेंगी, देरी की समस्या कम होगी और पूरे परिचालन की दक्षता में उल्लेखनीय सुधार आएगा।

Railway Update: पर्यटन और व्यापार को मिलेगा बड़ा बढ़ावा

इन परियोजनाओं का एक और बड़ा और सकारात्मक असर पर्यटन और व्यापार पर पड़ेगा। बेहतर रेल कनेक्टिविटी से जबलपुर का प्रसिद्ध कचनार शिव मंदिर, विश्वप्रसिद्ध कान्हा नेशनल पार्क, मनमोहक धुआंधार वॉटरफॉल, चांडिल डैम और दलमा वाइल्डलाइफ सेंक्चुरी जैसे प्रमुख पर्यटन स्थलों तक पहुंचना और अधिक आसान हो जाएगा। इससे इन क्षेत्रों में पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। व्यापार की दृष्टि से भी यह मार्ग बेहद महत्वपूर्ण है। इन रूटों पर कोयला, स्टील, सीमेंट, खाद, अनाज और पेट्रोलियम उत्पादों की भारी ढुलाई होती है। क्षमता बढ़ने से अब करीब 52 मिलियन टन प्रति वर्ष अतिरिक्त माल ढुलाई संभव हो सकेगी जो देश की आर्थिक मजबूती के लिए बेहद जरूरी है।

Railway Update: पर्यावरण और रोजगार पर भी होगा सकारात्मक असर

रेल मंत्रालय ने बताया है कि ये तीनों परियोजनाएं पीएम-गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के तहत तैयार की गई हैं। इन परियोजनाओं से देश की लॉजिस्टिक्स यानी माल परिवहन की लागत में कमी आएगी। पर्यावरण की दृष्टि से भी यह परियोजनाएं बेहद लाभकारी हैं। रेल परिवहन सड़क परिवहन की तुलना में बहुत कम ईंधन खपत करता है। इन परियोजनाओं से सालाना लगभग 6 करोड़ लीटर तेल के आयात में कमी आएगी और लगभग 30 करोड़ किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड के उत्सर्जन में कमी आएगी। सरकार का कहना है कि यह कमी लगभग एक करोड़ पेड़ लगाने के बराबर पर्यावरणीय लाभ देगी। निर्माण कार्य के दौरान और बाद में इन परियोजनाओं से हजारों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर भी मिलेंगे।

कुल मिलाकर केंद्र सरकार का यह फैसला चार राज्यों के करोड़ों लोगों के जीवन को बेहतर बनाने वाला एक ऐतिहासिक कदम है।

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