Magh Purnima 2026: इस दिन दान करने से मिलता है बत्तीस गुना फल, जानें तिथि और महत्व
1 फरवरी को मनाई जाएगी, बत्तीस गुना फल देने वाली पूर्णिमा; गंगा स्नान, दान, विष्णु पूजा और व्रत का विशेष महत्व
Magh Purnima 2026: हिंदू धर्म में पूर्णिमा का विशेष महत्व माना गया है। हर महीने आने वाली पूर्णिमा का अपना अलग धार्मिक महत्व होता है। इसी कड़ी में माघ महीने में आने वाली पूर्णिमा को माघ पूर्णिमा या माघी पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है। इस साल माघ पूर्णिमा 1 फरवरी 2026 को मनाई जाएगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन स्नान दान करने से बत्तीस गुना फल मिलता है, इसलिए इसे बत्तीसी पूर्णिमा भी कहा जाता है।
माघ पूर्णिमा का निर्धारण कैसे होता है?
हिंदू पंचांग के अनुसार हर महीने की पूर्णिमा का नाम उस महीने के नाम पर ही रखा गया है। जैसे चैत्र महीने की पूर्णिमा को चैत्र पूर्णिमा और कार्तिक महीने की पूर्णिमा को कार्तिक पूर्णिमा कहते हैं। इसी तरह माघ महीने (Magh Purnima 2026) में आने वाली पूर्णिमा को माघ पूर्णिमा कहा जाता है। पंचांग और राशियों के अनुसार जब कर्क राशि में चंद्रमा और मकर राशि में सूर्य का प्रवेश होता है तो माघी पूर्णिमा का योग बनता है। नक्षत्रों में माघ नक्षत्र के नाम पर इस पूर्णिमा का नाम रखा गया है।
Magh Purnima 2026: बत्तीसी पूर्णिमा क्यों कहते हैं?

माघ पूर्णिमा को बत्तीसी पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस पूर्णिमा के दिन जो भी दान पुण्य किया जाता है, उसका फल बत्तीस गुना मिलता है। यही कारण है कि इस दिन को बत्तीसी पूर्णिमा कहा जाता है। इस दिन किया गया छोटा सा दान भी बहुत बड़ा पुण्य देता है। इसलिए धार्मिक लोग इस दिन विशेष रूप से दान करने का प्रयास करते हैं।
पुत्र और सौभाग्य प्रदान करने वाली पूर्णिमा
माघ पूर्णिमा (Magh Purnima 2026) को पुत्र और सौभाग्य देने वाली पूर्णिमा माना गया है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार इस दिन व्रत रखने और पूजा करने से व्यक्ति सभी दुखों से मुक्ति पाता है। इस पूर्णिमा के दिन विष्णु भगवान की पूजा उपासना का विशेष महत्व है। भक्तजन अच्छे फल की प्राप्ति के लिए इस दिन व्रत भी रखते हैं। माघ पूर्णिमा के दिन भगवान सत्यनारायण की कथा कराना बहुत ही शुभ और फलदायी माना जाता है। इससे घर में सुख समृद्धि आती है।
गंगा स्नान का विशेष महत्व
माघ पूर्णिमा (Magh Purnima 2026) के दिन गंगा समेत अन्य पवित्र नदियों में स्नान करने का खास महत्व है। विशेष रूप से प्रयागराज के संगम में स्नान करना अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन संगम में स्नान करने से सूर्य और चंद्रमा से संबंधित दोषों से मुक्ति मिलती है। इसलिए इस दिन को पुण्य योग भी कहा जाता है। कहा जाता है कि माघ पूर्णिमा के दिन स्वयं विष्णु भगवान प्रयाग नदी में स्नान करने आते हैं और वहां स्नान करने वाले सभी भक्तों के दुख हर लेते हैं।
गायत्री मंत्र का जाप करें
माघ पूर्णिमा (Magh Purnima 2026) के दिन स्नान करते समय गायत्री मंत्र का जाप करना बेहद फलदायी माना जाता है। धार्मिक विद्वानों के अनुसार पवित्र नदी में स्नान के समय गायत्री मंत्र का जाप करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। इसलिए माघ पूर्णिमा पर स्नान करते समय गायत्री मंत्र का जाप अवश्य करना चाहिए। यह मंत्र आध्यात्मिक और मानसिक शांति प्रदान करता है।
Magh Purnima 2026: इन चीजों का दान करना है शुभ
हिंदू पंचांग के ग्यारहवें माह यानी माघ माह में दान का विशेष महत्व होता है। माघ पूर्णिमा के दिन तिल का दान सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। तिल दान करने से शनि दोष दूर होता है और जीवन में सुख समृद्धि आती है। इसके अलावा इस दिन वस्त्र, भोजन, गुड़, कपास, घी, लड्डू, फल और अन्न का दान करना भी अत्यंत शुभ माना जाता है। जो लोग अपनी क्षमता के अनुसार इन वस्तुओं का दान करते हैं, उन्हें विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है।
मत्स्य पुराण में उल्लेख
मत्स्य पुराण में माघ पूर्णिमा के महत्व का विस्तार से वर्णन किया गया है। पुराण में कहा गया है कि माघ महीने की पूर्णिमा के शुभ दिन पर जो व्यक्ति ब्राह्मणों और गरीबों को दान करता है, उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। यह दान केवल भौतिक लाभ ही नहीं देता बल्कि आत्मिक उन्नति में भी सहायक होता है। धार्मिक ग्रंथों में इस दिन किए गए दान को सबसे पवित्र और फलदायी बताया गया है।
ब्राह्मण भोजन का महत्व
माघ पूर्णिमा के दिन ब्राह्मणों को भोजन कराना विशेष पुण्यकारी माना जाता है। इस दिन अपनी क्षमता के अनुसार जितने अधिक ब्राह्मणों को भोजन कराया जाए, उतना ही अधिक पुण्य मिलता है। भोजन के साथ दक्षिणा देना भी आवश्यक है। यह परंपरा सदियों से चली आ रही है और इसका बहुत महत्व है।
गरीबों की सेवा
माघ पूर्णिमा (Magh Purnima 2026) के दिन गरीबों और जरूरतमंदों की सेवा करना भी अत्यंत पुण्यकारी है। जो लोग अपने आसपास के गरीब और असहाय लोगों को भोजन, वस्त्र या अन्य आवश्यक चीजें देते हैं, उन्हें विशेष पुण्य मिलता है। यह दान निस्वार्थ भाव से करना चाहिए। गरीबों की मदद करना भगवान की सेवा के समान माना जाता है।
व्रत का विधान
माघ पूर्णिमा (Magh Purnima 2026) के दिन व्रत रखने का भी विधान है। इस व्रत को करने से जीवन में सुख शांति और समृद्धि आती है। व्रत रखने वाले व्यक्ति को सुबह जल्दी उठकर स्नान करना चाहिए। फिर भगवान विष्णु की पूजा करनी चाहिए। पूरे दिन व्रत रखकर शाम को चंद्रोदय के बाद व्रत खोलें। व्रत के दौरान सात्विक भोजन ही करना चाहिए।
पूजा विधि
माघ पूर्णिमा (Magh Purnima 2026) के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें। साफ कपड़े पहनें। घर में पूजा स्थल को अच्छे से सजाएं। भगवान विष्णु की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें। दीपक जलाएं और धूप अगरबत्ती लगाएं। फूल चढ़ाएं और भोग लगाएं। विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें। आरती करके प्रसाद वितरण करें। पूजा के बाद ब्राह्मणों को भोजन कराएं और दान दें।
Magh Purnima 2026: मोक्ष की प्राप्ति
धार्मिक ग्रंथों में माघ पूर्णिमा (Magh Purnima 2026) पर किए गए पुण्य कार्यों को मोक्ष का मार्ग बताया गया है। इस दिन सच्चे मन से पूजा पाठ और दान करने वाले व्यक्ति को जीवन मृत्यु के चक्र से मुक्ति मिलती है। यह तिथि आध्यात्मिक उन्नति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। जो लोग नियमित रूप से इस व्रत को करते हैं, उनके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आता है।
निष्कर्ष: माघ पूर्णिमा (Magh Purnima 2026) हिंदू धर्म में एक अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण पर्व है। इस दिन स्नान, दान और पूजा का विशेष महत्व है। बत्तीस गुना फल देने वाली यह पूर्णिमा भक्तों को पुण्य और मोक्ष की प्राप्ति कराती है। 1 फरवरी 2026 को आने वाली इस माघ पूर्णिमा पर सभी को अपनी क्षमता के अनुसार पूजा पाठ और दान करना चाहिए।
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