UPI देख मैक्रों हुए अभिभूत, बोले- ‘भारत ने जो बनाया वो दुनिया का कोई देश नहीं बना सकता’; मुंबई के फेरीवाले की कहानी से दिया बड़ा संदेश
मुंबई फेरीवाले की कहानी से दिया संदेश, 140 करोड़ आधार, 20 अरब मासिक UPI लेनदेन, भारत का डिजिटल मॉडल वैश्विक
India Al Impact Summit 2026: इंडिया AI इम्पैक्ट समिट में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने ‘नमस्ते’ से अपना भाषण शुरू किया और भारत की डिजिटल क्रांति को सभ्यता की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक बताया। UPI की तारीफ करते हुए उन्होंने कहा कि हर महीने 20 अरब लेनदेन होना दुनिया के किसी और देश के लिए संभव नहीं था।
India Al Impact Summit 2026: मुंबई के फेरीवाले का प्रभावशाली किस्सा
राष्ट्रपति मैक्रों ने तकनीक को मानवीय संवेदनाओं से जोड़ते हुए एक उदाहरण पेश किया:
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बदलाव की कहानी: उन्होंने मुंबई के एक ऐसे फेरीवाले का जिक्र किया जिसके पास दस साल पहले न बैंक खाता था और न ही पहचान के कागजात।
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वर्तमान स्थिति: आज वही शख्स मोबाइल फोन के जरिए डिजिटल पेमेंट लेता है।
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सभ्यता का परिवर्तन: मैक्रों ने इसे महज तकनीक नहीं, बल्कि एक पूरी सभ्यता के बदलाव की कहानी बताया। यह अनुभव उन्होंने अपनी मुंबई यात्रा के दौरान स्वयं महसूस किया था।
India Al Impact Summit 2026: भारत की तीन बड़ी डिजिटल उपलब्धियां
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संबोधित करते हुए मैक्रों ने भारत की तीन अनूठी सफलताओं को रेखांकित किया:
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डिजिटल पहचान: 140 करोड़ लोगों को डिजिटल पहचान (आधार) के दायरे में लाना।
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UPI की ताकत: एक ऐसी भुगतान प्रणाली विकसित करना जो हर महीने 20 अरब से अधिक लेनदेन संसाधित कर रही है।
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स्वास्थ्य ढांचा: 50 करोड़ से अधिक डिजिटल स्वास्थ्य पहचान पत्र जारी कर एक विशाल स्वास्थ्य डेटाबेस तैयार करना।
India Al Impact Summit 2026: भारत-फ्रांस की रणनीतिक और तकनीकी साझी सोच
मैक्रों ने AI और तकनीक के क्षेत्र में दोनों देशों के साझा हितों पर जोर दिया:
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स्वतंत्रता: भारत और फ्रांस दोनों AI के क्षेत्र में अमेरिका या चीन पर पूरी तरह निर्भर नहीं रहना चाहते।
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स्वदेशी तकनीक: UPI इस बात का सबसे बड़ा प्रमाण है कि जब कोई देश अपनी जरूरत के हिसाब से तकनीक बनाता है, तो नतीजे असाधारण होते हैं।
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संतुलित भविष्य: दोनों देश एक स्वतंत्र और संतुलित तकनीकी भविष्य के पक्षधर हैं।
India Al Impact Summit 2026: डिजिटल भारत की वैश्विक पहचान
पिछले एक दशक में हुए क्रांतिकारी बदलावों का विश्लेषण:
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वित्तीय समावेश: जनधन, आधार और मोबाइल की तिकड़ी ने उन करोड़ों लोगों को बैंकिंग से जोड़ा जो पहले इससे वंचित थे।
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वैश्विक मॉडल: भारत का यह डिजिटल मॉडल अब दुनिया के कई देशों के लिए एक मार्गदर्शक की भूमिका निभा रहा है।
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AI के लिए बुनियाद: भारत की यह मजबूत डिजिटल बुनियाद उसे भविष्य की AI तकनीक के लिए एक विश्वसनीय और अग्रणी राष्ट्र के रूप में स्थापित करती है।
निष्कर्ष: राष्ट्रपति मैक्रों की सराहना इस बात की पुष्टि करती है कि भारत ने डिजिटल क्षेत्र में जो रास्ता चुना है, दुनिया उसे एक महान उपलब्धि के रूप में देख रही है।
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