Maamla Legal Hai Season 2 Review: जज की कुर्सी पर रवि किशन का जलवा, पटपड़गंज कोर्ट में फिर शुरू हुआ बेतुके मुकदमों और तीखे व्यंग्य का दौर; जानें कैसा है नया सीजन

रवि किशन जज बनकर लौटे, पटपड़गंज कोर्ट में इस बार कॉमेडी के साथ मजबूत सामाजिक संदेश भी देखने को मिलेगा

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Maamla Legal Hai Season 2 Review: Netflix पर ‘Maamla Legal Hai’ का दूसरा सीजन रिलीज हो गया है। इस बार पटपड़गंज डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में मजाक की जगह थोड़ी गहराई और तेज व्यंग्य आ गया है। रवि किशन अब वकील से जज बन गए हैं और उनका किरदार वी.डी. त्यागी अब सिस्टम को अंदर से बदलने की कोशिश कर रहा है। पहला सीजन हंसी का खजाना था, तो दूसरा सीजन हंसी के साथ-साथ सोशल कमेंट्री और इंस्पेक्शन भी लेकर आया है। कुल 8 एपिसोड में यह सीरीज एक बार फिर कोर्ट के अजीबोगरीब केसों के जरिए भारतीय न्याय व्यवस्था पर तीखा लेकिन दिलचस्प नजरिया पेश करती है।

वकील से ‘माननीय जज’ बने वी.डी. त्यागी का नया मिशन

सीजन 2 में शोरुनर समीर सक्सेना और डायरेक्टर राहुल पांडे ने पावर डायनामिक्स को पलट दिया है। वी.डी. त्यागी (रवि किशन) अब प्रिंसिपल डिस्ट्रिक्ट जज बन गए हैं। पहले वह सिस्टम को गेम करते थे, अब वे सिस्टम का हिस्सा हैं। रवि किशन ने इस किरदार को इतनी सहजता और एनर्जी से निभाया है कि जज की रूढ़िवादी छवि पूरी तरह बदल जाती है।

त्यागी अब बड़े-बड़े फैसले लेना चाहते हैं, लेकिन उनके सहयोगी उन्हें सावधानी बरतने की सलाह देते हैं। कोर्ट के अंदर देरी, पक्षपात और ब्यूरोक्रेसी पर व्यंग्य अब अंदरूनी नजरिए से हो रहा है। यह बदलाव सीरीज को पहले से ज्यादा गहराई देता है।

अजीबोगरीब केस और कलाकारों की दमदार जुगलबंदी

हर एपिसोड में एक नया अजीब केस आता है। कोई नकली शराब का केस, कोई जज बनकर घुसपैठिया, कोई जमींदार और वकील के बीच झगड़ा। इन केसों के जरिए शो सामाजिक मुद्दों को हल्के-फुल्के अंदाज में उठाता है।

नए सीजन में दीनेश लाल यादव (निरहुआ), दिब्येंदु भट्टाचार्य, अनंत जोशी, नायला प्रेवाल, निधि बिष्ट और कुशा कपिला जैसे कलाकारों ने अपने किरदारों को और मजबूत बनाया है। कुशा कपिला एलीट स्टीरियोटाइप को अच्छे से निभाती हैं, जबकि दिब्येंदु भट्टाचार्य एक चालाक किरदार में गहराई लाते हैं। पूरे ensemble cast ने मिलकर कोर्ट के माहौल को जीवंत बना दिया है।

न्याय व्यवस्था पर एक मानवीय नजरिया

‘Maamla Legal Hai’ Season 2 व्यंग्य को कभी भी कड़वा नहीं होने देता। रैट्स केस प्रॉपर्टी खा जाते हैं, जज खुद ट्रायल पर होते हैं, लेकिन इन सबके पीछे इंसानियत और भावनाएं भी दिखाई देती हैं।

शो बार-बार याद दिलाता है कि कोर्ट में देरी या टैक्टिकल एडजर्नमेंट हमेशा बुरी नहीं होती। कभी-कभी ये नैचुरल जस्टिस के सिद्धांत से जुड़ी होती हैं। सीजन के अंत में कैपिटल पनिशमेंट जैसे गंभीर मुद्दे पर त्यागी और दर्शकों दोनों को सोचने पर मजबूर कर दिया जाता है। लेखन क्रिस्प है, एडिटिंग तेज है और डायलॉग्स में वो तीखापन है जो पहले सीजन में था, लेकिन इस बार थोड़ा परिपक्व हो गया है।

रवि किशन और ‘पंचायत’ वाली टीम का कमाल

रवि किशन इस सीजन में पूरी तरह छा गए हैं। उन्होंने फ्लैंबॉयंट स्टाइल को कंट्रोल के साथ बैलेंस किया है। दीनेश लाल यादव अपनी कॉमिक टाइमिंग से हार्टलैंड ऑडियंस को जोड़ते हैं। बाकी कलाकार भी अपने किरदारों को इतना मजबूत बनाते हैं कि आठ एपिसोड देखते हुए बोरियत नहीं होती।

डायरेक्टर राहुल पांडे ने कोर्ट के माहौल को पहले से ज्यादा रियल और इमोशनल बना दिया है। ‘Panchayat’ वाली टीम का अनुभव यहां भी दिखता है, लेकिन ‘Maamla Legal Hai’ अपना अलग स्वाद रखता है।

Maamla Legal Hai Season 2 Review: अंतिम फैसला

‘Maamla Legal Hai’ Season 2 हंसी, व्यंग्य और गहराई का बेहतरीन मिश्रण है। पहला सीजन मजेदार था, तो दूसरा सीजन थोड़ा ज्यादा सोचने वाला और परिपक्व है। अगर आपको कोर्ट रूम ड्रामा, स्मार्ट कॉमेडी और सोशल कमेंट्री पसंद है तो यह सीरीज जरूर देखें।

Netflix पर अभी स्ट्रीमिंग हो रही है। आठ एपिसोड का यह सीजन एक साथ या रोज एक-एक करके देखने लायक है। रवि किशन की अदाकारी और पटपड़गंज कोर्ट का बेतुका लेकिन दिलचस्प संसार आपको बांधे रखेगा।

रेटिंग: 8/10

किसके लिए: जो हल्की-फुल्की हंसी के साथ थोड़ी गहराई भी चाहते हैं।

नोट: सीरीज के सभी 8 एपिसोड नेटफ्लिक्स पर हिंदी भाषा में उपलब्ध हैं। वीकेंड बिंज-वॉच के लिए यह एक बेहतरीन विकल्प है।

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