चंद्रग्रहण,- जानें क्यों चंद्रग्रहण के दिन नहीं छूना चाहिए ये 4 चीजें, क्या पड़ता है इसका प्रभाव*
3 मार्च को दुर्लभ संयोग: चंद्रग्रहण + अंतिम होलाष्टक, राहु दोगुना उग्र; जानें क्या न छुएं
Chandra Grahan: हिंदू धर्म और ज्योतिष शास्त्र में चंद्रग्रहण को एक विशेष खगोलीय घटना माना जाता है। इस दौरान चंद्रमा पर पृथ्वी की छाया पड़ती है, जिससे राहु-केतु का प्रभाव बढ़ जाता है। मान्यताओं के अनुसार, ग्रहण काल में नकारात्मक ऊर्जा अधिक सक्रिय हो जाती है, इसलिए कुछ चीजों को छूने से बचना चाहिए। साल 2026 का पहला चंद्रग्रहण 3 मार्च को लगने वाला है, जो होली के दिन पड़ रहा. है। यह पूर्ण चंद्रग्रहण भारत में दिखाई देगा, जिसका समय दोपहर 3:20 बजे से शाम 6:47 बजे तक रहेगा। सूतक काल सुबह 6:20 बजे से शुरू हो जाएगा।
इस अवधि में कई नियमों का पालन करना जरूरी होता है। खासकर कुछ वस्तुओं को स्पर्श करने से परहेज करना चाहिए, क्योंकि इनके माध्यम से नकारात्मक शक्तियां प्रभाव डाल सकती हैं। आइए जानते हैं उन 4 प्रमुख चीजों के बारे में, जिन्हें ग्रहण के दिन गलती से भी नहीं छूना चाहिए।
1. नुकीली और धारदार वस्तुएं
चंद्रग्रहण के दौरान चाकू, सुई, कैंची, नेल कटर या कोई भी नुकीली चीज छूने से बचें। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, ग्रहण काल में राहु का प्रभाव बढ़ जाता है, जो नकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करता है। ऐसी वस्तुओं का स्पर्श करने से घर में कलह, स्वास्थ्य समस्याएं या आर्थिक नुकसान हो सकता है। खासकर गर्भवती महिलाओं को इन चीजों से दूर रहना चाहिए, क्योंकि इससे शिशु पर बुरा असर पड़ सकता है। कई शास्त्रों में इसे अशुभ माना गया है और बाल या नाखून काटने जैसी क्रियाएं भी वर्जित हैं।
2. तुलसी का पौधा
तुलसी को हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र माना जाता है, लेकिन ग्रहण के दिन इसे छूना वर्जित है। मान्यता है कि ग्रहण काल में तुलसी का स्पर्श करने से उसकी पवित्रता प्रभावित होती है और व्यक्ति को पाप लग सकता है। कई ज्योतिष विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि सूतक शुरू होते ही तुलसी के पौधे को अलग रखें और ग्रहण समाप्त होने के बाद ही स्पर्श करें। ऐसा न करने से नकारात्मक ऊर्जा घर में प्रवेश कर सकती है।
3. पीपल और बरगद के पेड़
पीपल और बरगद के पेड़ धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं, लेकिन चंद्रग्रहण के दिन इनका स्पर्श नहीं करना चाहिए। धार्मिक ग्रंथों में कहा गया है कि ग्रहण के समय ये पेड़ नकारात्मक शक्तियों को आकर्षित करते हैं। इनके पत्ते या तने को छूने से दोष लगने की आशंका रहती है। कई लोग ग्रहण काल में इन पेड़ों के नीचे नहीं जाते और स्पर्श से पूरी तरह परहेज करते हैं। यह नियम विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि इन पेड़ों को देवताओं का निवास माना जाता है।
4. भगवान की मूर्तियां या धार्मिक ग्रंथ
ग्रहण के दौरान मंदिर में रखी भगवान की मूर्तियों को छूना या धार्मिक पुस्तकें जैसे रामायण, गीता आदि को स्पर्श करना अशुभ माना जाता है। इस समय पूजा-पाठ वर्जित होता है और मूर्तियों पर लाल या पीला कपड़ा ढक देना चाहिए। ऐसा करने से नकारात्मक ऊर्जा मूर्ति के माध्यम से फैल सकती है। ज्योतिष शास्त्र में सलाह दी जाती है कि ग्रहण काल में केवल भगवान के नाम जप करें, जैसे महामृत्युंजय मंत्र या विष्णु सहस्रनाम का पाठ।
Chandra Grahan: ग्रहण के दौरान अन्य महत्वपूर्ण सावधानियां
चंद्रग्रहण केवल इन चार चीजों तक सीमित नहीं है। ग्रहण काल में भोजन पकाना या खाना, शुभ कार्य शुरू करना, बाहर निकलना, सोना और शारीरिक संबंध बनाना भी वर्जित है। सूतक काल में घर की रसोई बंद रखें और पहले से तैयार भोजन में तुलसी पत्र डालकर रख सकते हैं। ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान करें, दान दें और शुद्धिकरण करें। दान में चावल, दूध, घी, चांदी या सफेद वस्त्र देना शुभ माना जाता है।
Chandra Grahan: वैज्ञानिक और धार्मिक दृष्टिकोण
वैज्ञानिक रूप से ग्रहण के दौरान सूर्य की किरणें प्रभावित होती हैं, जिससे वातावरण में बदलाव आता है। लेकिन धार्मिक मान्यताओं में इसे नकारात्मक ऊर्जा का समय माना जाता है। इसलिए इन नियमों का पालन करके व्यक्ति खुद को और परिवार को सुरक्षित रख सकता है।
3 मार्च 2026 का यह चंद्रग्रहण होली के साथ पड़ रहा है, इसलिए विशेष सावधानी बरतें। ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान-दान करके नकारात्मक प्रभाव से मुक्ति पाएं। ज्योतिषाचार्यों की सलाह लें और शांत मन से इस दिन को व्यतीत करें।
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