ईरान युद्ध से भारत में एलपीजी की खपत 17 प्रतिशत गिरी, पिछले साल 13.87 लाख टन था आंकड़ा, होर्मुज बंद से सप्लाई ठप, एटीएफ भी 4 प्रतिशत गिरा, पेट्रोल-डीजल की मांग बढ़ी
होर्मुज बंद से सप्लाई प्रभावित, LPG-ATF मांग घटी, पेट्रोल-डीजल की खपत बढ़ी
LPG Cylinder Crisis: मध्य-पूर्व में ईरान-इजरायल-अमेरिका युद्ध का असर अब भारत के ईंधन बाजार पर साफ दिखने लगा है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने से एलपीजी की आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई है। मार्च 2026 के पहले 15 दिनों में देश में एलपीजी की खपत घटकर केवल 11.47 लाख टन रह गई जो पिछले साल मार्च की समान अवधि के 13.87 लाख टन से 17.3 प्रतिशत कम है। सरकार ने घरेलू एलपीजी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए होटलों और उद्योगों को गैस की आपूर्ति में कटौती कर दी है। वहीं विमान ईंधन यानी एटीएफ की खपत भी 4 प्रतिशत गिर गई है।
LPG Cylinder Crisis: एलपीजी खपत में गिरावट – मुख्य आंकड़े
| विवरण | आंकड़े |
|---|---|
| मार्च 2026 (1-15) की खपत | 11.47 लाख टन |
| मार्च 2025 (1-15) की खपत | 13.87 लाख टन |
| सालाना गिरावट | 17.3 प्रतिशत |
| फरवरी 2026 (1-15) की खपत | 15.57 लाख टन |
| मासिक गिरावट | 26.3 प्रतिशत |
| 2024 की समान अवधि से कम | 16 प्रतिशत |
| 2023 की समान अवधि से कम | 10.6 प्रतिशत |
| भारत का एलपीजी आयात | कुल जरूरत का लगभग 60 प्रतिशत |
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद – सप्लाई कैसे प्रभावित हुई?
अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर हमले के बाद ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद कर दिया। यह दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है जिससे होकर वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा गुजरता है।
भारत अपनी कुल एलपीजी जरूरत का लगभग 60 प्रतिशत आयात करता है जिसमें से अधिकांश गैस ईरान के नियंत्रण वाले स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते आती है। इस मार्ग के बंद होते ही सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात से एलपीजी की सप्लाई भी बुरी तरह प्रभावित हो गई।
| आपूर्ति मार्ग | स्थिति |
|---|---|
| स्ट्रेट ऑफ होर्मुज | बंद |
| सऊदी अरब से सप्लाई | प्रभावित |
| यूएई से सप्लाई | प्रभावित |
| वैकल्पिक मार्ग | सीमित और महंगे |
LPG Cylinder Crisis: सरकार ने उठाए ये कदम
एलपीजी की कमी से जूझते हुए सरकार ने घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता देते हुए व्यावसायिक और औद्योगिक उपभोक्ताओं की गैस आपूर्ति में कटौती कर दी है।
| कदम | विवरण |
|---|---|
| होटलों की सप्लाई | कटौती की गई |
| उद्योगों की सप्लाई | कटौती की गई |
| घरेलू सिलेंडर | प्राथमिकता |
| व्यावसायिक सिलेंडर | सीमित आपूर्ति |
तीन प्रमुख तेल कंपनियों की बाजार भागीदारी
इन आंकड़ों को सार्वजनिक क्षेत्र की तीन प्रमुख तेल कंपनियों ने जारी किया है जिनकी बाजार में लगभग 90 प्रतिशत हिस्सेदारी है।
| कंपनी | बाजार हिस्सेदारी |
|---|---|
| इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड | सबसे बड़ी |
| हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड | दूसरी |
| भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड | तीसरी |
| तीनों की कुल हिस्सेदारी | लगभग 90 प्रतिशत |
LPG Cylinder Crisis: एटीएफ की खपत में भी गिरावट
ईरान युद्ध के कारण खाड़ी देशों ने अपना हवाई क्षेत्र बंद कर दिया था जिसके चलते उड़ान संचालन बुरी तरह प्रभावित हुआ। हवाई कंपनियों ने इस दौरान काफी कम उड़ानें संचालित कीं।
| एटीएफ खपत | आंकड़े |
|---|---|
| मार्च 2026 (1-15) | 3,27,900 टन |
| सालाना गिरावट | 4 प्रतिशत |
| मासिक गिरावट | 12.3 प्रतिशत |
| कारण | हवाई क्षेत्र बंद, कम उड़ानें |
पेट्रोल-डीजल की मांग बढ़ी – एकमात्र राहत
जहां एलपीजी और एटीएफ की खपत घटी वहीं पेट्रोल और डीजल की मांग में अच्छी बढ़ोतरी दर्ज की गई। यह एक सकारात्मक संकेत है।
| ईंधन | खपत | बदलाव |
|---|---|---|
| पेट्रोल | लगभग 15 लाख टन | 13.2 प्रतिशत की बढ़ोतरी |
| डीजल | 33.84 लाख टन | 8.2 प्रतिशत की बढ़ोतरी |
| एलपीजी | 11.47 लाख टन | 17.3 प्रतिशत की गिरावट |
| एटीएफ | 3,27,900 टन | 4 प्रतिशत की गिरावट |
LPG Cylinder Crisis: एलपीजी खपत में पहले होती थी वृद्धि
एलपीजी की खपत में पिछले कुछ सालों से लगातार 3 से 4 प्रतिशत की सालाना वृद्धि देखी जा रही थी। इसका मुख्य कारण सरकार द्वारा लकड़ी और अन्य प्रदूषणकारी ईंधनों की जगह स्वच्छ ईंधन को बढ़ावा देना था। उज्ज्वला योजना के तहत करोड़ों घरों में एलपीजी कनेक्शन दिए गए थे। लेकिन ईरान युद्ध ने इस सकारात्मक रुझान को अचानक पलट दिया है।
| वर्ष | एलपीजी खपत की प्रवृत्ति |
|---|---|
| 2023-2024 | 3 से 4 प्रतिशत सालाना वृद्धि |
| 2024-2025 | सामान्य वृद्धि |
| मार्च 2025 (1-15) | 13.87 लाख टन |
| मार्च 2026 (1-15) | 11.47 लाख टन (17.3% गिरावट) |
आम जनता पर क्या असर पड़ रहा है?
एलपीजी संकट का सीधा असर आम घरों और छोटे व्यवसायों पर पड़ रहा है। कई शहरों में गैस सिलेंडर की किल्लत की शिकायतें आ रही हैं। होटल और ढाबे संचालकों को गैस की कमी से खाना बनाने में दिक्कत हो रही है।
ऊर्जा क्षेत्र के विशेषज्ञ का कहना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य का बंद होना भारत के लिए एक बड़ा ऊर्जा संकट बन गया है। भारत को अपनी ऊर्जा आपूर्ति के स्रोतों में विविधता लाने की जरूरत है ताकि एक भू-राजनीतिक संकट का इतना गहरा असर न पड़े। अल्पकालिक समाधान के तौर पर वैकल्पिक आपूर्ति मार्गों की तलाश तेज करनी होगी।
LPG Cylinder Crisis: निष्कर्ष
ईरान युद्ध और होर्मुज संकट ने भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर एक गंभीर प्रश्न खड़ा कर दिया है। एलपीजी खपत में 17.3 प्रतिशत की गिरावट और एटीएफ में 4 प्रतिशत की कमी यह दर्शाती है कि वैश्विक संकट का सीधा असर भारत के ईंधन बाजार पर पड़ रहा है। सरकार ने घरेलू उपभोक्ताओं की सुरक्षा के लिए कदम उठाए हैं लेकिन दीर्घकालिक समाधान के लिए ऊर्जा आपूर्ति स्रोतों में विविधता लाना जरूरी है।
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