लोकसभा सीटें 543 से बढ़कर 816 होंगी, 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित – 2011 जनगणना के आधार पर परिसीमन, जानें किस राज्य को मिलेंगी कितनी सीटें
केंद्र सरकार लोकसभा सीटें बढ़ाकर 816 करने और 33% यानी 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित करने का बड़ा प्रस्ताव ला रही है
Lok Sabha seats: भारत की लोकसभा में सीटों की संख्या सात दशकों में पहली बार बड़े पैमाने पर बढ़ने जा रही है। केंद्र सरकार ने इस ऐतिहासिक बदलाव की तैयारी शुरू कर दी है और संसद के मौजूदा सत्र में ही संशोधन विधेयक पेश किया जा सकता है।
Lok Sabha seats: लोकसभा सीटें बढ़ाने का यह प्रस्ताव क्या है और क्यों आया?
सूत्रों के अनुसार केंद्र सरकार लोकसभा की मौजूदा 543 सीटों को बढ़ाकर 816 करने का प्रस्ताव लेकर आ रही है। इसके साथ ही महिला आरक्षण के तहत कुल सीटों में से 33 प्रतिशत यानी 273 सीटें महिला प्रतिनिधियों के लिए आरक्षित की जाएंगी।
भारत में 1977 के बाद से लोकसभा सीटों की संख्या में कोई बदलाव नहीं हुआ है। तब से देश की जनसंख्या लगभग तीन गुना बढ़ चुकी है लेकिन सीटें वहीं रुकी हुई हैं। संविधान विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ती जनसंख्या के अनुपात में जनप्रतिनिधित्व का विस्तार लोकतंत्र को और मजबूत बनाएगा।
Lok Sabha seats: परिसीमन का आधार क्या होगा और 2011 की जनगणना क्यों?
इस पूरी प्रक्रिया का आधार 2011 की जनगणना के आंकड़े होंगे। 2021 की जनगणना अभी तक पूरी तरह उपलब्ध नहीं हो सकी है इसलिए 2011 के आंकड़े को ही परिसीमन का मुख्य आधार बनाया जाएगा।
परिसीमन आयोग के माध्यम से यह तय किया जाएगा कि किस राज्य को जनसंख्या के अनुपात में कितनी सीटें मिलें। इससे यह सुनिश्चित होगा कि किसी एक राज्य या क्षेत्र को अनुचित लाभ न मिले और सभी राज्यों के साथ न्यायसंगत व्यवहार हो।
Lok Sabha seats: किस राज्य में कितनी सीटें बढ़ेंगी और क्या होगा बदलाव?
प्रस्तावित परिसीमन के अनुसार उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक बदलाव देखने को मिलेगा जहां मौजूदा 80 सीटें बढ़कर 120 हो जाएंगी। बिहार में 40 सीटें बढ़कर 60 होंगी जबकि महाराष्ट्र में 48 की जगह 72 सीटें होंगी।
पश्चिम बंगाल में 42 से 63, तमिलनाडु में 39 से 59, कर्नाटक में 28 से 42, केरल में 20 से 30, आंध्र प्रदेश में 25 से 38, गुजरात में 26 से 39 और राजस्थान में 25 से 38 सीटें प्रस्तावित हैं। दिल्ली में 7 से 11, ओडिशा में 21 से 32 और झारखंड में 14 से 21 सीटें की जाएंगी।
Lok Sabha seats: दक्षिण भारत के राज्यों की आपत्ति दूर हुई या नहीं?
इस प्रस्ताव को लेकर शुरुआत में दक्षिण भारत के राज्यों में चिंता थी। उनका तर्क था कि जनसंख्या नियंत्रण में सफल रहे राज्यों की सीटें घटेंगी जबकि उत्तर भारत के अधिक जनसंख्या वाले राज्यों की सीटें बढ़ जाएंगी।
अब इस प्रस्ताव में यह स्पष्ट किया गया है कि सभी राज्यों की सीटें आनुपातिक आधार पर बढ़ाई जाएंगी। इससे दक्षिण के राज्यों की सीटें भी समान अनुपात में बढ़ेंगी और किसी राज्य की मौजूदा सीटें कम नहीं होंगी। इस प्रस्ताव से दक्षिणी राज्यों की आपत्ति का समाधान होने की उम्मीद जताई जा रही है।
Lok Sabha seats: महिला आरक्षण का क्या स्वरूप होगा और इसका क्या महत्व है?
816 प्रस्तावित सीटों में से 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी जो कुल सीटों का 33 प्रतिशत बनती हैं। यह भारतीय संसद के इतिहास में महिला प्रतिनिधित्व की सबसे बड़ी छलांग होगी।
वर्तमान में लोकसभा में महिला सांसदों की संख्या कुल सीटों का लगभग 15 प्रतिशत के आसपास है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 33 प्रतिशत आरक्षण लागू होने से न सिर्फ महिला नेतृत्व को बल मिलेगा बल्कि नीति निर्माण में महिलाओं की भागीदारी भी बढ़ेगी।
Lok Sabha seats: संसद में इस बिल की राजनीतिक स्थिति क्या है?
सरकार के सूत्रों के अनुसार मंगलवार को एनडीए नेताओं की बैठक में इस विधेयक को आगे बढ़ाने का रोडमैप तय किया जाना था। विपक्षी दल भी इस मुद्दे पर अपनी रणनीति तय कर रहे हैं और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने विपक्षी सांसदों के साथ अलग से बैठक की है।
संवैधानिक विशेषज्ञों के अनुसार इस विधेयक को पारित करने के लिए संसद में दो तिहाई बहुमत की आवश्यकता होगी क्योंकि यह संविधान संशोधन से जुड़ा मामला है। सरकार को अपने बहुमत के आधार पर यह विधेयक पारित करने में कठिनाई होने की आशंका नहीं है।
निष्कर्ष
लोकसभा सीटों की संख्या 543 से 816 करना और 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित करना भारतीय संसदीय लोकतंत्र के इतिहास का एक निर्णायक मोड़ साबित हो सकता है। इससे जहां एक ओर जनसंख्या के अनुरूप जनप्रतिनिधित्व सुनिश्चित होगा वहीं दूसरी ओर देश की आधी आबादी को संसद में उचित हिस्सेदारी मिलेगी।
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