KGMU Conversion Case: ‘जन्नत’ नाम से हिंदू लड़कियों का फोल्डर, कॉल गर्ल्स के नंबर जुटाए, डॉक्टर रमीज ने पुलिस पूछताछ में किए चौंकाने वाले खुलासे

दो लैपटॉप से मिले 50 से ज्यादा युवतियों के अश्लील वीडियो, ब्लैकमेलिंग के लिए करता था इस्तेमाल

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KGMU Conversion Case: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में KGMU धर्मांतरण मामले में बड़े और चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। पुलिस की 48 घंटे की रिमांड के दौरान आरोपी डॉक्टर रमीजुद्दीन नायक से की गई पूछताछ में ऐसे तथ्य सामने आए हैं जो पूरे मामले की गंभीरता को और बढ़ा देते हैं। सूत्रों के मुताबिक, रमीज ने ‘जन्नत’ नाम से एक विशेष फोल्डर बना रखा था जिसमें उन सभी हिंदू लड़कियों के नाम, नंबर और अन्य जानकारियां थीं जिनसे वह संपर्क में आया था। इसके अलावा उसके लैपटॉप से कॉल गर्ल्स के नंबरों की सूची भी मिली है जिनका इस्तेमाल वह कथित तौर पर मुस्लिम युवाओं को अपने धर्मांतरण रैकेट में फंसाने के लिए करता था।

पुलिस ने डॉक्टर रमीज से कुल 120 से अधिक सवाल पूछे हैं। सोमवार दोपहर 1 बजे चौक पुलिस ने रमीजुद्दीन नायक को 48 घंटे की रिमांड पर लिया था। पहले दिन करीब 5 घंटे तक चली पूछताछ में उससे 40 सवाल पूछे गए थे। मंगलवार को भी पूछताछ जारी रही और बुधवार सुबह भी गहन पूछताछ की गई। पुलिस ने आरोपी से कई बिंदुओं पर विस्तृत जानकारी हासिल की है। उसके मोबाइल फोन और दो लैपटॉप बरामद किए गए हैं जिनसे चैट और कई नंबर डिलीट करने का भी खुलासा हुआ है।

KGMU Conversion Case: दो लैपटॉप से मिला 13 साल का डिजिटल डेटा

रमीज के घर से एक नहीं बल्कि दो लैपटॉप बरामद हुए हैं। एक लैपटॉप में उसने पिछले 13 साल का पूरा डेटा सहेज कर रखा हुआ है। इस डेटा में न सिर्फ उसकी निजी गतिविधियों का पूरा रिकॉर्ड है, बल्कि मेडिकोज ग्रुप से जुड़े संदिग्ध संपर्कों और कई युवतियों के अश्लील वीडियो (KGMU Conversion Case) भी शामिल हैं। फॉरेंसिक टीम डिलीट किए गए डेटा को रिकवर करने में जुटी है।

दूसरे लैपटॉप से 50 से ज्यादा युवतियों के वीडियो मिले हैं, जिनमें उसकी पहली पत्नी के साथ-साथ अन्य लड़कियों के वीडियो भी शामिल हैं। पुलिस को शक है कि इन वीडियो का इस्तेमाल ब्लैकमेलिंग और दबाव बनाने के लिए किया जाता था। रमीज ने खुद ही अपनी क्राइम कुंडली तैयार कर रखी थी जिसमें हर गतिविधि का विस्तृत रिकॉर्ड था।

‘जन्नत’ नाम से बनाया खास फोल्डर

सबसे चौंकाने वाला खुलासा यह है कि रमीज (KGMU Conversion Case) ने ‘जन्नत’ नाम से एक विशेष फोल्डर बनाया हुआ था। इस फोल्डर में उन सभी हिंदू लड़कियों के नाम, फोटो, वीडियो और संपर्क विवरण थे जिनसे वह कभी संपर्क में आया था। सूत्रों के अनुसार, जिस भी हिंदू लड़की से उसका संपर्क होता था, वह उसकी फोटो और डिटेल बनाकर सुरक्षित कर लेता था।

यह फोल्डर एक सुनियोजित तरीके से बनाया गया था जिसमें हर जानकारी व्यवस्थित तरीके से दर्ज थी। इससे साफ पता चलता है कि रमीज यह सब सोच-समझकर और योजनाबद्ध तरीके से कर रहा था। यह महज किसी एक घटना या इत्तेफाक नहीं था बल्कि एक सुनियोजित षड्यंत्र का हिस्सा था।

KGMU Conversion Case: कॉल गर्ल्स का डेटा और धर्मांतरण का जाल

लैपटॉप के एक अलग फोल्डर में रमीज ने कथित तौर पर कॉल गर्ल्स का भी डेटा जमा कर रखा था। इनमें नाम, संपर्क नंबर और अन्य जानकारियां शामिल हैं। सूत्रों के अनुसार, इन कॉल गर्ल्स का इस्तेमाल वह धर्मांतरण (KGMU Conversion Case) के रैकेट में मुस्लिम युवाओं को फंसाने के लिए करता था।

यह पूरा नेटवर्क किस तरह काम करता था, इसकी जानकारी अभी पूरी तरह सामने नहीं आई है। लेकिन शुरुआती जांच से पता चलता है कि यह एक बड़े षड्यंत्र का हिस्सा हो सकता है। पुलिस इस पहलू की गहन जांच कर रही है और संभव है कि आने वाले दिनों में और बड़े खुलासे हों।

धर्मांतरण के सवालों पर साधी चुप्पी

KGMU Conversion Case
KGMU Conversion Case

जब पुलिस ने रमीज से महिला रेजिडेंट डॉक्टर पर धर्मांतरण का दबाव डालने के बारे में सवाल किए तो आरोपी ने कई सवालों के जवाब नहीं दिए। वह चुप्पी साधे रहा। आगरा में डॉ. परवेज से संबंधों पर भी आरोपी ने कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया। केस दर्ज होने के बाद से आरोपी किन-किन शहरों में गया और किन लोगों से मिला, इस संबंध में भी पूछताछ की गई है।

नेपाल सीमा तक संपर्कों को लेकर भी जांच तेज है। नेपाल सीमा तक आरोपी किन लोगों की मदद से पहुंचा था, इसकी जानकारी भी ली गई है। पुलिस ने यौन शोषण पीड़िता से आरोपी का सामना नहीं कराया क्योंकि पीड़िता ने भी आरोपी से मिलने से इनकार कर दिया।

KGMU Conversion Case: माता-पिता की भूमिका से किया इनकार

पूछताछ में रमीज ने अपने माता-पिता की संलिप्तता से इनकार किया है। आरोपी ने बताया कि वह पीड़िता के संपर्क में था और दोनों की मुलाकात भी होती थी। हालांकि, धर्मांतरण के प्रयास में उसके माता-पिता की कोई भूमिका नहीं है। यह दावा कितना सही है, इसकी भी जांच की जा रही है।

आरोपी ने तीन मददगारों के नाम लिए हैं जिनकी पहचान और पूछताछ की प्रक्रिया जारी है। पूछताछ में सामने आया कि रमीज नशे की हालत में आपत्तिजनक गतिविधियों को अंजाम देता था। यह जानकारी मामले को और गंभीर बनाती है।

मेडिकोज ग्रुप पर रहा खामोश

पुलिस ने रमीज से KGMU के मेडिकोज ग्रुप को लेकर भी सवाल किए, लेकिन इस संबंध में उसने कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया। पूछताछ में जानकारी सामने आई है कि मेडिकोज ग्रुप के जरिए उसका प्रभाव मेडिकल छात्रों और अन्य युवाओं तक था, जिसका इस्तेमाल वह अपने नेटवर्क को फैलाने में करता था।

इस बिंदु पर पुलिस को कई अहम सुराग मिले हैं, जिनकी तकनीकी जांच कराई जा रही है। मेडिकोज ग्रुप में कितने लोग शामिल थे और क्या वे सभी इस षड्यंत्र का हिस्सा थे, यह अभी स्पष्ट नहीं है। लेकिन जांच आगे बढ़ने के साथ इन सवालों के जवाब भी मिलने की उम्मीद है।

KGMU Conversion Case: दिल्ली में दोस्त के पास रहा फरार

केस दर्ज होने के बाद रमीज दिल्ली भाग गया था। वहां वह झूठ बोलकर अपने दोस्त के पास रुका था। दोस्त की मदद से ही उसने एक नया मोबाइल फोन खरीदा था ताकि पुलिस उसका पता न लगा सके। लेकिन पुलिस की सक्रियता और तकनीकी जांच से उसका ठिकाना पकड़ में आ गया और उसे गिरफ्तार कर लिया गया।

सुरक्षा कारणों से गोपनीय स्थान पर उससे पूछताछ की गई है। STF ने भी आरोपी से अलग से पूछताछ की है। हालांकि, धर्मांतरण के दबाव के सवालों पर आरोपी ने चुप्पी साध ली।

यह मामला अभी जांच के शुरुआती चरण में है और आने वाले दिनों में और भी चौंकाने वाले खुलासे हो सकते हैं। पुलिस पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही है और सभी संभावित कोणों से इसे देख रही है। फॉरेंसिक रिपोर्ट आने के बाद और भी महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आ सकती हैं।

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