केरल अब ‘केरलम’ के नाम से जाना जाएगा,- केंद्रीय मंत्रिमंडल ने दी मंजूरी, चुनाव से पहले बड़ा फैसला

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने दी मंजूरी, चुनाव से पहले बड़ा फैसला; स्थानीय मलयालम नाम को मिली आधिकारिक मान्यता

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Cabinet News: देश के दक्षिणी राज्य केरल का आधिकारिक नाम अब बदलकर ‘केरलम’ हो जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मंगलवार को राज्य सरकार के इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। सूत्रों और केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव की घोषणा के अनुसार, यह फैसला नए पीएमओ भवन ‘सेवा तीर्थ’ में हुई कैबिनेट बैठक में लिया गया। केरल विधानसभा ने दो बार इस बदलाव की मांग की थी, और अब केंद्र की हरी झंडी मिलने के बाद संवैधानिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद राज्य का नाम आधिकारिक रूप से ‘केरलम’ हो जाएगा। यह फैसला अप्रैल-मई में होने वाले विधानसभा चुनावों से ठीक पहले आया है, जिससे राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं।

Cabinet News: ‘केरलम’ नाम का मतलब और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

केरल राज्य को स्थानीय मलयालम भाषा में ‘केरलम’ ही कहा जाता है। यह नाम प्राचीन काल से चला आ रहा है, जो राज्य की सांस्कृतिक और भाषाई पहचान को दर्शाता है। मलयालम में ‘केरलम’ का अर्थ ‘केरल की भूमि’ या ‘नारियल की भूमि’ से जुड़ा माना जाता है, क्योंकि राज्य नारियल उत्पादन के लिए प्रसिद्ध है। अंग्रेजी और अन्य भाषाओं में ‘Kerala’ का प्रयोग होता रहा है, लेकिन स्थानीय लोग लंबे समय से मांग कर रहे थे कि संविधान की पहली अनुसूची और आठवीं अनुसूची की सभी भाषाओं में नाम ‘केरलम’ किया जाए। यह बदलाव राज्य की भाषाई एकता और सांस्कृतिक गौरव को मजबूत करने वाला कदम माना जा रहा है।

केरल को ‘गॉड्स ओन कंट्री’ कहा जाता है, जहां प्राकृतिक सौंदर्य, बैकवाटर्स, हिल स्टेशंस और समृद्ध इतिहास है। नाम बदलाव से पर्यटन और सांस्कृतिक प्रचार में भी नई पहचान मिल सकती है।

प्रस्ताव की यात्रा: 2023 से 2024 तक की प्रक्रिया

केरल विधानसभा ने पहली बार अगस्त 2023 में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया था। मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने खुद यह प्रस्ताव पेश किया था। उन्होंने केंद्र से अपील की कि संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल सभी भाषाओं में राज्य का नाम ‘केरलम’ किया जाए। हालांकि, केंद्रीय गृह मंत्रालय ने प्रस्ताव की समीक्षा के दौरान कुछ तकनीकी बदलाव सुझाए थे, जिसके बाद विधानसभा ने 24 जून 2024 को दोबारा सर्वसम्मति से संशोधित प्रस्ताव पारित किया। इस बार प्रस्ताव को और मजबूती से पेश किया गया, जिसमें संविधान के अनुच्छेद 3 के तहत नाम बदलाव की मांग शामिल थी।

केंद्र सरकार ने अब इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है। मंजूरी मिलने के बाद राष्ट्रपति द्वारा ‘केरल (नाम परिवर्तन) विधेयक, 2026’ को संसद में पेश किया जाएगा, जिसके पारित होने के बाद नाम आधिकारिक रूप से बदल जाएगा।

राजनीतिक महत्व: चुनावी मौसम में फैसला

यह फैसला केरल में आगामी विधानसभा चुनावों से ठीक पहले आया है। राज्य में वाम मोर्चा (एलडीएफ) की सरकार है, जिसके मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने इस मांग को आगे बढ़ाया था। केंद्र में भाजपा नीत एनडीए सरकार द्वारा प्रस्ताव को मंजूरी देने से राजनीतिक समीकरणों पर असर पड़ सकता है। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम राज्य में सकारात्मक संदेश देगा, जबकि विपक्षी नेता जैसे कांग्रेस के शशि थरूर ने पहले ही इस पर टिप्पणी की है। थरूर ने मजाकिया अंदाज में पूछा कि अब केरल के लोगों को ‘केरलामाइट’ या ‘केरलामियन’ कहा जाएगा या नहीं।

यह नाम बदलाव अन्य राज्यों के उदाहरणों से मिलता-जुलता है, जैसे उत्तराखंड (उत्तरांचल से), तेलंगाना या ओडिशा (ओड़ीसा से)। ऐसे बदलाव भाषाई और सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करते हैं।

Cabinet News: आगे क्या होगा प्रक्रिया?

केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी के बाद अब विधेयक संसद में आएगा। संसद के दोनों सदनों से पारित होने के बाद राष्ट्रपति की मंजूरी मिलेगी। इसके बाद संविधान की पहली अनुसूची में संशोधन होगा, और सभी आधिकारिक दस्तावेजों, नक्शों, पासपोर्ट, आधार आदि में नाम ‘केरलम’ होगा। यह प्रक्रिया कुछ महीनों में पूरी हो सकती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह बदलाव राज्य की पहचान को और मजबूत करेगा, लेकिन दैनिक जीवन में ज्यादा प्रभाव नहीं पड़ेगा क्योंकि स्थानीय स्तर पर पहले से ही ‘केरलम’ का प्रयोग होता है।

निष्कर्ष: सांस्कृतिक गौरव की जीत

केरल का नाम ‘केरलम’ होना राज्य की भाषाई विरासत और एकता का प्रतीक है। केंद्र और राज्य सरकार के बीच इस मुद्दे पर सहमति से यह दिखता है कि सांस्कृतिक मांगों पर राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर फैसला हो सकता है। अब केरलवासी अपने राज्य को नए नाम से संबोधित करेंगे, जो उनकी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ा है।

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