Jammu & Kashmir: जम्मू-कश्मीर पुलिस ने एक अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय ऑनलाइन निवेश घोटाले का भंडाफोड़ करते हुए हरियाणा के एक डॉक्टर समेत आठ लोगों को गिरफ्तार किया है। गांदरबल जिले से संचालित इस साइबर फ्रॉड रैकेट ने पिछले 45 दिनों में ही पूरे देश से 209 करोड़ रुपये की ठगी की है। पुलिस का अनुमान है कि यह आंकड़ा 400 करोड़ रुपये से भी अधिक हो सकता है।
Jammu & Kashmir: स्कैम का पर्दाफाश, कैसे हुई शुरुआत
यह पूरा मामला तब सामने आया जब गांदरबल निवासी फिरदौस अहमद मीर ने स्थानीय पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने बताया कि उन्हें सोशल मीडिया पर एक निवेश योजना का विज्ञापन दिखा, जिसमें कम समय में अधिक मुनाफे का वादा किया गया था। गांदरबल के एसएसपी खालिद अहमद पोसवाल ने तुरंत एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया। एसआईटी ने डिजिटल फोरेंसिक विशेषज्ञों की मदद से बैंक खातों की ट्रेलिंग शुरू की।
Jammu & Kashmir: 835 फर्जी बैंक अकाउंट और जटिल वित्तीय जाल
जांच में पुलिस को 835 नकली बैंक खाते और 290 सत्यापित खाते मिले, जिनका उपयोग इस धोखाधड़ी में किया जा रहा था:
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वित्तीय लेयरिंग: पैसा विभिन्न परतों में स्थानांतरित किया जाता था, फिर क्रिप्टोकरेंसी में बदला जाता था।
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टेलीग्राम और QR कोड: टेलीग्राम चैनलों के माध्यम से QR कोड के जरिए पैसा सर्कुलेट किया जाता था।
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विदेशी कनेक्शन: कुछ पैसा सीमा पार रूटिंग के माध्यम से विदेशों में भी भेजा जाता था।
Jammu & Kashmir: ‘डॉ. मॉर्फिन’, मास्टरमाइंड की पहचान
इस पूरे स्कैम का मास्टरमाइंड हरियाणा के हिसार का 32 वर्षीय एकांत योगदत्त निकला, जो ‘डॉ. मॉर्फिन’ के नाम से भी जाना जाता है:
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पृष्ठभूमि: एकांत ने फिलीपींस से MBBS की पढ़ाई की थी। उसने फिलीपींस और चीन में रहते हुए साइबर फ्रॉड की तकनीकें और अंतरराष्ट्रीय हैकर्स के साथ संबंध बनाए।
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ऑपरेशन: वह टेलीग्राम और एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप्स के माध्यम से अपनी टीम से संपर्क में रहता था।
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गिरफ्तारी: पुलिस ने उसे चीन से भारत लौटते समय दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से गिरफ्तार किया।
Jammu & Kashmir: अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी और भूमिका
एकांत के अलावा, कश्मीर घाटी के विभिन्न हिस्सों से आठ अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है:
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आरोपी: मोहम्मद इब्राहिम शाह उर्फ यावर, नासिर अहमद गनी, मकसूद अहमद (डॉ. अल्बर्ट), तनवीर अहमद (डॉ. मार्टिन), तौसीफ अहमद मीर, खुर्शीद अहमद और इश्फाक अहमद।
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भूमिका: ये आरोपी क्षेत्रीय प्रभारी और खाता संचालक के रूप में काम कर रहे थे। ये बेरोजगार युवकों को आसान पैसे कमाने का लालच देकर उनके बैंक खातों का उपयोग करते थे।
Jammu & Kashmir: ठगी का तरीका, फर्जी वेबसाइट और फिशिंग
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प्लेटफॉर्म: गिरोह ने paisavault.com जैसी नकली वेबसाइटें बनाई थीं जो पूरी तरह से वैध निवेश प्लेटफॉर्म की तरह दिखती थीं।
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विज्ञापन: फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप पर भारी विज्ञापन किए जाते थे, जिनमें 30 दिन में 50% रिटर्न तक का दावा किया जाता था।
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भरोसा जीतना: शुरुआत में पीड़ितों को छोटे रिटर्न दिखाए जाते थे, फिर उन्हें बड़ी रकम निवेश करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता था।
Jammu & Kashmir: बरामदगी और संदिग्ध भूमिकाएं
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बरामदगी: छापेमारी के दौरान 200 से अधिक एटीएम और डेबिट कार्ड बरामद किए गए।
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बैंक कर्मचारियों की भूमिका: पुलिस को संदेह है कि कुछ बैंक कर्मचारी बड़ी संख्या में खाते खोलने और संदिग्ध लेनदेन पर नजर न रखने में मदद कर रहे थे।
Jammu & Kashmir: पीड़ितों का फैलाव और जांच में समन्वय
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व्यापकता: इस घोटाले के पीड़ित महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान, दिल्ली, यूपी, पंजाब, कर्नाटक और तमिलनाडु समेत पूरे भारत में फैले हुए हैं।
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सहयोग: जांच में दिल्ली पुलिस साइबर सेल, हरियाणा पुलिस, और महाराष्ट्र की आर्थिक अपराध शाखा सहायता प्रदान कर रही हैं। CBI और ED को भी सूचित किया गया है।
Jammu & Kashmir: जनता के लिए सावधानी और सुझाव
पुलिस ने जनता को ऑनलाइन निवेश योजनाओं के प्रति सतर्क रहने के लिए निम्नलिखित सुझाव दिए हैं:
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किसी भी निवेश प्लेटफॉर्म की SEBI के साथ रजिस्ट्रेशन की जांच करें।
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बहुत अधिक रिटर्न का वादा करने वाली योजनाओं से बचें।
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सोशल मीडिया विज्ञापनों पर आंख बंद करके विश्वास न करें।
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धोखाधड़ी होने पर तुरंत साइबर क्राइम पोर्टल (cybercrime.gov.in) या 1930 पर कॉल करें।
निष्कर्ष: जांच अभी जारी है और अधिक गिरफ्तारियां हो सकती हैं। आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी (420), आपराधिक साजिश (120B), IT एक्ट और मनी लॉन्ड्रिंग (PMLA) के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस फ्रीज किए गए खातों से पीड़ितों के पैसे की वसूली के लिए प्रयास कर रही है।
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