जयशंकर का दुनिया को संदेश: व्यापार समझौतों से बढ़ रही भारत की धमक, बोले- अब हम पहले से कहीं ज्यादा मजबूत स्थिति में

अब पहले से कहीं ज्यादा मजबूत स्थिति में, कांग्रेस ने नजरअंदाज किया नॉर्थ-ईस्ट, PM मोदी

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Trade Deals: भारत की वैश्विक कूटनीति और व्यापारिक शक्ति के बारे में विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने एक महत्वपूर्ण बयान दिया है। मुंबई में आयोजित ग्लोबल इकोनॉमिक कोऑपरेशन कॉन्फ्रेंस में बोलते हुए उन्होंने कहा कि भारत आज दुनिया के तमाम देशों के साथ पहले की तुलना में कहीं अधिक गहरे और मजबूत संबंध स्थापित कर रहा है।

Trade Deals: भारत की बदलती वैश्विक पहचान

विदेश मंत्री ने कहा कि बीते कुछ वर्षों में भारत की अंतरराष्ट्रीय पहचान में जो बदलाव आया है वह उल्लेखनीय है:

  • विश्वसनीयता: अब दुनिया के देश भारत के साथ जल्द से जल्द समझौता करने को उत्सुक हैं। यह आर्थिक ताकत, राजनीतिक स्थिरता और विश्वसनीय नेतृत्व का परिणाम है।

  • वैश्विक शक्ति: भारत आज न केवल एक बड़ा बाजार है बल्कि एक वैश्विक उत्पादन केंद्र और तकनीकी शक्ति के रूप में भी उभर रहा है।

Trade Deals: प्रमुख व्यापारिक समझौते

जयशंकर ने हालिया समझौतों को वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती साख का प्रमाण बताया:

  • भारत-अमेरिका व्यापार समझौता: यह केवल वस्तुओं के आदान-प्रदान तक सीमित नहीं है बल्कि दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को एक नई ऊंचाई पर ले जाता है। इससे वस्त्र उद्योग, IT और फार्मास्यूटिकल्स क्षेत्रों को विशेष लाभ होगा।

  • भारत-यूरोपीय संघ संबंध: यह कई वर्षों की कूटनीतिक कोशिशों का परिणाम है। इससे भारतीय उत्पादों को यूरोपीय बाजार में प्राथमिकता मिलेगी और टैरिफ संबंधी बाधाएं कम होंगी।

Trade Deals: आत्मनिर्भर भारत और वैश्विक व्यापार

जयशंकर ने स्पष्ट किया कि आत्मनिर्भरता का अर्थ अलगाव नहीं है:

  • पूरक लक्ष्य: भारत घरेलू उत्पादन क्षमता बढ़ाते हुए वैश्विक व्यापार में भी सक्रिय भागीदारी करना चाहता है। ये दोनों लक्ष्य एक-दूसरे के पूरक हैं।

  • आपूर्ति श्रृंखला: मजबूत घरेलू उद्योग विकसित करने से भारत वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में अधिक मूल्यवान भागीदार बनता है।

Trade Deals: वैश्विक मंचों पर भारत का नेतृत्व

  • ग्लोबल साउथ की आवाज: भारत एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के विकासशील देशों की आवाज उठा रहा है। वैश्विक व्यापार नियमों को अधिक न्यायसंगत बनाने के लिए भारत प्रयासरत है।

  • आर्थिक कूटनीति: विदेश नीति में अब व्यापार, निवेश, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और आर्थिक सहयोग को केंद्रीय स्थान दिया जा रहा है।

  • आक्रामक कूटनीति: भारत की विदेश नीति अब रक्षात्मक नहीं बल्कि आक्रामक और सकारात्मक है। हम अपनी शर्तों पर दुनिया से जुड़ रहे हैं।

Trade Deals: चुनौतियां और भविष्य का लक्ष्य

  • चुनौतियां: जयशंकर ने स्वीकार किया कि भू-राजनीतिक तनाव और आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान जैसी चुनौतियां मौजूद हैं।

  • रणनीति: भारत अपने व्यापारिक संबंधों को विविधतापूर्ण बना रहा है ताकि किसी एक क्षेत्र पर अत्यधिक निर्भरता न हो।

  • लक्ष्य 2030: भारत का लक्ष्य 2030 तक अपने निर्यात को दोगुना करना है और इसके लिए व्यापार कूटनीति एक महत्वपूर्ण हथियार है।

निष्कर्ष: जयशंकर के इस संबोधन ने स्पष्ट कर दिया कि भारत वैश्विक आर्थिक मंच पर एक आत्मविश्वासी देश के रूप में अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहा है।

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