ITC मौर्या होटल केस,- खराब हेयरकट के लिए 5.2 करोड़ की मांग, सुप्रीम कोर्ट ने 25 लाख में निपटाया मामला

खराब हेयरकट के लिए 5.2 करोड़ मांगे, सुप्रीम कोर्ट ने मुआवजा घटाकर 25 लाख किया, 7 साल बाद आया फैसला

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ITC Maurya Haircut Case: भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने दिल्ली के प्रतिष्ठित ITC मौर्या होटल और एक महिला ग्राहक के बीच चल रहे एक असामान्य विवाद में अंतिम फैसला सुना दिया है। आशना रॉय नाम की महिला ने शुरुआत में 5.2 करोड़ रुपये का मुआवजा मांगा था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उनके दावे को अतिशयोक्तिपूर्ण और अपर्याप्त साक्ष्य पर आधारित बताते हुए मु मुआवजे की राशि घटाकर 25 लाख रुपये कर दी है।

जस्टिस राजेश बिंदल और जस्टिस मनमोहन की पीठ ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि बिना ठोस और विश्वसनीय सबूतों के करोड़ों रुपये का मुआवजा नहीं दिया जा सकता।

ITC Maurya Haircut Case: मामले की शुरुआत और आरंभिक शिकायत

यह पूरा विवाद जुलाई 2018 में शुरू हुआ:

  • घटना: आशना रॉय ने दिल्ली स्थित ITC मौर्या होटल के प्रीमियम सैलून में हेयरकटिंग सेवा ली। आशना का दावा था कि सैलून के स्टाइलिस्ट ने उनके निर्देशों के अनुसार बाल नहीं काटे।

  • शिकायत: सेवा में कमी महसूस करने के बाद उन्होंने 2018 में राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (NCDRC) में शिकायत दर्ज कराई और शुरुआत में ही 5.2 करोड़ रुपये के मुआवजे की मांग की।

ITC Maurya Haircut Case: अदालती कार्यवाही का सफर

  • NCDRC का पहला फैसला: आयोग ने होटल को सेवा में कमी का दोषी पाया और 2 करोड़ रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया।

  • सुप्रीम कोर्ट में पहली अपील: होटल की अपील पर कोर्ट ने सेवा में कमी को स्वीकार किया, लेकिन मुआवजे की राशि को अत्यधिक बताते हुए NCDRC को इसे पुनर्निर्धारित करने को कहा।

  • NCDRC में दोबारा सुनवाई: महिला ने मांग को फिर से बढ़ाकर 5.2 करोड़ किया। आयोग ने दोबारा 2 करोड़ रुपये + 9% ब्याज का आदेश दिया। इसके बाद होटल फिर से सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।

ITC Maurya Haircut Case: सुप्रीम कोर्ट का अंतिम फैसला (फरवरी 2026)

सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने मामले की गहन समीक्षा के बाद निम्नलिखित मुख्य बातें कहीं:

  • साक्ष्य का अभाव: न्यायालय ने पाया कि आशना रॉय ने अपने इतने बड़े दावे को सही ठहराने के लिए पर्याप्त और विश्वसनीय साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किए हैं। उन्होंने पेशेवर नुकसान को प्रमाणित करने के लिए कोई ठोस दस्तावेज या गवाही नहीं दी।

  • मुआवजे का निर्धारण: कोर्ट ने NCDRC के 2 करोड़ रुपये के आदेश को रद्द कर दिया और राशि घटाकर 25 लाख रुपये कर दी। न्यायालय ने कहा कि यह राशि सेवा में कमी, मानसिक पीड़ा और असुविधा के लिए उचित मुआवजा है।

  • अंतिम भुगतान: चूंकि ITC मौर्या होटल पहले ही 25 लाख रुपये जमा कर चुका था, इसलिए अब उसे कोई अतिरिक्त राशि नहीं देनी होगी।

ITC Maurya Haircut Case: मामले का कानूनी महत्व

यह मामला उपभोक्ता अधिकार कानून में एक महत्वपूर्ण मिसाल बनता है:

  1. साक्ष्य-आधारित मांग: सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि उपभोक्ता विवादों में मुआवजे की मांग यथार्थवादी और साक्ष्य-आधारित होनी चाहिए।

  2. संतुलित दृष्टिकोण: सेवा में कमी के लिए मुआवजा मिलना चाहिए, लेकिन वह वास्तविक नुकसान के अनुपात में होना चाहिए।

  3. ब्रैंड्स के लिए सबक: प्रतिष्ठित ब्रैंड्स को अपनी सेवाओं की गुणवत्ता बनाए रखनी चाहिए क्योंकि लापरवाही से उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंच सकता है।

निष्कर्ष

पिछले 7 वर्षों से चल रहे इस लंबे कानूनी संघर्ष ने उपभोक्ता विवादों में मुआवजे की मांग और उसके औचित्य पर एक स्पष्ट न्यायिक मिसाल स्थापित कर दी है।

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