Israel Hezbollah conflict: मध्य पूर्व में जंग की आग अब और भड़क उठी है। इजरायल के रक्षा मंत्री कैट्ज ने देश की सेना को एक बेहद अहम और निर्णायक आदेश दे दिया है। उन्होंने इजरायल डिफेंस फोर्सेज यानी आईडीएफ को लेबनान में और आगे बढ़ने तथा अतिरिक्त सामरिक ठिकानों पर पूरी तरह नियंत्रण कायम करने की आधिकारिक अनुमति दे दी है। यह आदेश ऐसे वक्त में आया है जब मध्य पूर्व पहले से ही अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच चल रहे व्यापक सैन्य संघर्ष की चपेट में है।
Israel Hezbollah conflict: इजरायल ने लेबनान में बढ़ाई सैन्य कार्रवाई
इजरायल के रक्षा मंत्री कैट्ज ने देश की सेना को एक बेहद अहम और निर्णायक आदेश दे दिया है। उन्होंने इजरायल डिफेंस फोर्सेज यानी आईडीएफ को लेबनान में और आगे बढ़ने तथा अतिरिक्त सामरिक ठिकानों पर पूरी तरह नियंत्रण कायम करने की आधिकारिक अनुमति दे दी है। यह आदेश ऐसे वक्त में आया है जब मध्य पूर्व पहले से ही अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच चल रहे व्यापक सैन्य संघर्ष की चपेट में है। इजरायली सेना का यह कदम हिजबुल्लाह के खिलाफ चल रही कार्रवाई को एक नए और अधिक आक्रामक मुकाम पर ले जाने का संकेत माना जा रहा है।
Israel Hezbollah conflict: ऑपरेशन रोर ऑफ द लायन के तहत हो रही है कार्रवाई
लेबनान में इजरायली सेना की यह कार्रवाई एक बड़े और सुनियोजित सैन्य अभियान का हिस्सा है जिसे ‘ऑपरेशन रोर ऑफ द लायन’ का नाम दिया गया है। इस ऑपरेशन के तहत इजरायल की 91वीं डिवीजन की टुकड़ियां दक्षिणी लेबनान के विभिन्न इलाकों में पूरी तरह सक्रिय हैं। इन टुकड़ियों को रक्षा मंत्री के नए आदेश के बाद और अधिक क्षेत्रों में आगे बढ़ने की छूट दे दी गई है। 91वीं डिवीजन इजरायली सेना की सबसे अनुभवी और युद्धकुशल इकाइयों में से एक मानी जाती है। अब इसे हिजबुल्लाह के नए ठिकानों को निशाना बनाने और उन पर कब्जा करने का काम सौंपा गया है।
Israel Hezbollah conflict: हिजबुल्लाह को खत्म करना है इजरायल का लक्ष्य
इजरायल का इस पूरी कार्रवाई के पीछे एक स्पष्ट और घोषित लक्ष्य है। वह हिजबुल्लाह को लेबनान में इस हद तक कमजोर करना चाहता है कि वह भविष्य में इजरायल के लिए कोई खतरा न बन सके। हिजबुल्लाह को ईरान का सबसे ताकतवर प्रॉक्सी संगठन माना जाता है और इजरायल का मानना है कि जब तक हिजबुल्लाह मौजूद है तब तक उत्तरी इजरायल की सुरक्षा कभी पूरी तरह सुनिश्चित नहीं हो सकती। पिछले कुछ महीनों में हिजबुल्लाह ने इजरायल पर कई बार मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं। इसी के जवाब में इजरायल ने यह आक्रामक सैन्य अभियान शुरू किया है।
Israel Hezbollah conflict: लेबनान पर इस युद्ध का गहरा असर
इजरायली सेना की इस कार्रवाई का सबसे ज्यादा असर लेबनान की आम जनता पर पड़ रहा है। दक्षिणी लेबनान के कई इलाकों से बड़ी संख्या में लोग पलायन कर रहे हैं। इंफ्रास्ट्रक्चर बुरी तरह प्रभावित हुआ है और जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। अस्पताल, स्कूल और सार्वजनिक सेवाएं बुरी तरह बाधित हैं। लेबनान की सरकार इस पूरे घटनाक्रम पर गहरी चिंता जता रही है। लेबनानी अधिकारियों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से हस्तक्षेप की मांग की है लेकिन अब तक कोई ठोस नतीजा सामने नहीं आया है। संयुक्त राष्ट्र ने भी दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील की है।
Israel Hezbollah conflict: ईरान कनेक्शन और व्यापक युद्ध की आशंका
इजरायल की यह कार्रवाई एक बड़े और जटिल सैन्य संघर्ष का हिस्सा है जिसमें ईरान केंद्रीय भूमिका में है। ईरान हिजबुल्लाह को न केवल वित्तीय सहायता देता है बल्कि उसे अत्याधुनिक हथियार और सैन्य प्रशिक्षण भी मुहैया कराता है। इजरायल का मानना है कि हिजबुल्लाह को कमजोर करना दरअसल ईरान की क्षेत्रीय महत्वाकांक्षाओं को सीधे चोट पहुंचाना है। दूसरी तरफ ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए कहा है कि हिजबुल्लाह पर हमले का बदला जरूर लिया जाएगा। इससे यह आशंका और बढ़ गई है कि यह संघर्ष और व्यापक रूप ले सकता है।
Israel Hezbollah conflict: अमेरिका की भूमिका और क्षेत्रीय समीकरण
इस पूरे युद्ध में अमेरिका इजरायल के साथ खड़ा है। राष्ट्रपति ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिका ने न केवल ईरान पर सीधे हमले किए हैं बल्कि इजरायल को भी हर तरह की सैन्य और कूटनीतिक सहायता दे रहा है। मध्य पूर्व में 50 हजार से अधिक अमेरिकी सैनिकों की तैनाती इस बात का स्पष्ट संकेत है कि अमेरिका इस युद्ध को लेकर पूरी तरह गंभीर है। इस पूरे घटनाक्रम ने क्षेत्रीय शक्ति संतुलन को पूरी तरह बदल दिया है। सऊदी अरब, बहरीन और अन्य खाड़ी देश सतर्क नजर रख रहे हैं। भारत ने भी इस मामले में सक्रिय कूटनीतिक भूमिका निभाते हुए सभी पक्षों से शांति की अपील की है।
Israel Hezbollah conflict: आगे क्या होगा, सबकी निगाहें टिकी हैं
इजरायली रक्षा मंत्री के इस ताजा आदेश के बाद दुनियाभर के सैन्य और राजनीतिक विशेषज्ञों की नजरें दक्षिणी लेबनान पर टिकी हुई हैं। सवाल यह है कि क्या इजरायल हिजबुल्लाह को वास्तव में निर्णायक रूप से कमजोर कर पाएगा या यह संघर्ष और लंबा खिंचेगा। हिजबुल्लाह ने अभी तक पूरी तरह हार नहीं मानी है और उसके लड़ाके अब भी कई इलाकों में सक्रिय हैं। आने वाले दिनों में इस संघर्ष की दिशा और गति यह तय करेगी कि मध्य पूर्व में शांति की कोई उम्मीद बचती है या नहीं। फिलहाल तो ऐसा लगता है कि यह जंग अभी लंबी चलने वाली है।
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